मन मेरा दिल्ली दिल्ली
मन मेरा दिल्ली दिल्ली
जुगनू शारदेय
लइकइया में बोला भी था , सुना भी था कि दिल्ली है दिल हिंदुस्तान का । अब लइकइया की बात ही निराली होती है । माट्साब पहला काम करते हैं कि हर बालक अबोध का दिमाग सुबोध बना देते हैं । अब न जा कर पता चला कि माट्साब का ही दिमाग अबोध था । कुछ किताबों में लिखा था और कुछ समाज ने उन्हें सिखाया था कि माट्साबी करने के लिए कुछ बड़ी बड़ी बातें करो । सो करते थे । हम अबोध बालकों को सुबोध बना कर समझाते थे कि हम में से ही कोई राष्ट्रपति – कोई प्रधानमंत्री बन सकता है । यह भी बताते थे कि जो यह बन जाता है , वह दिल्ली में रहता है क्योंकि दिल्ली है दिल हिंदुस्तान का । तब से हो गया मन मेरा दिल्ली दिल्ली ।
अब माट्साब को क्या पता कि राष्ट्रपति – प्रधानमंत्री के अलावा ढेर सारे लटक – मटक - झटक और लपुझन्ना भी दिल्ली में होते हैं । जैसे अभी एक लपुझन्ना माथा खा रहा हैं कि वह चोर बेईमान हैं या नहीं । अगर नहीं हैं तो क्यों नहीं हैं और अगर हैं तो क्यों हैं । इस समस्या का समाधान , जैसा कि दिल्ली की हर परंपरा में होता है कि कभी न कभी निकल कर भी नहीं निकलेगा । अब समझदार माट्साब हम जैसे अबोध बालकों को सुबोध बनाने के लिए समजाझाएंगे कि हम में से ही कोई नेता , विरोधी दल बनेगा । सत्यमेव जयते की परंपरा में यह भी असत्यमेव जयते की राह पर चलता है । यह समझ बूझ कर हो गया मन मेरा दिल्ली दिल्ली ।
अब आपको तो पता ही है कि देश के विदेश बिहार में निर्वहन कुमार ने ठानी है कि बिहार को बिशेष राज्य का दर्जा दिया जाए । जब दिल्ली जाते हैं तो माट्साब की शैली में इसे दुहराते हैं । दिल्ली है कि बिहार को विशेष का देश का भी दर्जा नहीं देता । हम ही गदगदाते हैं कि हम इतने खास हो गए हैं कि महंगे से खट्टे आम हो गए हैं । विशेष राज्य का दर्जा तो दूर दिल्ली हमें मनचाहा कर्जा भी नहीं लेने देता । अब काहे कहें , पहले इसे चार्वाक ने कहा था कि कर्ज लो और घी पियो । फिर स्वामी शारदेयानंद ने कहा कि कर्ज लो और मदिरा पियो । बीच में एक ज्ञान बात । मदिरा पान राज्य हित में होता है । पानक की जेब खाली और राज्य का खजाना भरता है । हम अपनी खाली जेब के साथ देश के विदेश बिहार का खजाना भर रहे हैं और मदिरा पान कर रहा है मन मेरा दिल्ली दिल्ली ।
जैसा कि आप सब जानते हैं कि देश के विदेश बिहार की कृपा से भ्रामक जनता पार्टी का मन माट्साब की तरह ही भरमाया है । बेचारों के साथ बहुत संकट है । कभी कर्नाटका विजय पर दक्षिण का द्वार खोल देते हैं , कभी झारखंड की मिली जुली सरकार के बल पर धन का द्वार खोल लेते हैं – अब बिहार विजय , यानी निर्वहन कुमार की जय के बल पर दिल्ली पर कब्जा करने की बात करते हैं । बस उनकी बात पर ही हो गया मन मेरा दिल्ली दिल्ली ।
बहुत दिन से हम सोचते रहते हैं कि पटना से दिल्ली जाने का कोई नया रास्ता निकालें । अभी आसान रास्ता भी कोई नहीं है । पटना से दक्षिण जा कर भी दिल्ली जाना चाहो तो उत्तर प्रदेश से गुजरना पड़ता है । पता नहीं 2012 में उत्तर प्रदेश में भ्रामक जनता पार्टी उतरन होगी या कांग्रेस पार्टी की कतरन होगी । जो भी होगी 2012 में होगी । पर क्या बुरा है माट्साब के अंदाज में राष्ट्रपति – प्रधानमंत्री बनाना । इस बनाने के सपने पर ही हो गया मन मेरा दिल्ली दिल्ली ।


