नई दिल्ली। भोपाल गैस त्रासदी की 31वीं बरसी पर जहां देश भर में प्रदर्शन हुए, वहीं हत्यारी यूनियन कार्बाइड से संबंधों को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली पर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए।

फेसबुक पर राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी शशि कान्त गोयल ने अपनी एक पोस्ट में अरुण जेटली को कई गंभीर सवाल उठाकर घेरा और सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, श्रीमती सुषमा स्वराज और श्री अरुण जेटली अब बताएंगे, कि इसमें अरुण जेटली को क्या फायदा मिला ?

यहां हम शशि कान्त गोयल की पोस्ट बिना किसी संपादन के दे रहे हैं, पढ़ें – शशि कान्त गोयल की पोस्ट -

कल भोपाल गैस त्रासदी की 31वीं बरसी थी

ये त्रासदी ना केवल भारत बल्कि विश्व पटल पर कई ज़ख़्म छोड़ गई

ये त्रासदी मानवता के सीने पर एक गहरा ज़ख़्म है

पर

पर इसमें कुछ ऐसे सवाल हैं जो आज तक अनसुलझे हैं और जो सीधे-सीधे भाजपा को सवालों के कटहरे में खड़ा करते हैं

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वॉरेन एंडरसन और भोपाल गैस त्रासदी- सच्चाई और भाजपा का झूठ

1. 19.03.1998 से 22.05.2004 के बीच केंद्र में श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी।

2. जुलाई 1998 में भाजपा सरकार के अटॉर्नी जनरल श्री सोली सोराबजी ने स्पष्ट निर्णय दिया, कि यूनियन कार्बाईड के चेयरमैन वॉरेन एंडरसन के खिलाफ ऐसा कोई केस नहीं बनता है, जिसके कारण उन्हें भोपाल गैस त्रासदी केस की सुनवाई के लिए भारत आना पड़े।

3. 25.09.2001 को उस समय के कानून मंत्री श्री अरुण जेटली ने फाईल में कहा कि, ‘’यह ऐसा केस नहीं है, कि श्री एंडरसन ने कोई ऐसा काम किया है, जिसके कारण गैस लीक हुई हो और लोगों की जान गई हो एवं उन्हें चोट आई हो।‘’ उन्होंने आगे कहा, ‘’इस बात का कोई प्रमाण नहीं है, कि श्री एंडरसन को डिज़ाईन में कमी और सुरक्षा मापदंडों के उल्लंघन की जानकारी थी, और उसके बाद भी वे बचाव के उचित कदम न उठा सके।‘’ श्री जेटली ने कहा कि श्री एंडरसन के प्रत्यार्पण का केस इस अनुमान पर आधारित है, कि श्री एंडरसन को उपरोक्त जानकारी इसलिए थी, क्योंकि वे पैरेंट कंपनी के चेयरमैन थे। श्री जेटली ने आगे कहा, कि इस बात के भी कोई प्रमाण नहीं हैं, कि पैरेंट कंपनी भोपाल प्लांट के संचालन और दैनिक कार्यों पर नियंत्रण रखती थी। उन्होंने विशेष रूप से कहा, ‘’हमारा प्रत्यर्पण का केस कमजोर है‘‘।

इसलिए यह साफ है, कि श्री वाजपेई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सरकारी फाईल में श्री अरुण जेटली के लिखित बयान के द्वारा वॉरेन एंडरसन को पूरी तरह से दोषमुक्त कर दिया।

4. जैसा ऊपर बताया गया है, 22 मई, 2004 को भाजपा चुनाव हार गई।

13.12.2006 को श्री अरुण जेटली ने डाउ केमिकल्स कंपनी को निम्नलिखित बयान दिए:-

‘’इसलिए, यह माना जा सकता है, कि डाउ केमिकल्स को प्लांट स्थल पर क्षतिपूर्ति के लिए किसी भी रूप में जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है... हालांकि उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है, कि डाउ केमिकल्स को भोपाल गैस त्रासदी 1984 के लिए सिविल या आपराधिक कार्यवाही के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।‘’

क्या प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, श्रीमती सुषमा स्वराज और श्री अरुण जेटली अब बताएंगे, कि इसमें अरुण जेटली को क्या फायदा मिला ?

क्या काूनन मंत्री के रूप में उनके द्वारा दिया गया पहला बयान किसी लेन-देन का नतीजा था, जिसके बाद वे डाउ केमिकल्स कंपनी के वकील बने, जिसकी सब्सिडियरी कंपनी यूनियन कार्बाईड कॉर्पोरेशन 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की जिम्मेदार थी ?

5. 2008 में आरटीआई के द्वारा प्राप्त किए गए दस्तावेजों ने खुलासा किया, कि भाजपा ने डाउ केमिकल्स कंपनी से 2500 अमेरिकी डॉलर का डोनेशन लिया था। पार्टी प्रवक्ता श्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा था कि, ‘’अधिकांश केसों में डोनेशन फेस वैल्यू पर लिए गए हैं और हमने इसकी जांच नहीं की, कि चेक पर किसने हस्ताक्षर किए।‘’

मोदी के U-TURN

Posted by Shashi Kant Goyal on Saturday, December 5, 2015