सहाय कमीशन पर कार्रवाई रिपोर्ट लाने के लिए सरकार को मजबूर करेगी अवाम- राजीव यादव
इंसाफ मुहिम के तहत गाजीपुर जिले के बारे गांव में परिचर्चा आयोजित
गाजीपुर 28 सितम्बर 2015। सूबे में नाइंसाफी के खिलाफ रिहाई मंच द्वारा चलाए जा रहे इंसाफ मुहिम के तहत गाजीपुर जिले के बारे गांव में ग्रामवासियों के बीच जागरुकता के तहत एक परिचर्चा के आयोजन में रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, शाहनवाज आलम व राजीव यादव ने संवाद किया।
ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि अल्पसंख्यकों के शोषण की बड़ी वजह उनमें राजनीतिक जागरूकता की कमी है। जिसके चलते आजादी के बाद से ही तथाकथित सेक्युलर पार्टियां उनके वोटों से सत्ता में तो पहुंची पर उनके अधिकार देने के बजाए उनका अधिकार छीनना ही उनका मुख्य एजेण्डा रहा है। इसी साजिश के तहत उन्होंने मुसलमानों के अंदर से कभी भी ईमानदार नेतृत्व को उभरने नहीं दिया। आज अधिकतर पार्टियों में ऐसे मुस्लिम चेहरे हैं जो सिर्फ मुसलमानों से वोट लेने के काम आते हैं और इनकी हैसियत मौजूदा सपा सरकार में देखी जा सकती है जो साढ़े तीन साल में एक बार भी विधानसभा में या सपा की पार्टी मीटिंगों में मुस्लिम आरक्षण से लेकर बेगुनाहों की रिहाई और सांप्रदायिक हिंसा पर सवाल तक नहीं उठाया।
इंसाफ मुहिम के अभियान को संबोधित करते हुए राजीव यादव ने कहा कि आज मुसलमानों को न सिर्फ इंसाफ से वंचित किया जा रहा है। बल्कि उनकी पहचान से जुड़े हर प्रतीक को मिटाने की साजिश रची जा रही है। जिसका ताजा उदाहरण उर्दू, अरबी, फारसी विश्वविद्यालय से इन तीनों भाषाओं की मान्यता समाप्त कर उसी सांप्रदायिक जेहनियत का विस्तार करना है, जिसकी नुमाइंदगी केंद्र की मोदी सरकार करती है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी जांच आयोगों की रिपोर्टों पर जिस तरह से सरकार कार्रवाई न कर सांप्रदायिक तत्वों और पुलिस मशीनरी का मनोबल बढ़ा रही हैं ऐसे दौर में इस इंसाफ के अभियान में अवाम की एक जुटता से न सिर्फ आरडी निमेष कमीशन पर कार्रवाई रिपोर्ट लाने बल्कि मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पर सहाय कमीशन की रिपोर्ट को कार्रवाई रिपोर्ट के साथ सदन में सरकार से रखवाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूर किया जाएगा।
रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों में समाज विज्ञान के क्षेत्रों में कम जाने की वजह से उनमें सिर्फ सामाजिक मसलों की समझदारी कम हुई। जिससे उनमें राजनीति के प्रति उदासीनता और नासमझी छायी हुयी है। यही कमी समुदाय के नेताओं में भी देखी जा सकती है जिनके पास अपने समाज की समस्याओं के हल का कोई खाका तक नहीं है। इसीलिए उनके होने न होने से मुसलिम समाज को कोई फायदा तो नहीं होता उल्टे नुकसान जरूर हो जाता है। इसीलिए हम देखते हैं कि मुसलमानों के कामगार तबके जैसे बुनकर मुबारकपुर, मोहम्मदाबाद, मऊ, भदोही, वाराणसी, टांडा, जलालपुर अंबेडकर नगर, खलीलाबाद समेत जहां-जहां भी इंसाफ मुहिम के तहत दौरा किया हर जगह हमने बुनकरों को आत्महत्या के कगार पर पाया। जबकि आत्महत्या के कगार पर खड़े इन इलाकों के लोगों तक जाने वाली सड़कें ऐसी फर्जी और कागजी नेताओं के महंगी-महंगी होर्डिंगों से पटी पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि आज जरूरत शिक्षा और स्वरोजगार में आगे बढ़ने के साथ ही अपने अंदर राजनीतिक जागरुकता पैदा करने, अपने वोट की कीमत समझने और अपने हक-हुकूक की लड़ाई के लिए सियासी जेहन बनाना भी जरूरी है।
रिहाई मंच नेता ने कहा कि इंसाफ के इस अभियान के तहत हम लगातार सूबे में अवाम की मांग पर गांवों-गावों, कस्बों-कस्बों परिचर्चाएं कर रहे हैं, हम अपील करते हैं कि इंसाफ पसन्द अवाम इस नाजुक समय में इस तरह की बातचीत का जगह-जगह आयोजन कर जागरुक होते हुए इंसाफ की इस लड़ाई को आगे बढ़ाए।
कार्यक्रम में मतीन खान, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दानिश खान, तबरेज खान, हिसामुद्दीन खान ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हैदर खान ने की और संचालन हाफिज मिनहाज ने किया। तुफैल खान, जागो-जागो ग्राम वासी समिति के अध्यक्ष डा0 टिपटाप, जमाल खान, इसरार खान, अंतःवासी एमबी हाउस, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, रियाज खान, सदाकत खान, महताब खान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता सदाकत खान, अब्दुल हन्नान खान, आदिल खान, इमरोज खान, मु0 गुफरान, शम्स तबरेज खान, शाहरुख खान, मोहसिन खान, जर्रार खान, सैफ खान, सहीन खान, मुर्तजा खान, इंकलाब खान, जमालद्दीन खान, राशिद खान आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।