मानव विरोधी है अनुवंशात्मक धर्म
मानव विरोधी है अनुवंशात्मक धर्म
संस्थागत धर्मों की उत्पत्ति के बाद मानवजाति का जितना विनाश इन्हीं धर्मों के नाम पर हुआ है, उतना मानव जनित युद्धों में भी नहीं हुआ।
तुम्हारा धर्म अथवा धार्मिक पहचान का केंद्र मात्र एक यौन क्रिया है, किसी जोड़े ने सहवास किया, महिला गर्भवती हुई बच्चा पैदा हुआ और प्रजनन क्रिया करने वालों का जो धर्म था उसे बच्चे के माथे पर धार्मिक निशान की प्लेट के साथ चस्पा कर दिया जाता है। धर्म के इस अनुवांशिक स्वरूप ने उसकी बची खुची आत्मा मार दी, अब लोकतंत्र आया साथ में वोट भी। बस धर्म ने इंसान और इंसान के बीच पहले खुदी खाई को और प्रमाणिक आधार दे दिया।
अनुवंशात्मक धर्म मानव विरोधी है। जो आज हिंदुत्व अथवा इस्लाम की वकालत शब्दों में करते हैं, वह हिंसक वकीलों (शांतिदूतों) से कैसे बेहतर और भिन्न हो सकते हैं? शब्दों की वकालत हथियारों की वकालत का प्रस्थानबिन्दु है। ये वकील कभी खुद से सवाल नहीं करते यदि उनके माता पिता दूसरे मज़हब के होते तो रफीक राकेश होता या अलबर्ट फरीद होता। इस मूढ़ता के विश्वदर्शन को केवल विवेक और वैज्ञानिक तर्क समाप्त कर सकता है।
अनुवांशिक धर्म जो कि आरोपित और गैर जनवादी है फिसल कर कब मानव विरोधी हो जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। मानवजाति धर्म के नाम पर जिस कोढ़ ग्रस्त हिंसा से आज दो चार है, उसके पीछे अनुवांशिक धर्म है, जिसे बिना सवाल जवाब किये, बिना सोचे समझे बिना कम्पेटिबिलिटी समझे मासूम बच्चो की नसों में इसे उतार दिया जाता है। संस्थागत धर्मों की उत्पत्ति के बाद मानवजाति का जितना विनाश इन्हीं धर्मों के नाम पर हुआ है, उतना मानव जनित युद्धों में भी नहीं हुआ। सोना समझ कर जिसे धारण करा दिया गया वह विनाश का ताबीज निकला।
शमशाद इलाही शम्स


