भ्रष्टाचार एवं काले धन के खिलाफ भारत सरकार और बाबा रामदेव की नौटंकी
भ्रष्टाचार एवं काले धन के खिलाफ भारत सरकार और बाबा रामदेव की नौटंकी
प्रिय बाबा रामदेव,
कुछ समय पहले भी मैंने आपको एक पत्र लिखा था परन्तु आपका कोई जवाब नहीं मिला | भला आप मुझे क्यूँ जवाब देंगे? आप इतने बड़े आदमी हैं जैसा कि आप खुद कहते है कि आपकी हजारो करोड़ की ब्रांड वैल्यू है तो भला आपके जैसा व्यक्ति मेरे जैसे छोटे एवं साधारण आदमी के पत्र का जवाब क्यूँ देगा | परन्तु मैं आपको फिर लिखा रहा हूँ, ये बताने के लिए कि आपकी दशा देख कर कष्ट होता है | आपकी क्या स्थिति हो गयी है? और आप स्वयं ही इसके जिम्मेदार हो |
कुछ समय पहले आपने घोषणा करी थी कि आप भी अनशन करेंगे जैसा कि अन्ना हजारे ने किया, भष्टाचार को समाप्त करने और काले धन को वापिस लाने के लिए | मैंने पिछले पत्र मै आपसे कहा था कि आप ईमानदारी से अपने उद्देश्यों को स्पष्ट करें जिससे कि लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा न हो |
भ्रमपूर्ण स्थिति का कारण यह है कि आधिकारिक रूप से आपने रामलीला मैदान में ४ जून से ५००० लोगों के साथ योग शिविर लगाने कि अनुमति मांगी, परन्तु आपने वहां ५०००० लोगों को इकठ्ठा करके योग को छोड़ अनशन और राजनीति करनी शुरू कर दी, इससे भी ज्यादा भ्रम तो तब हुआ जब कि इस सब के बीच आप अचानक ही सरकार के नुमाइंदों से वार्ता हेतु २ घंटे के लिए गायब हो गए | आखिर आपने वार्ता जनता के सामने क्यूँ नहीं करी?
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रेस वार्ता के दौरान आपके द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ तथाकथित समझौता पत्र दिखाया कि आपके और सरकार के बीच में आपका अनशन शुरू होने के पहले ही समझौता हो गया है, आपको पहले ही पता था कि आप अपना अनशन जिस दिन शुरू करेंगे उसी दिन उसे ख़तम भी कर देंगे | हजारों लोग जो कि आपके समर्थन में भष्टाचार से लड़ने के लिए आये थे आपने उनको भी इस समझौते के बारे में नहीं बताया, आखिर क्यूँ नहीं वो लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस करें?
पुलिस कार्यवाही पर आपको अधिक आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्यूँ कि आपने अपने राजनितिक आन्दोलन को योग शिविर का झूठा नाम दिया, परन्तु फिर भी ४ जून की रात पुलिस प्रशासन ने आपके साथ जो व्यवहार किया और जिस तरह से आपको आपके आश्रम वापिस भेज दिया हम सभी उसनी निंदा करते हैं, मुझे आपके साथ हुए इस व्यवहार पर आपसे पूरी सहानभूति है, सरकार ने इस व्यवहार से अपने ऊपर एक और दाग लगा लिया है कि पहले तो चार - चार सरकारी नुमाइंदे एअरपोर्ट पर आपका स्वागत करने जाते है, समझौता करते है और रात के अँधेरे मै इस तरह से आपका पंडाल उखाड़ के फेंक देते है | मै सरकार के इस कदम कि भर्त्सना करता हूँ कि ५००० पुलिस के जवानों ने रात के अँधेरे में पंडाल में शांति से सोये हुए बच्चे बूढ़े एवं महिलाओं समेत सबको भगाया उनके ऊपर लाठियां बरसायीं एवं आंसू गैस के गोले छोड़े, क्या यही काम शांति पूर्वक दिन में नहीं हो सकता था ? अधिकारीयों को पता था कि ये लोग यहाँ क्यूँ इकठ्ठे हुए हैं? कानून और व्यवस्था के नाम पर इस प्रकार कि दमनात्मक कार्यवाही भारत जैसे प्रजातंत्र देश में नहीं होनी चाहिए | ऐसा करके भारत सरकार ने स्वयं ही अपनी साख पर बट्टा लगाया है | मुझे ये जानकर ख़ुशी हुई की सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान ले कर सरकार से पुलिस कार्यवाही करने पर जवाब माँगा है |
परन्तु क्या आपने सोचा कि आपके साथ ऐसा क्यूँ हुआ? अन्ना हजारे ने भी कुछ समय पहले लगभग इन्ही मुद्दों पर अनशन किया था, आखिर सरकार ने उनके साथ ऐसा क्यूँ नहीं किया? आपके साथ ही सरकार ने ऐसा क्यूँ किया?
मै आपको बताता हूँ, सरकार को पता था की यदि सरकार ने अन्ना हजारे के साथ कुछ ऐसा किया होता तो आज सरकार का अस्तित्व ही नहीं होता | अन्ना हजारे जैसे गैर राजनितिक व्यक्तित्व के साथ देश का बच्चा - बच्चा भी भ्रष्टाचार के विरोध में खड़ा था | परन्तु आपके विषय में लोगों को संदेह है कि आप योग शिविर लगा रहे हैं? या राजनीति कर रहे हैं? आपके इस कृत्य से भारत की जनता को यही सन्देश जाता है कि ये आन्दोलन, अनशन, काला धन और भष्टाचार तो एक बहाना है आपको दरअसल अपना राजनीतिक कैरियर चमकाना है | मैंने आपको ये पहले भी कहा था कि आपको अपनी स्थिति और उद्देश्य स्पष्ट करने चाहिए |
आपने स्वयं ही तो सरकार को ये कार्यवाही करने के लिए मजबूर किया, पहले योग शिविर की अनुमति और समझौता फिर आन्दोलन और अनशन, यदि सरकार ने ठीक नहीं किया तो आप भी तो ठीक नहीं कर रहे थे | लोगों को अन्ना हजारे पर संदेह नहीं हुआ, परन्तु आप पर है | वो अभी भी ये जानना चाहते हैं कि आप आखिर चाहते क्या हैं?
मुझे तो तब भी अच्छा नहीं लगा एवं आश्चर्य भी हुआ जब कि अन्ना हजारे का आमरण अनशन भी कुछ दिनों में ही ख़त्म हो गया, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हजारे का सरकार के साथ बहुत जल्दी ही समझौता हो गया | परन्तु बाबा रामदेव आपके साथ तो कहानी ही बिलकुल दूसरी है, आपको तो एक दिन पहले ही पता था कि आपका अनशन एक दिन भी नहीं चलेगा फिर भी आपको लोगों के सामने तो जाना ही था और समर्थकों को ये दिखाना ही था कि आप अनशन कर रहे हैं, परन्तु सत्यता यह थी कि आप सरकार के साथ पहले ही लिखित समझौता कर चुके थे कि आपका अनशन कैसे ख़तम होगा, जिसके बारे में आपने जनता को अँधेरे में रखा | तो आप ही बताइए कि आखिर कोई आपके ऊपर कैसे विश्वास करे कि आप लोगों के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं?
अन्ना हजारे को तो चार दिन तक भूखे रहना पड़ा तब जाके सरकार ने उनकी मांगे मानी, परन्तु आपकी मांगे तो सरकार ने आपके भोजन त्यागने के पहले ही मान ली थी !
अब तो हम सब लोगों को खुश हो जाना चाहिए २ महीने पहले भी भारत भष्टाचार से मुक्त हो गया था और अब आपने बचाखुचा भष्टाचार भी ख़तम कर दिया, कितनी प्रसन्नता की बात है कि भारत अब भष्टाचार मुक्त हो गया है | मै ये पूछना चाहता हूँ की आप लोगों को इतना मूर्ख क्यूँ समझते हैं?
आपने लोगों को एवं राजनीतिक दलों को यह कहने का अवसर दे दिया कि आप केवल राजनीति कर रहे हैं | और बहुत से लोगों को अब यह स्पष्ट हो गया कि आपका झुकाव विपक्षी दलों जैसे कि बीजेपी और RSS की तरफ है, वो यही बातें कर रहे हैं कि आप एक राजनीतिक व्यक्ति है और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए कार्य कर रहे हैं |
भारत का बुद्धिजीवी वर्ग जो कि अन्ना हजारे के साथ खड़ा हुआ था, वो भी आपके साथ में खड़ा नहीं हुआ | आखिर क्यूँ ? मेरी समझ में उसका कारण आपकी अजीबोगरीब मांगे एवं राजनीतिक विचार हैं |
उदहारण के लिए आप चाहते है कि भ्रष्टाचारियों को मृत्युदंड देना चाहिए | क्या आपको ऐसा लगता है कि भारत का संविधान पूरी तरह से कठोर नहीं है ? भारतीय संविधान के अनुसार मृत्युदंड केवल जघन्यतम अपराध के लिए दिया जाता है | भारत में कितने बलात्कारी और कातिल घूम रहे है जिनको फांसी की सजा नहीं दी जाती और आप आर्थिक अपराध करने के जुर्म में फांसी देना चाहते है? भला ये बात कैसे मानी जाये, एक तरफ पूरी दुनिया में मृत्युदंड को समाप्त करने पर बहस हो रही है, और मैं तो मृत्युदंड को सजा नहीं आज़ादी समझता हूँ | दूसरी तरफ जब आप इस प्रकार की बातें करते हैं तो आपकी लोकप्रियता नहीं बढ़ती बल्कि लोग आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते |
आपकी दूसरी मांग, आपका कहना है की १००० , ५०० और १०० रुपये के नोटों को ख़तम कर के सिर्फ ५० के नोटों को चलन में लाया जाये | आप क्या समझते हैं कि क्या इससे भ्रष्टाचार ख़तम हो जायेगा? यूरोप में भी ५०० यूरो का नोट चलता है जो की लगभग ३०००० रुपये होते है, इसके बावजूद भारत में यूरोप से कही ज्यादा भ्रष्टाचार फैला हुआ है |
इन सभी कारणों की वजह से आपके समर्थक कम हो रहे है, आपके विचार और मांगें इतनी अजीबोगरीब हैं, उन्हें भय है कि कहीं वास्तव में आप सत्ता में आ गये और आपने वो कर दिया जो कि आप कहते एवं सोचते हैं तो इस देश का क्या होगा?
बाबा मै आपसे ये पूछना चाहता हूँ की आप राजनीति मै क्यूँ गये? आप योगी ही बने रहते तो अच्छा रहता बिज़नस तक भी ठीक है, परन्तु आपको राजनीति के गंदे दलदल में नहीं जाना चाहिए , और यदि आपको राजनीति ही करनी है तो स्पष्ट रूप से राजनीति ही करो, मेरी समझ में तो यदि आप केवल योग ही करते तो आपका और लोगों का बहुत भला होता और आप वर्तमान जैसी किसी मुसीबत में भी न फंसते | लोगों को समझ में नहीं आता कि आखिर आप चाहते क्या हो? पिछले दिनों हुए घटनाक्रम से भी उनका कोई भला नहीं हुआ | मेरा आपसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है और न ही मेरा किसी राजनितिक पार्टी से कोई सम्बन्ध है , निश्चित ही मैं आपके काले धन और भष्टाचार के मुद्दों पर आपका समर्थन करता हूँ परन्तु साथ ही बहुत से मुद्दों पर आपका विरोध भी करता हूँ |
इस पत्र के अंत में सारांश के रूप में, मैं यह कहना चाहूँगा कि पिछले सप्ताह में सभी को वो मिला जो वो चाहते थे |
आपको दिल्ली से हटा कर सरकार का सिरदर्द भी हट गया, वो भयभीत थे की पता नहीं क्या होगा उन्होंने चार -चार मंत्री एअरपोर्ट पर भेजे आपका स्वागत करने के लिए आपसे बातचीत और समझौता करने के लिए और अंत में पुलिस भी भेज दी और आपने ही तो उनको इसका मौका दिया एक तरफ आपने उनसे समझौता किया दूसरी तरफ अपना अनशन और विरोध भी जारी रखा, अब सरकार खुश हो गयी आपको दिल्ली से हटाकर |
आप अनशन करके शीघ्रता से लोकप्रियता पाना चाहते थे, वैसे भी आप कोई मौका नहीं छोड़ते खबरों में बने रहने का और हमेशा प्रयासरत रहते हैं कि समाचारों में आपका नाम आता रहे | शनिवार की रात को जो नाटक हुआ उससे भी आपने सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया, सब आपसे जानना चाहते थे की उस रात आखिर हुआ क्या ? अब तो आप और भी सुर्ख़ियों में आगये इतना तो आप अनशन करके भी नहीं आते, वास्तविकता में तो सरकार ने आपको हीरो बना दिया | कितनी बढ़िया बात है !
मीडिया तो खैर वैसे भी इन मुद्दों को लेकर खुश हो गयी, उनको नए दर्शक मिले TRP मिली पैसा मिला, इस तरह के सनसनीखेज़ समाचार तो हमेशा ही मीडिया को खुश करते हैं |
और आखिर में बीजेपी जैसी विपक्षी पार्टी खुश हो गयी कि अब वह आपके समर्थन में सत्याग्रह करेंगे, वो तो इंतजार ही कर रहे थे इस तरह के मौके का कि आपका समर्थन करें, बस इस संशय में थे की कितना खुल कर समर्थन कर सकते हैं, अब उनको सरकार की आलोचना करने का एक और मुद्दा मिल गया, और उन्होंने आपको पूरी तरह अपनी तरफ खींच लिया ये बयान दे कर कि वो आपका समर्थन करते हैं |
इस सारी कहानी में बेवक़ूफ़ तो हम सब को समझा गया है आपने, सरकार ने और विपक्षीय पार्टियों ने भारत की जनता को मूर्ख बनाया है |
मैं जानता हूँ कि आप इस पत्र का भी जवाब नहीं देंगे, परन्तु फिर भी आशा करता हूँ की आप यहाँ उठाये गए बिन्दुओं पर ध्यान देंगे
आपको बहुत बहुत प्रेम
स्वामी बालेन्दु
लेखक स्वामी बालेन्दु जी, वृन्दावन में कमज़ोर और वंचित बच्चों के लिए "श्री बिंदु सेवा संस्थान" संचालित करते हैं. देश विदेश में उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या है. बकौल उनके "I come from a very strong religious background but I do not consider myself anymore belonging to any religion and I believe the concept of religion is wrong. Maybe many people here would not like my words but I feel in past and present time, religion often had the effect of poison: only killing and dividing people. That's why I ask why can we not leave all religion and just become Human? I don't want to be Hindu or Muslim or Christian, I just want to be Human. That's what God has created. Human is made by God and religion is made by man. And I believe God is not Hindu nor Muslim nor Christian. God doesn't have a religion. So why I should be forced to believe in any particular religion? Because of my thoughts for this topic, many religious people may not like me. That's okay, I accept it because I believe my God likes me and doesn't have any religion, just like me." उनका ब्लॉग है - http://www.jaisiyaram.com/blog/
संपर्क :- श्री बिंदु सेवा संसथान, राम नगर, परिक्रमा मार्ग, वृन्दावन,India 281121


