नई दिल्ली। कहीं की ईंट कहीं का रोडा इकट्ठा कर भाजपा का कुनबा बढ़ाने में जुटे मोदी के शाही मिशन को तगड़ा झटका लगा है, पार्टी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी के खिलाफ बगावत करते हुए बेदी के प्रचार सहायक नरेंद्र टंडन ने बेदी पर ‘तानाशाही’ रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए भाजपा को बाय-बाय कर दी है। बताया जाता है कि भाजपा के मातृसंगठन आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के साथ अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत करने वाले टंडन 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ के महासचिव थे। पार्टी के विभिन्न पदों से होते हुए वह बाद में उस समय दिल्ली भाजपा के सचिव बने जब शहर इकाई के प्रमुख ओ पी कोहली थे।
टंडन ने अपना इस्तीफा देते हुए कहा कि उनके लिए बेदी के साथ काम करना मुश्किल है। हालांकि भाजपा ने कहा कि उनके पार्टी छोड़ने से चुनाव की तैयारी पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वह ‘निचले स्तर’ के कार्यकर्ता थे और उनका प्रदर्शन ‘प्रभावशाली नहीं’ था।
सात फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए जब किरण बेदी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया, तब टंडन उनके प्रचार दल का हिस्सा थे। अपना इस्तीफा देते हुए टंडन ने कहा, ‘‘मैंने बेदी के तानाशाही रवैये के कारण आज भाजपा से इस्तीफा दे दिया है।’’