मुजफ्फरनगर : हत्यारों को बचाने के लिये पीड़ितों से जबरन एफीडेविट ले रही है पुलिस- रिहाई मंच
मुजफ्फरनगर : हत्यारों को बचाने के लिये पीड़ितों से जबरन एफीडेविट ले रही है पुलिस- रिहाई मंच
बलात्कार पीड़ितों की नहीं करवायी जा रही मेडिकल जाँच
निमेष कमीशन रिपोर्ट में निर्दोषों को फँसाने के आरोपी मनोज कुमार झा को
जाँच दल में जाँच को प्रभावित करने के लिये रखा गया
मेहरदीन की लाश निकाल कर पोस्टमार्टम करने की माँग के संदर्भ में लिखा गया पत्र
मुजफ्फर नगर/शामली/ लखनऊ। 12 अक्टूबर 2013। रिहाई मंच ने मुजफ्फरनगर- शामली के सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित क्षेत्रों के आला पुलिस अधिकारियों के सरकारी और निजी मोबाइल फोनों के कॉल डिटेल्स को जाँच के दायरे में लाने की माँग करते हुये आरोप लगाया है कि हिंसा पीड़ित मुसलमानों से दंगाई और पुलिस अधिकारी मिलकर जबरन उनसे एफिडेविट ले रहे हैं कि गांव में उनके साथ कोई हिंसा नही हुई है। दंगाइयों और शासन-प्रशासन का यह गठजोड़ बलात्कार और हत्या की घटनाओं को भी दबाने की कोशिश कर रहा है और विवेचना की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। इसी उद्देश्य से जाँच में सांप्रदायिक रुझान रखने वाले और निमेष कमीशन द्वारा निर्दोष बताये गये खालिद मुजाहिद की पुलिस कस्टडी में हुयी हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंदुत्ववादियों द्वारा हुये हमले के दौरान हमलावरों का साथ देने वाले आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार झा को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल में रखा गया है। रिहाई मंच ने आरोप लगाया कि प्रदेश और केन्द्र सरकार के जिम्मेदार दंगाइयों के पक्ष में खुलेआम बयान देकर जाँच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं लिहाजा पूरे मामले की जाँच तत्काल सीबीआई को सौंपी जाय।
सांप्रदायिक दंगा पीड़ित इलाकों में पिछले पच्चीस दिनों से कैंप कर रहे आवामी काउंसिल फॉर डेमोक्रेसी एण्ड पीस के महासचिव असद हयात और रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव ने जारी बयान में आरोप लगाया कि गांव डूंगर थाना फुगाना के मेहरदीन पुत्र रफीक की हत्या आठ सितंबर को दंगाइयों द्वारा कर दी गयी और उसे बिना पोस्टमार्टम के जमीन में गाड़ दिया गया। इस मामले में रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव द्वारा 29 सितंबर 2013 को फुगाना थाना में अपराध संख्या 439 दर्ज करवाया गया जिसमें शव को निकालकर पोस्टमार्टम करने की माँग की गयी थी। लेकिन बावजूद इसके और आला अधिकारियों को इस सम्बंध में पत्र लिखने के, शव को अब तक नहीं निकाला गया। इसी तरह रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम की तहरीर पर बागपत के थाना बिनौली के गांव अंछाड़ में आमिर खान की हत्या और उसे बिना पोस्टमार्टम के पुलिस और दंगाइयों द्वारा दफनाने के मामले में दर्ज एफआईआर में भी अब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया है। जिससे साबित होता है कि प्रशासन दंगाइयों के साथ मिलकर पूरे मामले पर पर्दा डालना चाहता है। सबसे शर्मनाक यह है कि यह सब तब हो रहा है जब राष्ट्रीय मानवाधिकार और अल्पसंख्यक आयोग की टीम कई बार यहाँ दौरे कर चुकी हैं।
राजीव यादव और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल (170) के पेटीशनर असद हयात ने कहा कि जिस तरह इन दंगाइयों के मास्टर माइण्ड और कई अपराधों के आरोपी गठवाला खाप के मुखिया हरिकिशन मलिक से मिलकर शिवपाल यादव और केन्द्रीय नागरिक एवं उड्डयन मंत्री व रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह ने उन्हें आश्वासन देते हुये फोटो खिंचवाया और बयान दिया कि किसी ‘निर्दोष’ को नहीं पकड़ा जायेगा, उससे साबित होता है कि प्रदेश और केन्द्र सरकार दोनों के ही नुमाइन्दे दाषियों को बचाने और कानूनी प्रक्रिया को बाधित करने में लगे हैं जिससे इस जघन्यतम जनसंहार के आरोपियों के हौसले बुलन्द हैं और वे प्रशासन की मदद से पीड़ितों से जबरन थाने में बुलाकर एफिडेविट ले रहे हैं कि उनके साथ कोई ज्यादती नहीं की गयी है। उन्होंने जाँच को तत्काल सीबीआई को सौंपने की माँग की।
असद हयात और राजीव यादव ने जारी बयान में कहा कि इसी तरह बलात्कार की घटनाओं को भी सरकार और प्रशासन दबाने में जुटा है जिसका प्रमाण फुगाना थाने में दर्ज बलात्कार की छह घटनाओं में से अब तक सिर्फ तीन पीड़ितों का मेडिकल कराना है। नेताओं ने आरोप लगाया कि आरोपी सामूहिक बलात्कार पीड़िता के परिजनों को पुलिस के मार्फत लगातार दबाव डाल रहे हैं कि वे अपना मुकदमा वापस ले लें और इसी के तहत पीड़िताओं का मेड़िकल नहीं करवाया जा रहा है और बलात्कारी खुलेआम घूम रहे हैं। मसलन फुगाना गांव जो थाने से मुश्किल से दो किलो मीटर दूर है, के सामूहिक बलात्कार के आरोपी ग्राम प्रधान थाम सिंह, जोगिन्दर, सुनील, रमेश कुमार, राम कुमार और विजेन्दर खुलेआम घूम रहे हैं और मीडिया से भी मिल रहे हैं। लेकिन पुलिस उन्हें अब तक नही पकड़ पायी है जो पुलिस के पक्षपाती रवैये को दिखाता है। इसके अलावा ऐसे परिवारों के पुरुष परिजनों के खिलाफ बलात्कार के आरोपी पुलिस और प्रशासन की मदद से झूठे मुकदमे भी दर्ज करा रहे हैं। जिसके चलते बलात्कार पीड़ित परिवारों में दहशत है और उनकी इस स्थिति को देखकर सामूहिक बलात्कार की अन्य पीड़ित महिलाएं भी रिपोर्ट दर्ज करवाने का साहस नहीं कर पा रही हैं।
असद हयात और राजीव यादव ने माँग की है कि बड़े पैमाने पर सामने आ रही सामूहिक बलात्कार की इन घटनाओं में मुकदमा दर्ज करने के लिये राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम कैंपों में शिविर लगाकर एफआईआर दर्ज करे। उन्होंने कहा कि रिहाई मंच के रिकॉर्ड में ऐसे कई बलात्कार पीड़िताओं के बयान दर्ज हैं जो निष्पक्ष और बेखौफ माहौल मिलने पर अपने इंसाफ की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक बलात्कार पीड़ित महिलाओं को ऐसा माहौल न उपलब्ध कराकर भारतीय लोकतंत्र अपने गरीब और अल्पसंख्यक विरोधी चरित्र को उजागर करने के साथ ही बलात्कार के मसले पर अपने दोहरे रवैये को उजागर कर रहा है। जो यहाँ से सौ किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तो सामूहिक बलात्कार की घटना पर उद्वेलित होता है लेकिन साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार मुस्लिम महिलाओं को बेसहारा राहत शिविरों में छोड़ कर बलात्कारियों को बचाने में अपनी सारी उर्जा लगा देता है।
वहीं, लखनऊ से जारी बयान में रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने आरोप लगाया कि सपा सरकार सांप्रदायिक हिंसा के शिकार मुसलमानों को न्याय दिलाने के बजाय जांचों को प्रभावित करने के लिये ही निमेष कमीशन की रिपोर्ट में तारिक कासमी और पुलिस कस्टडी में कत्ल कर दिये गये खालिद मुजाहिद को फंसाने के आरोपी बताये गये मनोज कुमार झा को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम में रखा है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों को जेल के पीछे होना चाहिए उन्हें दंगों की जाँच करने के लिये भेजकर और मुसलमानों के इस जनसंहार में नेतृत्वकारी भूमिका में रहे भाजपा के ठाकुर नेताओं के नजदीकी रघुराज प्रताप सिंह को दुबारा मंत्री बनाकर सपा किस तरह की सांप्रदायिक राजनीति करना चाहती है इसे समझा जा सकता है।
राजीव यादव द्वारा भेजा गया पत्र
रजिस्टर्ड
सेवा में, दिनांक- 10 अक्टूबर 2013
1- श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक
मुजफ्फर नगर
2- श्रीमान अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक ग्रामीण
मुजफ्फर नगर
विषय- मुकदमा अपराध संख्या 439 सन 2013 अन्तर्गत थाना फुगाना की निष्पक्ष जांच और मृतक मेहरदीन की लाश कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराए जाने के संबन्ध में।
महोदय,
उपरोक्त विषय में निवेदन करना है कि प्रार्थी उक्त मुकदमा का वादी है। तथ्यों के अनुसार मेहरदीन पुत्र रफीक का शव दिनांक 8 सितंबर 2013 को ग्राम डूंगर थाना फुगाना में पवन जाट के घर/घेर मेें लटकी हुई अवस्था में निवस्त्र पाया गया था, जिसे ग्राम प्रधान रामचन्द्र और गांव के प्रभावशाली जाटों की पुलिस के साथ मिली भगत से उक्त मेहरदीन के घरवालों को अपने नाजायज दबाव व धमकी में लेकर जबरन कब्रिस्तान में दफनवा दिया गया था। प्रार्थी द्वारा कुछ चश्मदीद गवाहों के बयान वीडियो रिकार्ड किए गए, जिन्हें थाना प्रभारी फुगाना को एफआईआर दर्ज कराते समय दिया गया है। गवाहों द्वारा यह भी बताया गया कि मेहरदीन की हत्या को बीमारी से हुई मौत का मामला ग्राम प्रधान द्वारा बनावा दिया गया। विधि के अनुसार किसी भी लाश के पाए जाने के बाद यदि पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचता है तो आवश्यक है कि वह लाश का पंचनामा भरे। यदि मृतक के परिजन उस मृत्यु को स्वाभाविक अथवा बीमारी से हई मौत बताते हैं और पोस्टमार्टम की आवश्यकता नहीं समझते तो इसका उल्लेख भी आवश्यक रुप से पंचनामें में किया जाता है। परन्तु मेहरदीन के इस मामले में पुलिस द्वारा दिनांक 8 सितंबर को मौके पर पहुंचकर कोई पंचनामा नहीं भरा गया, ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि वह मृतक मेहरदीन का परिजन है और मेहरदीन की मृत्यु बीमारी से हुई है तो यह तथ्य उन तीन गवाहों की गवाही के विरुद्ध है, जिनका कहना है कि उन्होंने मेहरदीन की लाश को पवन जाट के घर/घेर में फांसी की अवस्था में निवस्त्र लटके हुए देखा था। प्रश्न यह भी है कि ऐसी परिस्थित में जिस समय सांप्रदायिक दंगा फुगाना थाना क्षेत्र में हो रहा था ठीक उसी दिन मेहरदीन की लाश का फांसी की अवस्था में पाया जाना और फिर उसके परिजनों द्वारा यह कहा जाना कि उसकी मृत्यु बीमारी से हुई है, यह साबित करता है कि उनके ऊपर कोई नाजायज दबाव काम कर रहा है।
प्रार्थी को थाना प्रभारी श्री केपी शर्मा द्वारा यह बताया गया कि मृतक के परिजन द्वारा यह कहा गया है कि मेहरदीन की मृत्यु बीमारी से हुई है। उपरोक्त तथ्यों की जानकारी प्रार्थी को श्री शर्मा के बताए जाने से हुई कि मृतक के परिजन द्वारा ग्राम प्रधान को कोई लिखित तहरीर भी इस संबन्ध में दी गई है।
प्रार्थी का प्रारंभ से ही यह कहना है कि मेहरदीन की हत्या की गई है जैसा के चश्मदीद गवाहों का बयान है कि मेहरदीन की लाश फांसी की अवस्था में निवस्त्र पाई गई थी और मेहरदीन के परिजन और गांव के मुसलमानों को दबाव में लेकर सबूत मिटाने के उद्देश्य से मेहरदीन को दफना दिया गया है। मेहरदीन के परिजन अभी भी ग्राम प्रधान और प्रभावशाली जाटों के दबाव में हैं इसलिए झूठा बयान दे रहे हैं। प्रार्थी का प्रारंभ से ही कहना है कि सबूत मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। इसलिए सत्य की खोज में यह आवश्यक है कि मेहरदीन की लाश को कब्र से निकलवाकर उसका पोस्ट मार्टम कराया जाए। परन्तु विषयगत मुकदमें के विवेचक और थाना प्रभारी केपी शर्मा द्वारा भी अभियुतों का साथ दिया जा रहा है, सबूत मिटाया जा रहा है और लाश को खुदवाकर पोस्टमार्टम नहीं करवाया जा रहा है। निष्पक्ष विवेचना नहीं हो रही है और विवेचक/थाना प्रभारी फुगाना द्वारा लाश को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया जा रहा है, इससे सबूत नष्ट हो रहे हैं और अभियुक्तों को लाभ हो रहा है। तीनों गवाह सद्दाम, राहिला और शौकीन को लगातार धमकियां मिल रही हैं कि यदि उन्होंने गवाही दी तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।
यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि हत्या समाज के विरुद्ध एक अपराध है और हत्या जैसे जघन्य अपराध को छिपाना और सबूत मिटाना उतना ही जघन्य अपराध है जितनी हत्या है। प्रार्थी के संगठन द्वारा मुजफ्फर नगर-शामली दंगों की सीबीआई से जांच कराए जाने के संबन्ध में जनहित याचिका नंबर 170 सन 2013 माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर की गई है जो कि लंबित है।
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि विषयगत मामले की विवेचना में हस्तक्षेप करके विवेचक को निर्देष देने की कृपा करें, कि वो कब्र खुदवाकर पोस्टमार्टम की कार्यवाई अमल में लावे।
प्रार्थी दिनांक- 10 अक्टूबर 2013
राजीव यादव
पुत्र इन्द्रदेव यादव
प्रवक्ता ‘रिहाई मंच’ व सदस्य कार्यकारिणी अवामी काउंसिल फाॅर डेमोक्रेसी एंड पीस
पता- 110/46 हरिनाथ बनर्जी स्ट्रीट लाटूश रोड, लखनऊ, उ0 प्र0।
मोबाइल नंबर- 09452800752
कापी प्रेषित आवश्यक कार्यवाई हेतु-
1- श्रीमान जिलाधिकारी, मुजफ्फर नगर
2- श्रीमान जिलाधिकारी, शामली
3- श्रीमान थाना प्रभारी फुगाना, जनपद मुजफ्फर नगर


