मोदीजी, पेटीएम ने बिना मुझसे पूछे मेरे खाते से दो सौ रूपए उबेर को पकड़ा दिए
मोदीजी, पेटीएम ने बिना मुझसे पूछे मेरे खाते से दो सौ रूपए उबेर को पकड़ा दिए
मोदीजी, पेटीएम ने बिना मुझसे पूछे मेरे खाते से दो सौ रूपए उबेर को पकड़ा दिए
आशुतोष कुमार
सरकार कह रही है कि और कुछ हो न हो, नोटबंदी से कैशलेस यानी बेनगदी इकोनॉमी बनाने में भरपूर मदद मिलेगी।
भारत दुनिया के सबसे नगदनिर्भर अर्थव्यवस्थाओं में है। यहाँ मोबाइल रखने वालों में से भी एक तिहाई ही एस एम एस करना जानते हैं।
ये कठिनाइयां अपनी जगह, बेनगदी के कुछ बड़े खतरे भी हैं।
अपने अनुभव से लिख रहा हूँ।
पेटीएम ने बिना मुझसे पूछे मेरे खाते से दो सौ निकाल कर रूपए उबेर को पकड़ा दिए। इस भुगतान को विवादित भुगतान के रूप में दिखाया।
मेरा विवाद उबेर से जरूर चल रहा था, लेकिन उसके हल होने के पहले ही एकतरफा तरीके से पेटीएम ने मेरे खाते से विवादित राशि उबेर को सौंप दी।
मैने इस बारे में उनसे शिकायत की है। कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
मैं कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा हूँ।
लेकिन असली बात यह है कि बेनगदी व्यवस्था में आपके अपने पैसों पर आपका नियन्त्रण समाप्त हो जाता है।
अक्सर आप जान भी नहीं पाते कि उस पैसे का कौन किसलिए इस्तेमाल कर रहा है, और कहाँ आपको चूना लगा रहा है।
एक मैसेज या कॉल भेज कर मोबाइल, इंटरनेट और डीटीएच से जुड़ी गैरजरूरी मंहगी सेवाएं जारी कर दी जाती हैं और आपकी जेब नियमित रूप से कटने लगती है। कई बार आपको इनका पता भी नहीं चलता। पता चल ही जाए तो इन्हें बंद कराने के लिए आपको कई बार कस्टमर केअर को फोन करना पड़ सकता है और आप जानते ही हैं कि कस्टमर केअर को फोन करने के लिए आपके पास काफी फालतू टाइम होना चाहिए।
ईबैन्किंग ने आपके खून पसीने की कमाई पर डाके डालने के अनेक आसान रास्ते खोल दिए हैं।
आपके अकाउंट की जानकारी मांगने वाले अनेक फोन आपके पास भी आते रहते होंगे।
ईबैंकिंग सुविधाएं और बेनगदी प्रगतिशील कदम साबित हो सकते हैं, अगर उन्हें व्यस्थित रूप से, सुरक्षा उपायों और जनप्रशिक्षण के साथ लागू किया जाए।
अन्यथा वे आपकी मेहनत की कमाई के अदृश्य लूट का जरिया भी बन सकते हैं।


