माकपा के जबरदस्त विरोध के बाद सुनवाई स्थगित की आयोग ने
माकपा के जबरदस्त विरोध के बाद सुनवाई स्थगित की आयोग ने
माकपा के जबरदस्त विरोध के बाद सुनवाई स्थगित की आयोग ने, काले झंडे दिखाए गए.
रायपुर। बिजली दर में वृद्धि के प्रस्ताव का जबरदस्त विरोध करते, नारेबाजी करते हुए, माकपा कार्यकर्ताओं ने आज नियामक आयोग को काले झंडे दिखाए. हंगामे के बीच आयोग को 15 मिनट के लिए सुनवाई स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी.
आज की सुनवाई की शुरूआत ही माकपा नेताओं द्वारा अपना पक्ष रखने से हुई. माकपा राज्य सचिव ने आयोग द्वारा जारी आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली कंपनी की औसत क्रय लागत 2.92 रूपये प्रति यूनिट है, जिसे वह उपभोक्ताओं को 4.97 रूपये प्रति यूनिट की औसत दर से बेचकर 70% मुनाफा कमाना चाहती है. यही बिजली वह दूसरे प्रदेशों को 3.46 रूपये यूनिट की दर से बेच रही है. माकपा नेता ने पूछा कि क्या नियामक आयोग बिजली कंपनियों को सट्टा व्यापार करने की छूट देना चाह रहा है? माकपा नेता ने ध्यान दिलाया कि छत्तीसगढ़ में लाइन लॉस राष्ट्रीय औसत से चार गुना ज्यादा है. यदि इसे 7-8 % तक सीमित कर दिया जाएं, तो बिजली कंपनी 2000 करोड़ रूपये के मुनाफे पर आ सकती है और उसे आम जनता पर कोई भार लादने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. लेकी दुर्भाग्य की बात है कि लाइन लॉस के नाम पर पूंजीपतियों को इस प्रदेश में बिजली चोरी की छूट दी जा रही है और उनसे तथा सरकारी विभागों से करोड़ों रुपयों का बकाया बिजली बिल वसूला नहीं जा रहा है.
पराते ने आरोप लगाया कि नियामक आयोग अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है. वह बिजली कंपनियों के भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में नाकामयाब रहा है. ऐसे में इस सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि आयोग यदि वास्तव में गंभीर है, तो उसे प्रदेश के हर कोने में जाकर जनसुनवाई करना चाहिए. पराते ने प्रदेश की आम जनता की आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र बिजली दरों में वृद्धि के प्रस्ताव को स्वीकार न करने की आयोग से अपील की.
व्यापक जनसुनवाई का आश्वासन न मिलने पर माकपा कार्यकर्ताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली को 'जनविरोधी' करार देते हुए जबरदस्त हंगामा किया, काले झंडे दिखाए , जिसके बाद आयोग को सुनवाई स्थगित कने को बाध्य होना पड़ा.


