0 प्रकाश कारात

अपनी ही जनता के खिलाफ और इस मामले में तो आदिवासियों के खिलाफ युद्ध छेडऩा
मोदी सरकार और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार, इस राज्य में माओवादियों के सशस्त्र दस्तों के खिलाफ भारतीय वायु सेना का इस्तेमाल करने पर आमादा हैं। उनके इस रुख का कि भारतीय वायुसेना जवाबी कार्रवाई के तौर पर या आत्मरक्षा के लिए हमलावर कार्रवाइयां करेगी, ठीक यही अर्थ है। अब तक माओवादियों के खिलाफ कार्रवाइयों में राज्य पुलिस और सी आर पी एफ जैसे केंद्रीय अद्र्घ-सैनिक बलों का ही प्रयोग होता आया है। माओवादियों का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना को तैनात नहीं किया गया है। बलों को लाने-ले जाने और घायल सिपाहियों को उनके ठिकानों तक पहुंचाने के लिए, 2010 से वायु सेना के हैलीकोप्टरों का प्रयोग जरूर शुरू किया गया था। फिर भी अब तक वायु सेना के हैलीकोप्टर, दूसरी ओर से फायर होने पर भी जवाबी फायरिंग करने से दूर रहते थे।

अब इसे बदला जा रहा है।
छत्तीसगढ़ पुलिस के अतिरिक्ति महानिदेशक, आर के विज के अनुसार, बिजापुर के इलाके में हवाई हमले के एक अभ्यास में वायु सेना के तीन हैलीकोप्टरों का प्रयोग किया गया। हैलीकोप्टरों पर लगी मशीनगनों से हवाई हमले जैसी कार्रवाइयों के लिए भारतीय वायु सेना के हैलीकोप्टरों के इस्तेमाल का तो एक ही मतलब है, अपनी ही जनता के खिलाफ और इस मामले में तो आदिवासियों के खिलाफ युद्ध छेडऩा। जंगल के इलाकों में मशीनगनवाहक हैलीकोप्टरों का इस्तेमाल करने में, माओवादियों को बाकी निर्दोष नागरिकों से अलग करना तो मुमकिन ही नहीं होगा। इतना ही नहीं, चूंकि माओवादी हमेशा आदिवासी टोलों में जनता के बीच जगह बदलते रहते हैं, इन हालात में आदिवासी ही हमले का मुख्य निशाना बन रहे होंगे। इसका नतीजा नरसंहारों के रूप में सामने आएगा।
भारतीय वायु सेना के हैलीकोप्टरों पर फायर होने की नौबत ही न आने देने का सबसे अच्छा तरीका तो यही है कि छत्तीसगढ़ में पुलिस बलों की

कार्रवाइयों में मदद के लिए वायु सेना को लगाया ही नहीं जाए। पिछली यूपीए सरकार द्वारा अपनाए गए इस रुख को बदला नहीं जाना चाहिए।
इससे पहले सशस्त्र बलों के प्रमुखों ने माओवादविरोधी कार्रवाइयों में अपने बलों के शामिल किए जाने के प्रस्तावों का यह कहते हुए कड़ा विरोध किया था कि सेना का, अपनी ही जनता के एक हिस्से के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
मोदी सरकार को छत्तीसगढ़ में वायु सेना या सशस्त्र बलों के दूसरे किसी बाजू के भी उपयोग की अनुमति नहीं देनी चाहिए। याद रहे कि जम्मू-कश्मीर जैसी जिन जगहों पर सेना को तैनात भी किया गया है, वहां भी किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए वायु सेना का उपयोग नहीं किया जाता है। हमारे देश के सशस्त्र बलों को ऐसी स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए जहां उन्हें देश के बीचौ-बीच के हिस्से में रहने वाले देशवासियों के खिलाफ ही हमलावर कार्रवाइयां करनी पड़ें। 0