यह तस्वीरें दिल पर बोझ की तरह आख़री साँस तक दर्ज रहेंगी

हफीज़ किदवई

पत्रकार शुजाअत (शुजात बुखारी) के जनाज़े को कैमरे में क़ैद कर लेना चाहते हैं। भीड़ शुजाअत के जनाज़े को सुपर्द ऐ ख़ाक कर देना चाहती है। अख़बार अपने मालिक की रुखसती की हेडलाइन के लिए आँसुओं से रातभर अल्फ़ाज़ चुनता है और इन सबसे बेख़बर शुजाअत बुख़ारी अपने बच्चे और परिवार की तरफ़ न देख हमारी आँखों में झाँक रहें हैं...

यह तस्वीरें दिल पर बोझ की तरह आख़री साँस तक दर्ज रहेंगी। जब ईद की मुबारकबाद पिघले हुए सीसे के तरह कानों में पड़े, तब एहसास होता है कf वह कौन चला गया है, जो जाते-जाते सारे मज़े, सारा सुक़ून ले गया।

मरना तो है ही शुजाअत भाई, काश हम भी आपकी तरह हिम्मती होते, तो यह घिसटती हुई सीलन भरी, नफ़रत में उबलती भीड़ के बीच लड़ते हुए कबका दम तोड़ मिट चुके होते। अब बस हम तीन अलग-अलग दिशाओं के लोग, एक जगह एक हो सकते हैं। आप चले गए, वह जाने वालें हैं और हम तैयार बैठे हैं बस आप सबकी तरह हिम्मत आ जाए।

यह तस्वीरें और आपकी यादें दिल में लगी फाँस हैं, जो रूह के साथ ही अब निकलेगी....

(हफीज़ किदवई की एफबी टिप्पणी)