‘‘ व्यापम घोटाला ’’
मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला इन दिनों में चर्चा में है, जनान्दोलनों की कभी पर्याय रही कांग्रेस व्यापम घोटाले के जरिये प्रदेश की राजनीति की वैतरणी पार करना चाहती है। मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह कांग्रेस के आखिरी सुल्तान थे। पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस मध्य प्रदेश में लगातार भाजपा से पिछड़ती आ रही है। लगातार सत्ता का सुख भोगने की वजह से कांग्रेसी नेता आराम तलब हो गये हैं मैले कुचैले दरिद्र किसानों मजदूरों के साथ उठने बैठने में उन्हें तकलीफ होती है, इसलिये वे उनके बीच में जाते नहीं हैं। दिल्ली की पॉंच सितारा संस्कृति में सम्प्रक्त हो वे इलेक्ट्रोनिक मीडिया के माध्यम से मध्य प्रदेश से जुड़े रहना चाहते हैं। कांग्रेस की इस कमजोरी का लाभ भाजपा उठा रही है।
व्यापम घोटाले से जुड़े लोगों की लगातार मौत के लिये भाजपा से अधिक कांग्रेस जिम्मेदार है क्योंकि उनके आराम तलब नेता इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठा नहीं पा रहे हैं। इस मुद्दे पर आम जनता को जोड़ने में नाकामयाब रहे हैं, वरना जिस प्रकरण में अब तक 45 मौतें हो चुकी हों, हजारों की संख्या में फर्जी भर्तियॉं हो चुकी हों, बावजूद इसके भी पूरे प्रदेश की जनता चुप है। प्रदेश की जनता की अगुवाई करने के लिये कोई भी राजनैतिक दल आगे नहीं आ रहा है। बड़ी विचित्र सी बात है सत्ता के भूखे राजनैतिक दलों में इतनी बड़ी चुप्पी क्यों ? मुझे तो लगता है कि इस घोटाले में सभी दल शामिल हैं इसलिये भोपाल की सड़कें सुनसान हैं।
व्यापम के बारे में मैं वह सब कुछ नहीं बताना चाहता जो कि सभी को मालूम है। मैं केवल इस घोटाले में प्रदेश की जनता की चुप्पी पर प्रकाश डालना चाहता हॅंू। मध्य प्रदेश की गिनती एक शान्त प्रदेश के रूप में होती है। यह प्रदेश सदैव शान्त रहा, भारत के स्वतंत्रतान्दोलन में भी इस प्रदेश के नेताओं ने कोई बड़ी भागेदारी नहीं की थी। छत्तीसगढ़ के अगल होने से पहले तक इस प्रदेश को देश का सबसे बड़ा प्रदेश होने का गौरव हासिल रहा है। बावजूद इसके स्वतंत्रता के पश्चात भी इस प्रदेश का कोई बड़ा नेता देश के प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं बना, जबकि इस प्रदेश के बगल के प्रदेश उ0प्र0 ने ढेरों प्रधानमंत्री दिये और इस पद के दावेदारों की तो गिनती करना भी आसान काम नहीं होगा। व्यापम जैसे घोटालों के लिये इस प्रदेश की जलवायु उपयुक्त है। यदि यही घोटाला उ0प्र0 में हुआ होता तो अब तक इतना हंगामा हो चुका होता कि प्रदेश की ही नहीं देश की सरकार अस्थिर हो चुकी होती।
निःसन्देह मध्य प्रदेश में जागरूकता की कमी है वरना व्यापम जैसा घोटाला इतने सालों से अनवरत न होता रहता। कमाल की बात तो यह कि संज्ञान में आ जाने के पश्चात भी घोटाला लगातार जारी है। बेशर्मी की हद यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री इस प्रकरण पर मीडिया के सामने मुस्कुराते हुये जबाव देते नजर आते हैं। राजनीति में शुचिता और ईमानदारी का दावा करने वाले भाजपा के सबसे बड़े नेता प्रधानमंत्री मोदी चुप्पी साधे बैठे हैं। पिछले एक वर्ष के उनके शासनकाल में यह अनुभव हुआ है कि वह गम्भीर मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं चाहे वह व्यापम घोटाला हो, ललित गेट कांड हो, स्मृति ईरानी की फर्जी डिग्री का मामला हो। उनकी चुप्पी तभी टूटती है जब वह मन की बात कहने के लिये देश की जनता के बीच में आते हैं। अरे भई यह काम तो हमारे देश के तमाम साधु-महात्मा बखूबी कर रहे हैं उनको इस विधा में पेटेण्ट मिला हुआ है। मुझे बहुत कुछ नहीं कहना है सवा सौ करोड़ आबादी का यह देश बगैर घोटालों के आगे नहीं बढ़ सकता, बड़ा सीधा सा अर्थशास्त्र है एक अनार को हासिल करने के लिये सौ बीमारों के बीच भीषण संघर्ष होना तो तय ही है।
मैंने जब होश संभाला और माता-पिता से छुपकर पिक्चर देखना शुरू किया तब हिन्दुस्तान की जनता के दिलों पर हेमामालिनी राज किया करती थी। मैंने उनकी शोहरत का वह दौर देखा है। हाल में वह एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गयीं, उनके चेहरे पर खून फैला हुआ था। मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि कितना बुरा लगता है एक खूबसूरत, लोगों के दिलों पर राज करने वाली, हीरोइन को इस दशा में देखना। हमारे देश के लोगों की कृतघ्नता तो देखिये उस बेचारी लहूलुहान हीरोइन को भी नहीं बख्शा इलेक्ट्रोनिक मीडिया के रण वॉंकुरे तलवारें लेकर कूद पड़े उस दुर्घटना में भी हेमामालिनी के तमाम दोष खोज निकाले गये। ऐसा लगा कि हेमामालिनी कातिल है उस घटना में मरी छोटी बच्ची की मौत की वह ही जिम्मेदार हैं। मृत छोटी बच्ची जिस गाड़ी पर सवार थी, मीडिया वालों ने उस गाड़ी के ड्राइवर को क्लीन चिट दे दी, जबकि उस दुर्घटना के लिये एकमात्र वही ड्राइवर जिम्मेदार था जिसने बगैर देखे हुये डिवाइडर को क्रॉस करते हुये दूसरी दिशा में गाड़ी को मोड़ लिया। अब तो ट्रैफिक नियम भी इलेक्ट्रोनिक मीडिया के लेाग अपनी सुविधा के अनुसार बनायेंगे और सिखायेंगे। दोषी ड्राइवर का यह कह देना कि उसने दूसरी तरफ देखकर गाड़ी मोड़ी थी बस इतना कह देने से ही वह निर्दोष साबित हो गया। मेरे इलेक्ट्रोनिक मीडिया के जज साहिबानों जब ड्राइवर ने गाड़ी देखकर मोड़ी थी तो हेमामालिनी की गाड़ी कहॉं से अचानक टपक पड़ी। यदि आप लोग इसी तरह गलत तथ्यों को जस्टीफाई करेंगे तो निःसन्देह आपकी विश्वसनीयता कम होगा और देश में कानून का पालन करने वाले अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर आगे बढ़ने वाले लोगों को देश छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा। हेमा का केवल दोष इतना था कि वह एक सेलेब्रेटी थी और आप साहिबानों को सेलेब्रेटीज की इज्जत में पलीता लगाने में आनन्द आता है क्योंकि इससे आपकी टी0आर0पी0 बढ़ती है बढ़ती टी0आर0पी0 से आपको और अधिक पैसा मिलता है।
अनामदास