500 सौ और 1000 के नोटों पर पाबंदी : मोदी का एक और तमाशा

नई दिल्ली। सोशलिस्ट पार्टी ने 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी को प्रधानमंत्री मोदी का एक और तमाशा करार दिया है।

पार्टी प्रवक्ता डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि पांच सौ और हजार के नोट अचानक बंद करके सरकार और समर्थक दावे कर रहे हैं कि इस कदम से भ्रष्‍टाचार, कालाधन, कालाबाजारी, टैक्‍स चोरी, प्रोपर्टी की कीमतों में बनावटी उछाल के साथ सीमा-पार के आतंकवाद की समस्‍या पर भी लगाम लग जाएगी।

उन्होंने कहा ये बड़बोले दावे ही इस कदम के खोखलेपन को जाहिर कर देते हैं। यह फैसला दरअसल, विदेशों में जमा काला धन नहीं लाने की सरकार की नाकामी को लोगों की निगाह से हटाने की कवायद है। क्‍योंकि चारों तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बन रहा था कि वे कब प्रत्‍येक भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपया जमा कराने जा रहे हैं।

डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि मोदी देश के पहले तमाशगीर प्रधानमंत्री हैं। सरकार की हर मोर्चे पर बार-बार होने वाली विफलता से लोगों का ध्‍यान हटाने के लिए वे हर बार नया तमाशा खड़ा करते हैं। इस बार का तमाशा कुछ ज्‍यादा ही बड़ा लगता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता को इस योजना के खर्च और उपलब्धि का कोई आंकड़ा/अनुमान नहीं बताया है। बाजीगर की तरह सीधे डुगडुगी बजा दी है।

सोशलिस्ट नेता ने कहा कि अचानक थोपे गए इस फैसले से सबसे ज्‍यादा परेशानी उन मेहनतकश गरीबों को उठानी पड़ रही है, जिन्‍हें नवउदारवादी अर्थव्‍यवस्‍था ने हाशिए पर पटका हुआ है।
सोशलिस्‍ट पार्टी का मानना है कि काला धन नवउदारवादी नीतियों का अनिवार्य नतीजा है।
पूरी दुनिया के स्‍तर पर यह देखा जा सकता है। जो सरकार नवउदारवादी नीतियों को पिछली सरकारों से ज्‍यादा तेजी से चला रही है, उसका काला धन खत्‍म करने का दावा सिद्धांतत: गलत है। सरकार के इस फैसले का वही राजनीति पार्टी या नागरिक समर्थन कर सकते हैं जो पूंजीवादी आर्थिक नीतियों और विकास के समर्थक हों।