इरोफान इंजीनियर भाजपा ने दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम बुुखारी के उस वक्तव्य की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने मुसलमानों से अपील की थी कि संप्रदायिक ताकतों को पराजित करने के लिए वे कांग्रेस को वोट दें। इमाम बुुखारी की राजनैतिक में यह दिखल अवांछनीय है और इसकी उन सब लोगों द्वारा निंदा की जानी चाहिए जो प्रतांत्र व धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों में आसथा रखते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि जामा मस्जिद के प्रांगण के बाहर, बुुखारी की कोई नहीं सुनता और यह बात काफी हद तक सही भी है। जामा मस्जिद इलाक़े के मौहल्ला विधायकों से चुनावा लड़ने वाले उम्मींदवार शोएब इकबाल का इमाम बुुखारी हमेशा से विरोध करते आ रहे हैं। परंतु उनके फतवों के बावजूद, शोएब इकबाल तीन बार चुनावा जीत चुके हैं। सन 2007 के उत्तरप्रदेश विधानसभा और 2009 के लोकसभा चुनाओं में बुुखारी ने मुसलमानों से बसपा को वोट देने की अपील की थी परंतु बसपा के उम्मीदवार उम्मींदवार भाभा जीत नहीं सके थे। सन 2012 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाओं में बुुखारी ने समाजवादी पार्टी का समर्थन करने की अपील मुसलमानों से की। नतीजा यह हुआ कि इमाम के दामाद उमर अली खान, जिन्हें सपाई ने टिकट दिया था, भी चुनाव हार गए और वह भी चौंकाने वाली हार गए। चुनाव हारने के बाद इमाम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि वह मुसलमानों से की। नतीजा यह हुआ कि इमाम के दामाद उमर अली खान, जिन्हें सपाई ने टिकट दिया था, भी चुनाव हार गए और वह भी चौंकाने वाली हार गए। चुनाव हारने के बाद इमाम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि वह मुसलमानों से की। नतीजा यह हुआ कि इमाम के दामाद उमर अली खान, जिन्हें सपाई ने टिकट दिया था, भी चुनाव हार गए और वह भी चौंकाने वाली हार गए। चुनाव हारने के बाद इमाम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि वह मुसलमानों से की।