एक शोध के मुताबिक मां का दूध 820,000 लोगों की जान बचा सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में $302000000000 जोड़ सकता है
मां का दूध (स्तनपान) बच्चों के लिए सबसे अच्छा भोजन- वर्नर स्कुल्टिंक
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के पोषण प्रमुख वर्नर स्कुल्टिंक ने कहा है कि बच्चों को मां का दूध पिलाने से उसे जीवनभर लाभ मिलता है। ऐसे बच्चों में अधिक बुद्धि और बीमारियों से बचने की अधिक क्षमता होती है।
Friedman School of Nutrition Science and Policy में Associate Professor व संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के पोषण प्रमुख वर्नर स्कुल्टिंक werner schultink का huffingtonpost में New Research Shows That Breastfeeding Matters Everywhere and Could Save Millions of Lives and Dollars शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा है,

"मां का दूध (स्तनपान) बच्चों के लिए सबसे अच्छा भोजन है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, खनिज लवण जैसे तत्व बिल्कुल सही मात्रा में मौजूद रहते हैं।"

उन्होंने कहा कि मां का दूध पीने वाले बच्चों को बचपन में निमोनिया जैसी बीमारी होने की संभावना नहीं रहती है। बड़े होने के बाद भी उनमें मोटापा या मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा कम रहता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि मां का दूध पीने वाले बच्चों की मानसिक क्षमता अन्य प्रकार के बच्चों से बेहतर होती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को मां का दूध पिलाने का फायदा बच्चों के साथ-साथ मां को भी होता है। बच्चों को अपना दूध पिलाने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा कम रहता है। साथ ही चूंकि इससे मानसिक क्षमता बढ़ती है और स्वास्थ्य बेहतर होता है, इसलिए इसका फायदा आखिरकार पूरे समाज को मिलता है।
स्तनपान के ऐसे तथा अन्य कई लाभ की जानकारी शोध पत्रिका 'द लैंसेट' में प्रकाशित हुई है। 'द लैंसेट' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक स्तनपान 820,000 लोगों की जान बचा सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में $302000000000 जोड़ सकता है।
उन्होंने कहा, "लैंसेट के आलेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मां का दूध पीने का जितना फायदा बच्चों को मिलता है, उतना और किसी चीज का नहीं मिलता। यह विकसित देश में भी उतना ही जरूरी है, जितना कम विकसित देशों में।"
बाजार में बिकने वाले बाल आहार के बारे में उन्होंने कहा कि वह उतना फायदेमंद नहीं है, जितना प्रचार में बताया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह जानना बहुत जरूरी है कि बाजार में बिकने वाले शिशु आहार और दूध के पावडर में रोग से बचाने का वह गुण नहीं होता, जो मां के दूध में होता है।
बल्कि ऐसे आहार में यदि भूल से गंदा पानी मिलाया गया हो या गंदे बर्तन का इस्तेमाल किया गया हो, तो वह बच्चे के लिए खतरनाक भी हो सकता है।

Globally only 1 in 3 babies are breastfed. + #breastfeeding could save 800K lives every year https://t.co/Sv4pzARdUT pic.twitter.com/LFkeqjSYlS
— Marc Van Ameringen (@MarcVanAm) February 5, 2016

Great blog by UNICEF's nutrition head on evidence of why breastfeeding matters: https://t.co/XY7DJ4mgeq @janwerners

— Patrick Webb (@DrPatrickWebb) February 5, 2016