बेटी को संसद भेजने के लिये स्वामी प्रसाद बहा रहे हैं पसीना
बेटी को संसद भेजने के लिये स्वामी प्रसाद बहा रहे हैं पसीना
दिनेश शाक्य
मैनपुरी। संघमित्रा मौर्य हैं बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी, जो सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठा पूर्ण संसदीय सीट मैनपुरी से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव मैदान मे उतरी हुयी हैं। अपनी बेटी को जिताने के लिये उनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से मैनपुरी इलाके के गली कूचों में वोट मांगने में लगे हुये हैं।
इटावा जिले के पड़ोसी जिले मैनपुरी संसदीय सीट की एक अहम् विधानसभा सीट जसंवतनगर भी आती है। यादव बाहुल्य इस विधानसभा सीट से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भाई और उत्तर प्रदेश के कई विभागों के प्रमुख कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव भी इसी इलाके से लंबे समय से विधायक चुनते आ रहे हैं। इसी कारण स्वामी प्रसाद मौर्य जसवंतनगर में अपना खासा समय दे रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य आज अपनी बेटी संघमित्रा के साथ जसवंतनगर आये, जहाँ पर उन्होंने बसपा के स्थानीय कार्यालय का शुभांरभ किया। शुभारंभ मौके पर जुटे बसपाईयो से उन्होंने अपनी बेटी के पक्ष में जम करके मतदान करने की शपथ दिलाई।
बसपा के कददावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी बेटी संघमित्रा मौर्य के राजनैतिक भविष्य को संवारने के लिये सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के गढ़ में पसीना बहाने में जुटे हुये हैं। मैनपुरी संसदीय सीट से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बसपा प्रत्याशी के तौर पर बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या की बेटी संघमित्रा मौर्य उतरी हुयी हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी पहली बार संसदीय चुनाव मैदान में उतरी हुयी हैं और उनके पिता स्वामी प्रसाद अपनी बेटी को पहली बार में ही संसद पहुँचाने की गरज से मैनपुरी संसदीय इलाके के गांव गली मे पसीना बहाने में जुटे हैं।
मौर्या कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव के आंतक से इलाकाई जनता काफी परेशान हो चुकी है वो जहाँ-जहाँ भी वोट मांगने के लिये जा रहे हैं वहाँ उनको खासी तवज्जो मिल रही है। इलाके का समीकरण भी बसपा के पक्ष में ही नजर आ रहा है। इससे पहले भले ही मुलायम सिंह यादव या उनके करीबी जीतते रहे हो लेकिन इस बार वो इस इलाके में परिवर्तन की लहर ना केवल देख रहे हैं बल्कि लोगों के चेहरे पढ़ भी रहे हैं। बसपा नेता और उत्तर प्रदेश के नेता विरोधी दल स्वामी प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि विकास का दावा करने वाली अखिलेश सरकार की कलई अगर हकीकत मे देखनी है तो उनके पिता मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र मैनपुरी और उनकी बीबी डिंपल के संसदीय क्षेत्र कन्नौज मे आईये। जहाँ पर सालों से जर्जर पड़ी उखडी सड़कें इस बात की पुष्टि करती हैं कि मुख्यमंत्री के विकास का दावा थोथा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार उत्तर प्रदेश के विकास का दावा कर रही हैं लेकिन दोनों इलाकों की जर्जर सड़कें उनके विकास के दावों की पोल खोल रही हैं।
यह समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि है। तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा देश के रक्षामंत्री का पद संभालने के साथ ही समय समय पर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके मुलायम सिंह यादव किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। राजनीतिक हलकों में उनका दबदबा मैनपुरी वालों को भी गर्व की अनुभूति कराता है। यहाँ के लोगों के लिये यह सचमुच सुखद है कि जब-जब सपा मुखिया इस धरती से जीत कर सांसद बने तब तब उन्होंने राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। उनकी देखरेख में मैनपुरी में एक से बढ़कर एक विकास योजनाएं आकार ग्रहण कर रही हैं और इलाके की सूरत बदल रही है।
सपा सुप्रीमो सबसे पहले 1996 में इस सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े तो जनता ने उन्हें ऐतिहासिक मतों से जिताकर दिल्ली भेजा और वे देश के रक्षामंत्री बने। 2004 व 2009 के चुनावों में भी वह इसी सीट से जीते।
मैनपुरी लोकसभा सीट के इतिहास को अगर देखें तो पहले लोकसभा चुनाव 1952 मे बादशाह गुप्ता कांग्रेस, 1957 बंशीदास धनगर प्रसोपा, 1962 बादशाह गुप्ता कांग्रेस, 1967 महाराज सिंह कांग्रेस, 1971 महाराज सिंह कांग्रेस, 1977 रघुनाथ सिंह वर्मा लोकदल, 1980 रघुनाथ सिंह वर्मा जनता पार्टी, 1984 बलराम सिंह यादव कांग्रेस, 1989 उदय प्रताप सिंह जद, 1991 उदय प्रताप सिंह जपा, 1996 मुलायम सिंह यादव, सपा 1998 बलराम सिंह यादव सपा, 1999 बलराम सिंह यादव सपा, 2004 मुलायम सिंह यादव सपा, 2004 धर्मेन्द्र यादव (उपचुनाव) सपा व 2009 मुलायम सिंह यादव ने जीत हासिल की है। जनादेश न्यूज़ नेटवर्क


