महिला कर्मचारी को मां बनना है तो सरकार से लेनी होगी अनुमति!
महिला कर्मचारी को मां बनना है तो सरकार से लेनी होगी अनुमति!
कमलजीत अविनाशी
चण्डीगढ़। अब यदि किसी महिला कर्मचारी को मां बनाने के लिए गर्भ धारण करना है तो उसे सरकार से बकायदा लिखित में अनुमति लेनी पड़ेगी। यदि अनुमति नहीं ली तो उसे प्रसव के दौरान अवकाश नहीं मिलेगा, यानी उसे उन दिनों ड्यूटी देने के लिए आना पड़ेगा।
उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव एस एस प्रसाद ने शिक्षा विभाग की एक महिला कर्मचारी को छुट्टी मांगने पर कहा कि क्या आपने मुझसे पूछ कर गर्भ धारण किया था। अब कहा जा सकता है कि इसमें मुख्यमन्त्री का क्या दोष। अफसर तो कुछ भी कह सकता है, उसके लिए मुख्यमन्त्री जिम्मेवार नहीं हैं। बात ठीक है, लेकिन अभी तक सरकार ने उस बड़बोले अफसर के खिलाफ कार्यवाही भी नहीं की है।
इस घटना के बाद प्रदेश भर के सरकारी कॉलेजों के करीब दो हजार एसोसिएट प्रोफेसरों ने गुरुवार को सामूहिक अवकाश लिया। उसके बाद पंचकूला में शिक्षा निदेशालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया। प्रोफेसर तीन दिन की हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
लेकिन क्या मजाल कि इस अफसर ने अपनी बात पर खेद भी प्रकट किया हो। हैरानी की बात है कि शिक्षा मन्त्री गीता भुक्कल भी चुप हैं। यही नहीं महिला अधिकारों के बारे लम्बे-चौड़े भाषण देने वाली और भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाने वाली मैडम आशा हुड्डा भी चुप हैं। हरियाणा महिला आयोग भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहा। किरण चौधरी और सावित्री जिंदल भी खामोश हैं।
अपने पति के मुख्यमन्त्री बनने पर हर महिला को सुरक्षा दिलवाने का वायदा करने वाली कुलदीप बिश्नोई की धर्मपत्नी रेणुका भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। महिला अधिकारों के लिए लड़ऩे वाले संगठन भी चुप हैं।
हाल में अपने 9 वर्ष के शासन में हुड्डा ने अफसरों को सिर के ऊपर चढ़ा रखा है। अफसर रिटायर हुआ नहीं कि पहले ही उसके लिए नौकरी तैयार कर दी। कहते हैं कि अफसरों के लिए हरियाणा कश्मीर से बढ़ कर स्वर्ग है। हुड्डा ने कितने ही आई ए एस अफसरों को कोठी और कार का इन्तजाम कर दिया है। अफसर तो पद पाने के लिए हुड्डा की चापलूसी कर रहे हैं। अब बाकी हुड्डा ने तो अफसरों पर सरकारी खजाना लुटाना शुरू कर ही रखा है। ऐसी बेहूदा बातें करने से पहले कम से कम अफसरों को कुछ तो शर्म करनी चाहिए।


