भविष्य में और अधिक ठोस निर्णय लिये जाने की आवश्यकता - पाठक का पत्र
भविष्य में और अधिक ठोस निर्णय लिये जाने की आवश्यकता - पाठक का पत्र
भविष्य में और अधिक ठोस निर्णय लिये जाने की आवश्यकता - पाठक का पत्र
सेवा में
संपादक जी
महोदय
जैसे जैसे राष्ट्रवादी डोनाल्ड ट्रम्प के अमरीकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने की उल्टी गिनती होती जा रही है, वैसे-वैसे ही अमरीका की नीतियां भारत के लिए लाभकारी होने की सम्भावना बढ़ती जा रही है।
निःसंदेह अमरीका भी हमारे समान इस्लामिक आतंकवाद से त्रस्त है और राष्ट्रपति ट्रम्प इसके विरुद्ध कड़े सन्देश पहले से ही देते आ रहें है। ऐसे सुअवसर का लाभ उठा कर अपनी क्षमताओं के अनुसार हम अपने शत्रुओं को धराशायी करने का सफल अभियान चला सकते हैं।
हमें इसके लिये आक्रामक बनना होगा अन्यथा एक बार के 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद पाक के प्रतिउत्तरों से हमारी अधिक हानि होती रहेगी।
अतः भविष्य में और अधिक ठोस निर्णय लिये जाने की आवश्यकता है।
भारत-पाक में हुए चार युद्धों 1947-48, 1965,1971 व 1999 में हम जीत करके भी विजयी नहीं हुए, क्योंकि हमने इन युद्धों में हज़ारो वर्ग किलो मीटर भूभाग खोया और हज़ारों जवानों के बलिदानों पर आंसू बहाये। परंतु हम अवसर मिलने पर भी इस क्षति की पूर्ति न कर पायें, क्यों ?
हमारा 2000-2500 वर्षो का पिछला इतिहास विदेशी आक्रान्ताओं के आगे रक्षात्मक व आत्मसमर्पण की प्रवृति के दर्शन कराता है। वे हमारी इसी कायराना व भीरुता का लाभ उठा कर हमको लूटते रहे और मारते भी रहे। अनेक विरोधों के उपरान्त भी हमारी आपसी फूट उन आक्रान्ताओं को लाभान्वित करती रही। प्राचीन भारत भूमि में "अश्वमेघ यज्ञ" द्वारा विश्व विजयी अभियान की परंपरा थी। परंतु स्वार्थ व पदलालसा के बढ़ते दुराचार ने उस परंपरा को भारत भूमि से धूमिल कर दिया। जिससे वीरों का अभाव होता गया और संघर्षो से बचने की मानसिकता बनती रही।
हम धर्म की स्थापना व जीवन में मर्यादा स्थापित करने वाली सभ्यता के वाहक है।
यह ठीक है कि "महाभारत" एक आपसी संघर्ष था, परंतु वह "युद्ध" धर्म की रक्षा व स्थापना का परिचायक भी है।
आज विश्व के अनेक देशों में 'महाभारत' में दिए गये भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों की बड़ी बड़ी चर्चाएं होती हैं।
अनेक विद्वानों ने 'गीता' को विश्व का सर्वोत्तम काव्य मान कर इस पर शोध करके जीवन में आत्मसात करने का परामर्श दिया है।
आज हमको अपनी प्राचीन धरोहरों की जड़ो में जाना होगा।
हमारा प्राचीन इतिहास अनेक शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है।
हम श्रीराम व श्रीकृष्ण के स्थापित मूल्यों को अपनाने के साथ साथ आचार्य चाणक्य की कूटनीतिज्ञता का लाभ उठाये तो हम संभवतः कभी भी किसी से युद्ध व बौद्धिक विमर्श में भी हार न मानें ।
भवदीय
विनोद कुमार सर्वोदय
ग़ाज़ियाबाद
Vinod Kumar Gupta


