मूर्खों ! गांधी की एक युक्ति को याद रखो - आँख के बदले आँख की बात होती तो आज सारी दुनिया अंधी हो चुकी होती।
गिरोह के बारे में हमारी राय बदल रही है। अब तक हम इन्हें बद्तमीज, बेहूदा और आतंकी ही समझते रहे, लेकिन आज बापू की पुण्य तिथि के अवसर पर कई पढ़े लिखे (?) की पोस्ट देख कर लगा वाकई ये जाहिल और कम अक्ल हैं। ये वही बाते दुहराते हैं जिसकी जानकारी इन्हें नहीं रहती। और उसका सरल मुहावरा बना कर 'चूहा मारने की दवा' बेचने वाले की भाषा में बोलते हैं। मसलन- अगर कोइ तुम्हारे बाएं गाल पर थप्पड़ मारे तो दाहिना गाल भी बढ़ा दो, खूब चलाया यह जुमला। क्यों कि किसी ने इनसे यह नहीं पूछा कि तो तुम क्या करोगे ? आज वक्त है कि इनसे यह पूछा जाय कि तुम क्या करते ? इस सवाल पर ये खुजली करने लगते हैं क्यों कि जब इन्हें यह सिखाया जा रहा था, या है तो वहाँ सवाल पूछने की मनाही होती है।
इसका जवाब इतिहास देता है। नमक क़ानून टूट कर रहेगा। कांग्रेस ने यह नारा दिया। बापू समेत कई नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे। कांग्रेस की कमान अबुल कलाम आजाद के हाथ थी। नमक क़ानून तोड़ने के लिए दस-दस का जत्था आगे बढ़ता रहा, पुलिस उन्हें मार कर गिराती रही। महिला कांग्रेस की ओर से महिलायें इन घायलों को उठा कर लाती रहीं और मरहम पट्टी करती रहीं। बहुत ह्रदय विदारक दृश्य था, लेकिन जत्था बढ़ता गया। सारी दुनिया में अपने को न्याय का प्रहरी कहने वाला अंग्रेज नंगा हो गया। उसने केवल एक सवाल पूछा था अपने मातहत से- उधर ( कांग्रस की तरफ से ) कोई हिंसा हुयी कि नहीं ? और जब उसे बताया गया कि - नहीं। वे बढ़ते गए, मार खाते रहे लेकिन उफ़ तक नहीं किया।
अमरीकी पत्रकार वाकर ने लिखा - आज उनका इजाम टूट गया ( अंग्रेजों का ) लेकिन गांधी की अहिंसा ने उन्हें पराजित कर दिया।।... मूर्खों ! गांधी की एक युक्ति को याद रखो - आँख के बदले आँख की बात होती तो आज सारी दुनिया अंधी हो चुकी होती। (हम उन जाहिलों के लिए के लिख रहे हैं जिनमें से तीन ऐसे हैं, जो दिमाग भी रखते हैं, शायद सुबह तक सुधर जाय।। अभी बिजली नहीं है औजार काम न करने की पूर्ण घोषणा कर चुका है वरना हम यहीं उनके उस जुमले का भी जवाब देते जो अपनी बात के लिए सरोजनी नायडू का सहारा लेकर आते हैं कि बापू की सादगी भी बहुत महंगी है। आप से अनुरोध है कि एक बार हमें सुबह के चार बजे से सात बजे के बीच याद दिला दीजियेगा। सुन रहे हैं पारासर जी ?) शुभ मित्रों। आज हम बापू के दिये हुए कामों में व्यस्त रहे। आपने बापू को जितने फूल चढ़ाये, याद किया। हमें बहुत बल मिला। शुक्रिया।
चंचल
चंचल। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार व समाजवादी आंदोलन के कर्णधार हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंचल जी रेल मंत्रालय के सलाहकार भी रहे हैं। चंचल जी की फेसबुक वॉल से साभार