मनमोहन सिंह न सिर्फ़ राव और वाजपेई के गुरू थे, बल्कि वह नरेंद्र मोदी के भी गुरू हैं
मनमोहन सिंह न सिर्फ़ राव और वाजपेई के गुरू थे, बल्कि वह नरेंद्र मोदी के भी गुरू हैं
बात 1991 या 92 की है। प्रो. मनमोहन सिंह से बात करने का मौक़ा मिला था। वह देश के वित्तमंत्री थे और बर्लिन आये हुए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने भारत में मानव विकास के महत्व पर ज़ोर दिया। मैंने हामी भरते हुए कहा था कि शिक्षा और स्वास्थ्य को इस सिलसिले में वरीयता मिलनी चाहिये। मेरी बात लगभग काटते हुए उन्होंने कहा, बिल्कुल ठीक। फिर उन्होंने बारीकी से समझाते हुए कहा कि अगर देश की आबादी का बहुमत बाज़ार की संरचना से बाहर रहे तो भारत का अर्थजगत कभी विकसित नहीं हो पाएगा।
तभी से मैं मानता हूं कि नम्र और विनयी, सुपंडित प्रोफ़ेसर मनमोहन सिंह न सिर्फ़ नरसिंह राव और अटल बिहारी वाजपेई के गुरू थे, बल्कि वह नरेंद्र मोदी के भी गुरू हैं। उनकी योजना के अनुरूप आज बाज़ार छत्तीसगढ़ से लेकर देश के हर गांव और बस्ती को दखल में ले रहा है, वह टीवी के पर्दे के ज़रिये हर परिवार में लोगों के दिमाग को दखल में ले रहा है।
एक साल में बदलाव सिर्फ़ यही आया है कि अब यह काम बेशर्मी से किया जा रहा है।
उज्ज्वल भट्टाचार्या


