क्या यह आपातकाल की स्थिति है?
संविधान विरोधी साम्प्रदायिकता भाजपा-संघ की विचारधारा का एकमात्र और स्थायी आधार है
कुछ बुद्धिजीवी वर्तमान केंद्र सरकार जिस तरह से चल रही है उसे आपातकाल से जोड़कर देख रहे हैं। मेरे विचार से यह मिलान असंगति है और इससे वर्तमान सरकार के कुकृत्यों को वैधता ही मिल रही है। मेरे तर्क संक्षेप में यह हैं-
1 आपातकाल लगाने की संविधान में स्पष्ट व्यवस्था है, इसलिए इस पर तो बहस हो सकती है कि इंदिरा गांधी ने जो आपातकाल लगाया था उसके लायक परिस्थितियाँ थीं या नहीं, पर वह असंवैधानिक था ऐसा नहीं कहा जा सकता।
2 वर्तमान सरकार जो कुछ भी कर रही है वह संविधान का खुला उल्लंघन है।

3 यदि भाजपा संघ की वैचारिक पृष्ठभूमि को देखे तो इनकी भारतीय संविधान में कभी आस्था नहीं रही है। जनता की लामबंदी के लिए इन्होंने हमेशा संविधान विरोधी साम्प्रदायिकता का सहारा लिया है और यह उनकी विचारधारा का एकमात्र और स्थायी आधार है।
4 यह सरकार अपने शासन का इस्तेमाल भारत की बहुदलीय संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को मिटाने के लिए कर रही है। यह इसका अघोषित एजेंडा है।
5 इस सरकार के क्रियाकलाप को पिछली सरकारों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। यह साम्प्रदायिक सोच पर खड़ी एक फासीवादी सरकार है।
6 इंदिरा गांधी से मोदी की तुलना का मतलब है कि यह मोदी सरकार कुछ नया गड़बड़ नहीं कर रही और पिछली सरकारों ने जो किया यह सरकार भी बस वैसी ही है।
आलोक वाजपेयी