मप्र मेडिकल दाखिले में सैफई के मेडिकल छात्रों की भूमिका ने मचाया हड़कम्प
मप्र मेडिकल दाखिले में सैफई के मेडिकल छात्रों की भूमिका ने मचाया हड़कम्प
दिनेश शाक्य
इटावा, 26 फरवरी। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में मेडिकल कालेज में दाखिलो को लेकर हुये घोटाले के बाद उसकी आँच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव सैफई स्थित ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान तक आ चुकी है। जिन छात्रों का नाम सामने आया है उनके साथियो को सब कुछ पता है लेकिन वो कुछ भी बोलने के लिये तैयार नहीं है। ऐसा ही कालेज के डीन का भी हाल है लेकिन वो कानूनी कार्यवाही होने पर पूरी तरह से सहयोग करने की बात कह रहे हैं।
यहाँ पर एम.बी.बी.एस की पढ़ाई कर रहे छात्रों का नाम उस सूची में निकल करके सामने आया है, जिनके नाम पर मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित इनडेस्क कालेज में प्रवेश के नाम पर किसी और का पहले आवेदन किया गया। बाद में किसी और का दाखिला कराया है यह दाखिल कालेज के मैनजमेंट की ओर से कराया गया, जिसमें कहा जा रहा है इन दाखिलो के नाम पर दो करोड़ रूपये तक की रकम का लेने देने दिया गया है। जिन एमबीबीएस छात्रों का नाम इस बाबत सामने आ रहा है उनके बारे में उनके साथी छात्रों को सब कुछ पता है। उनके बारे में संस्थान के डीन एस.के.शुक्ला ने पूरी जानकारी करके रखी हुयी है लेकिन वो भी कैमरे के आगे कुछ भी बोलने के लिये तैयार नहीं है। उनका तो यहाँ तक कहना है कि मध्यप्रदेश की एसटीएफ की ओर से उनके पास कई बार फोन आये हैं जिनमें उनसे इस सिलसिले में कई जानकारियाँ भी ली गयी हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि कानुपर के एक कोचिंग सेंटर से जुडे राहुल अस्थाना नाम के एक व्यक्ति का नाम भी सामने आया है जिसने कानपुर मंडल से 38 मेडिकल छात्रों का पहला मध्यप्रदेश के तमाम मेडिकल कालेज में दाखिल कराने के नाम पर आवेदन कराया उसके बाद उनके दाखिले ना करा कर किसी दूसरे का प्रवेश करवाया जिनसे दो करोड़ रूपये तक की रकम का लेने का मामला सामने आया है। लेकिन सैफई संस्थान के जिम्मेदारों का कहना है कि उनकी जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश मे एमबीबीएस मे दाखिले के लिये मात्र 40 लाख रूपये तक की ही रकम लग रही है, दो करोड़ तक की बात सिर्फ हवा में ही फैलाई जा रही है।
सैफई संस्थान के बहराइच के करनिया गांव के रहने वाले 271875 मेडिकल छात्र हसमत अली पुत्र अतीक उल्ला का नाम मध्यप्रदेश में मेडिकल प्रवेश के दौरान इस्तेमाल किया गया है। यह बात संस्थान के सभी वरिष्ठो और उसके साथियो को पता है लेकिन कोई भी खुल करके कुछ भी कहने के लिये तैयार नहीं है, क्यों कि सभी इस मामले से बचना चाह रहा है।
करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद भी हशमत अली सामने आने के लिये तैयार नहीं हुआ। सैफई संस्थान के रिकॉर्ड के अनुसार हशमत अली बहराइच का रहने वाला है। 15 अगस्त 1983 को पैदा हुये हशमत के पिता का नाम अतीक उल्ला है। हशमत एमबीबीएस के पहले साल का छात्र है। संस्थान के डीन की अगर बात को मान लें तो हशमत के बारे में उन्होंने काफी कुछ अध्ययन किया हुआ है। हशमत ने इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अपना फेसबुक खाता भी बंद कर दिया है साथ ही अपने बारे में लोड की गयी सभी तस्वीरों आदि को डिलीट कर दिया है। लेकिन इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि उसकी कोई संलिप्तचा मेडिकल दाखिले को लेकर है या नहीं। वे खुल कर कहते हैं कि अगर मध्यप्रदेश की पुलिस,एसटीएफ आदि उन लोगों को पकड़ने या पूछताछ के लिये आती है उनका पूरी तरह से सहयोग किया जायेगा। उन्होंने एक हैरत भरी बात यही भी बताई है जिन 38 लोगों का नाम इस सूची में सामने आ रहा है उनके मोबाइल नंबर,मेल आईडी के अलावा मार्क्स 150 से 152 भी आये हैं। इससे लगता है कि कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है, लेकिन जाँच होने तक वो इस मामले मे अपनी ओर से कोई राय दर्ज कर पाने की दशा में नहीं हैं।
कुल मिला कर यह कह सकते हैं कि निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले को लेकर जो तरीका अपनाया जा रहा है उसकी आँच से भले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर कोई फर्क ना पड़े लेकिन उनके गांव सैफई स्थित मेडिकल कालेज के छात्रों का नाम सामने आने से यह बात साफ हो गयी है कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ जरूर है।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क


