ममता की वाम के प्रति “ममता” को वाम की अस्वीकृति
ममता की वाम के प्रति “ममता” को वाम की अस्वीकृति
सारदा घोटाले में घिरने के बाद अब ममता बनर्जी द्वारा वाम दलों से समझौते की गुहार को वाम दलों ने सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि राज्य में भाजपा की पैठ बनाने की जिम्मेदार ममता ही हैं और अब वह उससे मुकाबले की बात कह रही हैं।
दरअसल, ममता बनर्जी ने कहा था कि राजनीति में कोई पार्टी 'अछूत' नहीं होती है। अगर माकपा की ओर गठबंधन का कोई प्रस्ताव मिलता है, तो तृणमूल कांग्रेस उस पर विचार कर सकती है। अब माकपा ने ममता के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है। माकपा नेता गौतम देब ने कहा है कि ममता बनर्जी का बयान ऐसा नहीं है, जिसे गंभीरता से लिया जाए।
इतना ही नहीं, माकपा पश्चिम बंगाल राज्य समिति के सचिवालय सदस्य गौतम देब ने ममता बनर्जी पर 'जुबानी हमला' करते हुए कहा कि सारदा घोटाले में फँसने के बाद अब ममता वाम की मदद लेना चाह रही है।
दरअसल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि भाजपा राजनीतिक प्रदूषण की प्रतीक है। टीएमसी के लिए माकपा अछूत नहीं है। अगर माकपा के साथ गठबंधन का कोई प्रस्ताव आता है तो टीएमसी उस पर विचार कर सकती है। ममता ने कहा कि अगर कोई बातचीत करने के लिए आगे आता है तो हम उससे बातचीत करेंगे।
बिहार में दो धुर विरोधियों लालू यादव और नीतीश कुमार ने एक होकर चुनाव लड़ा और इसका नतीजा भी सकारात्मक रहा। गठबंधन ने हाल ही में हुए उपचुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया। लालू और नीतीश को बधाई देते हुए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि उनके राज्य में ऐसे हालात बने तो वह इस तरह का कुछ सोच सकती हैं। ऐसे हालात बनने से उनका मतलब भाजपा के मजबूत होने से है क्योंकि भाजपा के विरोध में ही लालू-नीतीश-कांग्रेस ने बिहार में महागठबंधन बनाया था।
ममता ने भाजपा के राजनीतिक प्रदूषण करार दिया। उन्होंने कहा, 'मैं भाजपा के बारे में चिंतित नहीं हूँ। पहले उन्हें विधानसभा में 5 सीट लेकर दिखाने दो, फिर 294 की बात करेंगे। मैंने अटल जी के लिए काम किया, लेकिन अब भाजपा लिए मेरे मन में कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने आडवाणीजी को बाहर फेंक दिया। अब नया नेतृत्व है जो सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश कर रहा है। वह लोगों के दिल जीतना नहीं जानते।'
उधर वाम दलों का कहना है कि राज्य में भाजपा की पैठ बनाने की जिम्मेदार ममता ही हैं और अब वह उससे मुकाबले की बात कह रही हैं।
भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि ममता के साथ गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता है। उनकी नीतियों और राजनीति के चलते ही भाजपा राज्य में अपनी पैठ बना सकी है। यदि सांप्रदायिक भाजपा से लड़ना होगा तो हम अपने दम पर ही उससे लड़ेंगे। ममता ही सबसे पहले भाजपा को यहां ले आई थी। उन्होंने 1998 में भाजपा से हाथ मिलाया था। उधर, भाजपा ने ममता के बयान को बंगाल में पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण बताया है।
गौरतलब है कि अब तक ममता बनर्जी की पूरी सियासत ही वाम के विरोध पर केंद्रित रही है। ममता वाम मोर्चा की 34 साल पुरानी सरकार को उखाड़कर ही सत्ता में आई थीं।
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