भाजपा को गजब भरोसा, बिहार में तीन चौथाई बहुमत से बनेगी भाजपानीत सरकार
भाजपा को गजब भरोसा, बिहार में तीन चौथाई बहुमत से बनेगी भाजपानीत सरकार
नहीं हो रही है मोदी की रैलियों में कटौती
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। इसे डैमेज कंट्रोल की कवायद कहें या फिर अतिशयोक्तिपूर्ण दावा, बिहार में भाजपा के चुनाव अभियान की कमान संभाले पार्टी के एक शीर्षस्थ नेता का कहना है कि भाजपा वहां अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर तीन चौथाई सीटों के बहुमत से सरकार बनाएगी।
गुमनामी की शर्त पर इस शीर्षस्थ नेता ने आज यहां अनौपचारिक बातचीत में दावा किया कि पहले चरण के मतदान में भाजपा और सहयोगी दलों को 49 में 28 से 32 तथा दूसरे चरण के मतदान में उन्हें 32 में से 20 से 24 सीटें मिल सकती हैं। उनका यह भी दावा है कि अगले तीन चरणों के मतदान में पांचवें चरण को छोडक़र उनके गठबंधन को दोनों चरणों में भारी बढ़त मिलनेवाली है। पांचवें चरण में कोसी और सीमांचल के इलाकों में होनेवाले मतदान को उन्होंने बहुत ही रोमांचक और जटिल होने की बात कही। लगे हाथ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लालू प्रसाद-नीतीश कुमार के पास यादव, मुस्लिम और कुर्मी जनाधार एकजुट है। यह भी कि दोनों प्रमु भ गठबंधनों के वोट एक दूसरे की तरफ स्थनांतरित हो रहे हैं।
भाजपा के कुशल रणनीतिकार कहे जाने वाले इस नेता ने दावा किया कि मीडिया के जरिए सुनियोजित ढंग से इस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं कि बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों में कटौती की जा रही है। उन्होंने बताया कि सच तो यह है कि मोदी जी पहले वहां 20 चुनावी रैलियां करनेवाले थे, अब वह 22 रैलियों करने जा रहे हैं। तीसरे और चौथे चरण के मतदान से पहले वह चार चार और पांचवें चरण के मतदान से पहले पांच रैलियों को संबोधित करेंगे। अब तक वह नौ रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह बिहार में अभी तक 29 चुनावी रैलियों कर चुके हैं। वह 20 रैलियां वहां और करने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार का मुख्यमंत्री कोई बाहरी नहीं, बिहारी ही बनेगा, लेकिन वह भाजपा का होगा। उन्होंने नीतीश कुमार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह खुद को ही बिहार समझते हैं।
भाजपा नेता ने बीफ को लेकर छिड़े विवाद और उसके बारे में भाजपा नेताओं के विवादित बयानों के चुनाव में असर के बारे में पूछे जाने पर कहा कि बीफ पर लालू प्रसाद के बयान से जरूर निचले स्तर पर मतदाता नाराज दिख रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने माफी मांग ली है। संघ के सर संघचालक मोहन भागवत के आरक्षण पर विवादित बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनके बयान को लेकर नहीं बल्कि उसे गलत ढंग से पेश किए जाने को लेकर जरूर कुछ गलतफहमी पैदा हो गई थी लेकिन अब तो सब कुछ साफ हो गया है।
उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद और कांग्रेस से हाथ मिला लेने के कारण ब्रांड नीतीश जैसी कुछ छीज नहीं रह गई है। नीतीश अगर अलग रहकर चुनाव लड़ें होते तो हालात कुछ और हो सकते थे, त्रिशंकु विधान सभा की स्थिति बन सकती थी। हालांकि इससे पहले वह समझाने में लगे थे कि वहां नीतीश कुमार का अपना कुछ भी नहीं है जो कुछ है वह लालू प्रसाद का ही है।
जयशंकर गुप्त
साभार देशबन्धु


