मुजफ्फरनगर के हत्यारों को बचाने के लिए सपा सरकार टाल रही है शीतकालीन सत्र- शाहनवाज आलम
मुजफ्फरनगर के हत्यारों को बचाने के लिए सपा सरकार टाल रही है शीतकालीन सत्र- शाहनवाज आलम
सपा-भाजपा के साम्प्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ रिहाई मंच ने शुरू किया जनअभियान
12 से 16 दिसम्बर से तक चलेगा जनजागरुकता अभियान
लखनऊ 12 दिसम्बर 2015। सूबे की सपा सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच साम्प्रदायिक गठजोड़ पर लोगों को जागरुक करने के लिए रिहाई मंच ने जनजागरुकता अभियान के तहत आज मौलवीगंज के चिकमंडी मस्जिद के पास नुक्कड़ सभा की। मंच यह अभियान तारिक कासमी की 2007 में 12 दिसम्बर को आजमगढ़ से हुई फर्जी गिरफ्तारी की बरसी से 16 दिसम्बर 2007 को मडि़याहूं जौनपुर से हुई खालिद मुजाहिद की फर्जी गिरफ्तारी की बरसी यानी 16 दिसम्बर तक चलाएगा।
सभा को सम्बोधित करते हुए रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि पूरे सूबे की इंसाफ पसंद अवाम को इंतजार था कि प्रदेश सरकार समय पर शीतकालीन सत्र बुलाकर मुजफ्फरनगर साम्प्रदायिक हिंसा की जांच करने वाली जस्टिस सहाय कमीशन की रिपोर्ट को सदन में प्रस्तुत कर उसे सार्वजनिक ही नहीं करेगी बल्कि उसपर अमल करके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवई करेगी। लेकिन सपा सरकार ने मुजफ्फरनगर के हत्यारों को बचाने के लिए शीतकालीन सत्र को ही टाल दिया है। जो सपा और संघ परिवार के गठजोड़ को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दादरी में एखलाक की हत्या के बाद पूरे देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद दबाव में आई केंद्र सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अगर प्रदेश सरकार चाहेगी तो मामले की सीबीआई जांच कराई जा सकती है। लेकिन राजनाथ सिंह को शायद अपने पुराने दोस्त मुलायम सिंह पर पूरा भरोसा था कि वे ऐसा करके संघ परिवार को नाराज नहीं करेंगे और हुआ भी यही। प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए केंद्र सरकार को पत्र ही नहीं लिखा।
रिहाई मंच नेता अनिल यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने वोट और नोट दोनों ही मुस्लिम समाज से लिया लेकिन हमेशा संघ परिवार के ही मुस्लिम विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाते रहे। तारिक कासमी जैसे सैकड़ों बेगुनाह आज भी जेलों में बंद हैं जबकि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को रिहा करने का वादा सपा ने किया था। खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस अधिकारी लगातार प्रमोशन पा रहे हैं जबकि उनके ऊपर हत्या कर मुकदमा दर्ज है। निमेष कमीशन की रपट जिसने तारिक और खालिद को फंसाने वाले पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी, पर सपा सरकार की चुप्पी साबित करती है कि उसमें और इशरत जहां के हत्यारे पुलिस अधिकारियों को बचाने वाली गुजरात की भाजपा सरकार में कोई फर्क नहीं है।
इलाहावाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता और इंसाफ अभियान के प्रदेश महासचिव दिनेश चौधरी ने कहा कि प्रदेश के किसान सूखे और बाढ़ से त्रस्त हैं लेकिन सपा मुखिया अपना जन्म दिन मनाने में मस्त हैं। पूरे सूबे को एक कुनबा लूट कर मालामाल हो रहा है और जनता को सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा के हवाले इस सूबे की किस्मत को नहीं छोड़ा जा सकता। प्रदेश को अब नया राजनीतिक विकल्प ही बचा पाएगा।
नुक्कड़ सभा को जिया उद्दीन, फरीद खान, मो0 बिलाल, मो0 राशिद, अमित मिश्रा आदि ने भी सम्बोधित किया।


