भू-अधिग्रहण अध्यादेश और दमन के खिलाफ हुआ लखनऊ में विरोध प्रदर्शन
भू-अधिग्रहण अध्यादेश और दमन के खिलाफ हुआ लखनऊ में विरोध प्रदर्शन
लखनऊ। “मौजूदा भूमि अधिग्रहण व प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ भूमि अधिकार आंदोलन के बैनर तले राष्ट्रीय आंदोलन के चलते भू अधिकार राष्ट्रीय राजनीति का एक केन्द्र बिन्दु बन गया है और आज़ादी के आंदोलन के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। इसलिये ये ज़रूरी है कि राष्ट्रीय आंदोलन के साथ-साथ क्षेत्रीय आंदोलन भी मज़बूत हों और इसके लिये राष्ट्रीय नेतृत्वकारी आंदोलन सभी क्षेत्रीय आंदोलनों को भी इकट्ठा होकर लड़ें।“
यह विचार केन्द्र द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश व उ0प्र0 सरकार द्वारा सोनभद्र में कन्हर बाँध के लिये किये जा रहे अवैध भू-अधिग्रहण और गरीब किसानों, खेतिहर मज़दूरों व महिलाओं पर दमनकारी कार्रवाईयों के विरोध में विशाल धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने प्रकट किए।
विशाल धरना प्रदर्शन का आयोजन देश के विभिन्न जनांदोलनों जनसंगठनों, ट्रेड यूनियनों व राजनैतिक मंचों द्वारा भूमि अधिकार के सवाल पर व भू-अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में गठित संयुक्त मोर्चा ‘‘भूमि अधिकार आंदोलन’’ द्वारा तय किये गये राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत उ0प्र0 की राजधानी लखनऊ में दिनांक 12 जून 2015 को भूमि अधिकार आंदोलन व अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन के बैनर तले किया गया।
इस प्रदर्शन में उ.प्र. के विभिन्न जनपदों तराईक्षेत्र लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, गौंडा, बहराईच, बुन्देलखण्ड क्षेत्र चित्रकूट, कैमूर सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, अधौरा व रोहताश बिहार से यूनियन के करीब 3000 की संख्या में समुदाय के सदस्यों व नेतृत्वकारी साथियों ने पुरजोश हिस्सेदारी की। इनमें विशेष रूप से कन्हर बाँध प्रभावित गाँवों के 50 लोगों का एक दमनकारी स्थिति में भी शामिल होना बहुत महत्वपूर्ण रहा।
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य का0 हन्नान मौला, मज़दूरों के राष्ट्रीय यूनियन एन.टी.यू.आई के महासचिव का0 गौतम मोदी, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश महासचिव का0 दीनानाथ सिंह, एन.ए.पी.एम के संयोजक संदीप पांडे, कम्युनिस्ट पार्टी माले केन्द्रीय कमेटी सदस्यगण का0 सुधाकर, का0 कृष्णा अधिकारी, का0 सलीम, का0 रमेश व दलित भूमि अधिकार आंदोलन से रामकुमार व इनके अलावा दिल्ली समर्थक समूह-दिल्ली से कुछ कार्यकरता इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
कार्यक्रम को आयोजकों में से एक रोमा एडवोकेट ने बताया कि इन सभी साथियों के शामिल होने से इस प्रदर्शन का मंच एक मज़बूत साझा राजनैतिक मंच के रूप में तब्दील हो गया। जो कि बहुत उत्साहजनक रहा। इस प्रदर्शन में भी यूनियन के सभी कार्यक्रमों की तरह महिलाओं की उपस्थिति 80 फीसदी से अधिक रही, जिससे सभी आंदोलनों से आये प्रमुख वरिष्ठ साथीगण भी बहुत प्रभावित हुए और अपने द्वारा रक्खे गये वक्तव्यों में उन्होंने इस बात का विशेष रूप से जिक्र भी किया।
सुश्री रोमा ने बताया कि 12 जून की प्रातः राज्यों के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले समुदायों के लोग शहर के अलग-अलग स्टेशनों से रैली की शक्ल में अपने हाथों में लाल रंग के बैनरों व झण्डों को लेकर भू-अधिग्रहण अध्यादेश और कन्हर बाँध विरोधी आंदोलन के समर्थन में पुरजोर नारेबाज़ी करते हुए धरना स्थल लक्ष्मण मेला मैदान में पहुंचे जहां एक विशाल जनसभा की गई। इस जनसभा को समुदाय के नेतृत्वकारी साथियों मातादयाल, सोकालो गोण्ड, निबादा राणा, फुलबासी व श्यामलाल ने सम्बोधित करते हुए अपनी बात में केन्द्र द्वारा भू अधिग्रहण अध्यादेश जारी करने और राज्य सरकार द्वारा कन्हर बाँध विरोधी आंदोलन को दमन द्वारा कुचलने और अवैध भूमि अधिग्रहण करने की कोशिश को लेकर सत्ता को सीधी चुनौती देने की बात की और यह बात खुलकर कही गई कि कन्हर की लड़ाई महज सोनभद्र की लड़ाई नहीं है, ये पूरे देश की लड़ाई है और अपने जल जंगल ज़मीन को बचाकर अपनी आजीविका और पर्यावरण को सुरक्षित करने की लड़ाई है, जिसे हम सभी क्षेत्रों के साथी मिल कर लड़ेंगे और कन्हर बाँध विरोधी आंदोलन को सांगठनिक मज़बूती देंगे।
रोमा ने बताया कि “सभी प्रमुख नेतृत्वकारी साथियों ने कन्हर में चल रहे बाँध विरोधी आंदोलन को एक महत्वपूर्ण आंदोलन के रूप में चिन्हित किया। जहां पर अध्यादेश आने के बाद आंदोलनकारियों पर पुलिस द्वारा दो बार गोलीबारी की गई और जिसके कारण वहां के आंदोलनकारी लोगों पर पुलिस प्रशासन का भारी दमन चल रहा है। क्षेत्र में आदिवासी दलित और किसान मज़दूरों के ऊपर प्रशासन ने एक आतंक की स्थिति कायम की हुई है, जिससे वहां की आम जनता की स्वाभाविक जि़न्दगी प्रभावित हो रही है। आंदोलन के कई प्रमुख साथीगण अभी भी जेल में हैं और अदालती कार्रवाई को प्रशासन के हस्तक्षेप के कारण बार-बार स्थगित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों के नागरिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। राष्ट्रीय आंदोलनकारी संगठन अब कन्हर प्रभावित क्षेत्र में मिलकर नागरिक अधिकारों की पुनर्बहाली के लिये कन्हर आंदोलन को तेज़ करेंगे। इसी तरह अन्य राज्यों में भी जहां-जहां भू-अधिकार आंदोलन चल रहे हैं वहां भी उन्हें मिलकर मज़बूत किया जायेगा और आने वाले दिनों में भू-अधिकार के मुद्दे पर राष्ट्रीय आंदोलन को सशक्त किया जायेगा, जो कि संसद से लेकर गाँव तक चलेगा। इससे देश की राजनैतिक स्थिति पर बुनियादी परिवर्तन की प्रक्रिया भी शुरू होगी।“
का0 हन्नान मौला, का0 गौतम मोदी, का0 दीनानाथ सिंह, का0 कृष्णा अधिकारी, संदीप पांडे, का0 सुधाकर, का0 सलीम, का0 सुधाकर व रामकुमार द्वारा रखी गयी बातों में मुख्य रूप से कहा गया कि
कार्यक्रम का सफल संचालन यूनियन की उपमहासचिव रोमा द्वारा किया गया और अन्त में यूनियन के महासचिव अशोक चैधरी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव रखकर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।


