मेरे गाँव का मुखिया
—————

जहाँ चुप रहना है
बोलता है
जहाँ बोलना है
भौंकता है
जहाँ भौंकना है
मुड़कर दौड़ता हैं
जहाँ दौड़ना हे
रुकता हैं
जहाँ रुकना है
झुकता हैं
जहाँ झपटना हैं
दुम टटोलता हैं

गाँव का मुखिया
डुबो देगा लुटिया

// जसबीर चावला //