पैंथर्स सुप्रीमो ने पाक सेना जनरल के वक्तव्य ‘भारत पाकिस्तान के लिए खतरा बन चुका है‘ को साजिश व निराधार बताया
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के संस्थापक प्रो. भीमसिंह ने पाक सेना जनरल के वक्तव्य, ‘भारत पाकिस्तान के लिए खतर बन चुका है‘ को दो भाइयों, भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच निराधार, उकसाने और घृणा पैदा करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ले. जनरल असिम बाजवा जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के डायरेक्टर जनरल भी हैं, उन्होंने तथाकथित जम्मू-कश्मीर समस्या को फिर से उभारने की कोशिश की, जबकि जम्मू-कश्मीर का लगभग आधा क्षेत्र पाकिस्तानी सेना के अधिपत्य में है और लगभग 20000 वर्गमील भूमि चीन के गैरकानूनी कब्जे में है और पाकिस्तान के पास पूरे गिलगित-बल्तिस्तान की 32000 वर्गमील भूमि गैरकानूनी कब्जे में हैं, इसके अतिरिक्त 4500 वर्गमील भूमि जम्मू क्षेत्र पाकिस्तान के गैरकानूनी कब्जे में है, जिसका पाकिस्तान ‘आजाद कश्मीर‘ के नाम से शोषण करता चला आ रहा है।

प्रो. भीमसिंह ने जनरल आसिम बाजवा के गैरजिम्मेदाराना वक्तव्य को अधिकृत कश्मीर के लोगों में भारत के खिलाफ एक बवाल पैदा करने की कोशिश है।
प्रो. भीमसिंह ने कहा कि पाकिस्तान की सेना 1947 से ही जम्मू-कश्मीर के लोगों पर अत्याचार करती आयी है और पाकिस्तान के अवाम को इसी के नाम से शोषित कर रही है।
प्रो. भीमसिंह ने कहा कि पाक सेना फिर से नवाज शरीफ की सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है, जैसा कि उसने नवाज शरीफ के खिलाफ पहले भी किया था।
प्रो. भीमसिंह ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र फिर से खतरे के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि वे पाकिस्तानी सेना की इस खतरनाक साजिश का पर्दाफाश करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने नवाज शरीफ इस विषय पर खामोशी पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना एक बार फिर नवाज शरीफ की चुनी हुई सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है।
प्रो. भीमसिंह ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जहाज उड़ाने के चक्कर में देश की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को जैसे भूल चुके हैं और उन्हें भारत में रुकने का समय ही नहीं मिलता। पैंथर्स सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री को जोर देकर कहा कि उन्हें राष्ट्रीय एकता परिषद की तुरन्त बैठक बुलानी चाहिए और उसमें पूरे भारत के समुदाय और राजनीतिक प्रतिनिधियों से धारा-370 में संशोधन करने का समर्थन जुटाना होगा। 77 वर्षों के बाद आज भी जम्मू-कश्मीर का ध्वज और संविधान भारत के ध्वज और संविधान से अलग क्यों है। धारा-370 में संशोधन की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर पर केन्द्रीय सूची-1 में उल्लिखित विषयों पर यानि रक्षा, संचार, विदेशी मामले शामिल हैं, उन पर संसद को कानून बनाने का पूरा-पूरा अधिकार होना चाहिए, जैसा कि बाकी राज्यों में है।

प्रो. भीमसिंह ने कहा कि महाराजा हरिसिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को विलयपत्र पर साफ-साफ लिखा था कि वे विदेशी मामलों, रक्षा और संचार इत्यादि पर कानून बनाने का अधिकार भारतीय संसद को सौंप रहे हैं।
प्रो. भीमसिंह ने कहा कि बाकी सभी 577 रियासतों के शासकों ने ऐसे ही विलयपत्र लिखा था।
प्रो. भीमसिंह ने कहा कि बड़ौदा के महाराजा गायकवाड़ ने भारत के साथ शामिल होने का विलयपत्र 1948 में प्रस्तुत किया था, जबकि हैदराबाद और जूनागढ़ के शासकों ने विलयपत्र पर हस्ताक्षर ही नहीं किये थे, उन्हे भारत संघ में शामिल किया गया।
प्रो. भीमसिंह ने भारतीय संसद से इस विलय को पूर्ण करने का आह्वान किया जो उससे एक खतरनाक चूक हो गयी थी। प्रो. भीमसिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्या धारा-370 में संशोधन से हल हो सकती है।