मुख्यमन्त्री कार्यालय में जेपी समूह का राज
मुख्यमन्त्री कार्यालय में जेपी समूह का राज
उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और सीआईसी के निर्देशों का उडनता रहते माहौल संक्षिप्त वन भूमि पर जेपी समूह के अवैध कब्जे में की मदद उत्तर प्रदेश सरकार ने शिव दास वे जनता के सेवक (पब्लिक सर्वेंट) हैं लेकिन हुक्म बचाते हैं उद्योग घेरानों का। जेपी समूह के संबंध में उत्तर प्रदेश की खाकी, खाद्दी और लालफीताशाही की कार्यशैली से तो यही पता चलता है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में तत्कालीन वन बन्दोबस्त अधिकारी वीके श्रीवास्तव (अब सहायक अधिकारी, मिर्जापुर) ने जय प्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेपीएल) नामक निजी कंपनी के पक्ष में वन विभाग की 1083 हेक्टेयर (करीब 2483 बीघा) से ज्यादा संक्षिप्त वन भूमि उच्चतम न्यायालय के आदेशों और वन संक्ष्क्षण अधिकारियों के खिलाफ निकाला लीकेन उनके खिलाफ सत्ता में काबिज राजनैतिक पार्टियों के नुमाइंदों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं, उनके कारणों को अमलिजामामा पहनाने के लिए उत्तर प्रदेश की पूर्व बसपा सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी। हालांकिं मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित होने के कारण उनके मसूबों अभी भी कानून पेच में उलझे हैं लेकिन संक्ष्क्षित वन भूमि पर कब्जा करने का जेपी समूह का सिलसिला रुक नहीं है। वह जिस प्रशासन के सहयोग से चोरी-चिपे अब भी जारी है। ऐसा हो भी क्यों नहीं...


