ऑल इंडिया वर्कर्स कौंसिल का तीसरा चार दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू
आगामी तीन दिन देश की 70 फीसदी आबादी के सवालों पर होगा मंथन
किसानों की तबाही और विस्थापन मुल्क की बड़ी समस्याएं
लखनऊ, 06 नवंबर 2014। ऑल इंडिया वर्कर्स कौंसिल ने देश की 70 प्रतिशत आबादी की वर्तमान दयनीय स्थितियों पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों और कॉरपोरेट जगत की जनता को जाति व धर्म के नाम पर बांटने और उनका तरह-तरह से शोषण करने की नीतियों को निशाना बनाना ही होगा और मेहनतकश जनता की व्यापक एकता के आधार पर ही वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था को बदलकर ऐसी व्यवस्था को लाया जा सकता है जो न्याय, समाजवाद और सच्चे लोकतंत्र पर आधारित हो। इसके लिए जरूरी है कि आपसी मतभेद भुलाकर मेहनतकश लोगों को एकताबद्ध करके एक बड़े जन आंदोलन से जोड़ा जाए।
कौंसिल का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को लखनऊ के आर्य नगर स्थित उपकारम् करोति विद्यालय में शुरू हुआ। चार दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों तथा उत्तर प्रदेश से सैकड़ों प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के अंतिम दिन नौ नवंबर रविवार को ’श्रम कानूनों में बदलाव एवं श्रमिक वर्ग की मुक्ति के प्रश्न’ पर दोपहर बारह बजे से आम सभा होगी।
गुरुवार को उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया वर्कर्स कौंसिल के अध्यक्ष ओपी सिन्हा ने सम्मेलन में भाग लेने आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि आगामी तीन दिनों में सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में इस बात पर गहन विचार-विमर्श होगा कि देश की आम जनता की दुर्दशा और उसकी बेबसी को खत्म करने के लिए संघर्ष की कैसी रणनीति अपनाई जाए? उन्होंने कहा कि देश की आम जनता रोजगार के अभाव, न्याय के अभाव, पुलिस-प्रशासन-कानून के जुल्म, ठेका संविदा मजदूरी के भयंकर शोषण, दोहरी शिक्षा-चिकित्सा नीति और जाति-धर्म के भेद-भाव तथा सांप्रदायिक ताकतों के अत्याचार से पिस रही है। उन्होंने कहा कि आज किसानों की तबाही और विस्थापन बड़ी समस्याएं हैं। किस तरह से श्रमिक एवं मेहनतकश जनता का बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाए इस पर विचार करना वक्त की फौरी जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश की बड़ी आबादी की व्यापक एकता पर आधारित जन आंदोलन के उद्देश्य से अब से आठ वर्ष पहले ऑल इंडिया वर्कर्स कौंसिल की स्थापना लखनऊ शहर में हुई थी। तब से लेकर अब तक आम जनता के सवालों पर यह लगातार संघर्षरत है।
इस अवसर पर सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने अलग अलग स्थानों पर जनता के हितों से संबंधित जन आंदोलन के एकीकरण पर भी जोर दिया।
उद्घाटन सत्र का प्रारंभ क्रान्तिकारी गीतों से हुआ। इस अवसर पर ओ.पी. सिन्हा के अतिरिक्त दिल्ली से आए प्रो. शिवमंगल सिद्धांतकर, लखनउ से सीबी सिंह, कोलकाता के मानिक दत्ता, के.एन शुक्ला, बाल गोविन्द सिंह, रामकृष्ण आदि ने अपने विचार रखे।
चार दिवसीय सम्मेलन में केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, गुजरात, प. बंगाल, मध्यप्रदेश आदि प्रदेशों के सैकड़ों प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस दौरान जनकलाकार परिषद के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए जाएंगे।