यह कोल्ड ब्लड मर्डर है.
रोहित वेमुला की हत्या की गई है.
सामाजिक बहिष्कार अपने आप में क्रूरता है. दलितों को यह सजा देने के और भी मायने हैं
#BJPKilledDalitScholar
दिलीप सी. मंडल
ये कोल्ड ब्लड मर्डर है. सोच समझ कर की गई हत्या.
बीजेपी का एक केंद्रीय मंत्री बंदारू दत्तात्रेय, दूसरी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को ऑफिशियल चिट्ठी लिखता है कि आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन पर कार्रवाई कीजिए. इस पर कार्रवाई होती है.
स्मृति ईरानी के निर्देश पर वाइस चांसलर पांच छात्रों के सामाजिक बहिष्कार का नोटिस जारी करते है. जबकि इससे पहले यूनिवर्सिटी की प्रोक्टोरियल जांच में ये छात्र निर्दोष सिद्ध हो चुके हैं. दत्तात्रेय ईरानी से शिकायत करते हैं कि यूनिवर्सिटी नरमी बरत रही है.
दो आरोप हैं. आप दत्तात्रेय का पत्र देखें. फांसी पर ग्लोबल बहस में जब इस देश के कई जज, प्रोफेसर, मानवाधिकार कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं, तब कैंपस में इस पर सेमिनार करना अपराध बताया गया है. एबीवीपी के जिस छात्र ने मारपीट का आरोप लगाया था, वह खुद यूनिवर्सिटी को लिखकर माफी मांग चुका है. सामाजिक बहिष्कार अपने आप में क्रूरता है. दलितों को यह सजा देने के और भी मायने हैं.
यह कोल्ड ब्लड मर्डर है. सोच समझकर की गई हत्या. रोहित वेमुला की हत्या की गई है.
अगर रोहित वेमुला पर शोक मनाने के लिए और नाराजगी जताने सिर्फ दलित बहुजन आगे आते हैं, हाशिमपुरा और भागलपुर दंगों या अखलाक के लिए अगर सिर्फ मुसलमान रोता है, लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के लिए सिर्फ OBC या दलित दुखी होते हैं, भगाना या खैरलांजी अगर सिर्फ दलित महिलाओं का मुद्दा है, कंधमाल को लेकर शोक मनाने का दायित्व अगर सिर्फ ईसाइयों का है, दांतेवाड़ा का दर्द अगर सिर्फ आदिवासियों को होता है...

.... तो लोगों का नागरिक बनाना तो छोड़िए, इंसान बनाना भी पूरा नहीं हुआ है। वे अपने अपने कबीलों के सदस्य हैं, जिन्हें इतिहास ने एक नक्शे के अंदर रहने को मजबूर कर दिया है।

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या का जिन्हें दुख या नाराजगी नहीं है, अगर कोई व्यक्ति ऐसे शोक के क्षणों में भी जाति, धर्म और संस्कृति या नस्ल के बंधनों से ऊपर उठकर सबके साथ मिलकर दुखी नहीं हो सकता, तो मान लीजिए कि वह देश का नागरिक नहीं, किसी कबीले का सदस्य मात्र है। उनका इंसान होना भी शक के दायरे मे है।

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क्या आपको अपने आस पास ऐसे लोग नजर आते हैं?
(दिलीप सी. मंडल की फेसबुक टाइमलाइन से साभार)