यादवपुर विश्वविद्यालय में नंदीग्राम और रवींद्रसरोवर दोहरा दिया दीदी की मां माटी मानुष सरकार ने!
यादवपुर विश्वविद्यालय में नंदीग्राम और रवींद्रसरोवर दोहरा दिया दीदी की मां माटी मानुष सरकार ने!
मुक्त बाजारी सत्ता को न लोक की परवाह होती है, न संस्कृति की और न इतिहास की।
दिन दहाड़े सामूहिक बलात्कार और नारी उत्पीड़न अब अपराध कम और राजनीति ज्यादा है क्योंकि सांढ़ संस्कृति का राहुकाल है और नाना प्रकार के सांढ़ अपने पुंसत्व का झंडोत्तोलोन के लिए चौबीसों घंटे चाकचौबंद हैं।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
दीदी की मां माटी मानुष सरकार ने यादवपुर विश्वविद्यालय में नंदीग्राम और रवींद्रसरोवर दोहरा दिया! यादवपुर विश्वविद्यालय कैंपस में छात्रा से कथित तौर पर छेड़छाड़ के मामले में विरोध प्रदर्शन कर रहे 35 छात्रों की गिरफ्तारी से यह मुद्दा और गरमा गया है। विश्वविद्यालय में माहौल गरम हो गया है। एक छात्रा के यौन शोषण की शिकायत की नए सिरे से जांच की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज होने के बाद वे उग्र हो गए।
मंगलवार रात करीब दो बजे हुई पुलिस कार्रवाई के बाद से ही छात्र भड़के हुए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के उपकुलपति और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ललकारते हुए नारे लगाए कि आओ, छात्रों की ताकत देखो।
गौरतलब है कि छेड़छाड़ के मामले की जांच कर रही समिति में दो बाहरी सदस्यों को शामिल करने की मांग को लेकर छात्रों ने उपकुलपति और रजिस्ट्रार को बंधक बना लिया था। पुलिस ने कथित रूप से छात्रों पर लाठीचार्ज किया।
छात्रों के मुताबिक पुलिस ने विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के साथ बदसलूकी भी की। छात्राओं ने पुलिस के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत दर्ज कराई है।
छात्रों ने मंगलवार आधी रात को विश्वविद्यालय के उप कुलपति और रजिस्ट्रार का घेराव किया था। छात्र संगठन ने कहा कि जब तक उनको आश्वासन नहीं मिल जाएगा तब तक घेराव नहीं उठाएंगे। मंगलवार को एक लड़की के यौन शोषण के मामले में प्रदर्शन कर रहे 35 छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
बुधवार सुबह छात्रों का गुस्सा पुलिसिया कार्यवाही पर भी फूटा। सड़क पर उतरे छात्र जादवपुर विश्वविद्यालय पुलिस स्टेशन के सामने रास्ता रोककर बैठ गए। उन्होंने कई ओर से रास्ता बंद कर दिया। कुछ छात्राओं ने पुलिस अफसरों द्वारा किए गए यौन दुर्व्यवहार और विश्वविद्यालय के उपकुलपति अभिजीत चक्रबर्ती के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई।
सभी छात्र साथी छात्रा के साथ हुए यौन दुर्व्यवहार की नए सिरे से जांच की मांग कर रहे थे। छात्रों ने उपकुलपति अभिजीत चक्रवर्ती और रजिस्ट्रार का घेराव भी किया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर छात्रों को खदेड़ दिया।
छात्रों का आरोप है कि पुलिस के साथ तृणमूल छात्र परिषद के सदस्य भी थे, जिन्होंने छात्रों को जबरिया हटाया।
हालात पर काबू पाने के लिए अडिशनल पुलिस कमिश्नर पुलिस बल के साथ कैंपस पहुंचे, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अडिग रहे।
वहीं उपकुलपति ने कहा कि अगर पुलिस नहीं आती, तो उन्हें मार दिया जाता। इसके अलावा प.बंगाल के शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, छात्रों की अनुशासनहीनता को नहीं सहेगी और यह मामला बातचीत से सुलझ सकता है।
नंदीग्राम में बहिरागत मदद से पुलिस और बिनवर्दी पुलिस मुखौटे में हर्माद वाहिनी ने क्या क्या गुल खिलाये, उसका इतिहास सांप्रतिक है और बाकी देश उसे भूल भी जाये, दीदी कदम दर कदम वाम वापसी रोकने के लिए उस दुस्समय को याद दिलाती रहती है। थिओरी से हो सकता है लोग समझें नहीं, तो उन्होंने यादवपुर विश्वविद्यालय कैंपस को ही माकपाई सूर्योदय का हर्माद देश बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।
रवींद्र सरोवर कांड आज भी देश की सबसे लज्जाजनक घटनाओं में शामिल है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के मध्य दक्षिण कोलकाता की सुरम्य झील में अचानक बत्ती गुल और सामूहिक वस्त्रहरण के जरिये वहां हाजिर महिलाओं के साथ जो चाहा कर डाला दुष्कर्मियों ने।
सूचना तकनीक के सौजन्य से अंधेरे का वह फुटेज नंदीग्राम और रवींद्र सरोवर का भले ही उपलब्ध नहीं हो, लेकिन यादवपुर विश्वविद्यालय में जो कुछ भी सत्ता ने कर दिखाया, वह सब कुछ कैमरे के अलावा मोबाइल के जरिये फेसबुक ट्विटर और सोशल मीडिया से लेकर टीवी के परदे और अखबारों के पन्ने पर हूबहू दर्ज है इस तरह की चश्मदीदी गवाही की भी जरुरत नहीं है।
मामला दरअसल एक सांस्कृतिक अनुष्ठान के बाद कार्यक्रम में बतौर जज आये एक संगीत कार के साथ पार्क में बैठी विश्वविद्यालय की एक पार्टिसिपेंट छात्रा को उठाकर पीजी छात्रावास में ले जाने, उसके साथी को मारने पीटने और छात्रा के साथ हुए अभव्य आचरण की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ निष्क्रियता के अभियोग में छात्रों के आंदोलन से शुरु हुआ, जिसका अंत सत्तादल के स्वयंसेवियों बहिरागत पार्टी कर्मियों और वर्दीधारियों के द्वारा विश्वविद्यालय में बत्तीगुल करके तमाम छात्राओं के साथ अश्लील आचरण और आंदोलनरत छात्र छात्राओं की हर तरह धुनाई और गिरफ्तारी से हुआ।
अब देश के बाकी विश्वविद्यालयों के छात्र इससे सबक ले सकते हैं कि चूंकि यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर काशी विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया, तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी आईआईएम के जैसे चुनिदा परिसरों की तरह अन्यतम अकादमिक क्षेत्र है और वहां मुक्त बाजारी सत्ता छात्रों और छात्राओं के साथ एकमुश्त नंदी ग्राम और रवींद्र सरोवर हथियारों का इस्तेमाल कर सकती है, तो अपने अपने परिसर में वे कितने सुरक्षित और स्वतंत्र हैं।
मुक्त बाजारी चकाचौंधी नॉलेज इकॉनोमी में शिक्षाक्षेत्रे व्याप्त अंधकार का रवींद्र सरोवर बने यादवपुर के सबक से भावी पीढ़ियों को इससे निपटने के तौर तरीके भी शायद निकालने की जरूरत पड़े।
विनाशकाले विपरीत बुद्धि, शास्त्रों में लिखा है सत्ता दंभ के संदर्भ में। आपातकाल में छात्र युवाओं के अभूतपूर्व ऐतिहासिक दमन के एंकाउंटर विशेषज्ञ तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय के पुलिस मंत्री सुब्रत मुखर्जी मां माटी सरकार में पंचायत मंत्री हैं, लेकिन मुकुलित सौरभकाले वे तनिक हाशिये पर हैं, लेकिन दीदी ने उन्हें लज्जित होने का मौका नहीं दिया है क्योंकि उनकी सरकार भी छात्रों युवाओं के दमनप्रसंगे सिद्धार्थ सरकार से किसी भी मायने में कम नहीं है।
हाल ही में छात्र आंदोलन में गिरफ्तार एक युवा छात्र नेता सुमन गुप्त को पुलिस हिरासत में बस से धकेलकर मार देने का काम इसी सरकार ने किया। जिसके विरोध में दिल्ली में एसएफआई समर्थकों ने योजना आयोग की बैठक में पहुंचे बंगाल के मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री से कुछ बेजा हरकत कर दी तो वह तूफान ठंडा हो गया तो अभी चौरंगी विधानसभा उपचुनाव के वक्त उस हत्याकांड की एकमात्र गवाह छात्र नेत्री समेत दो छात्राओं को सड़क पर गिराकर नृशंस तरीके से मारने पीटने की वारदात भी हो गयी। दिन दहाड़े सामूहिक बलात्कार और नारी उत्पीड़न अब अपराध कम और राजनीति ज्यादा है क्योंकि सांढ़ संस्कृति का राहुकाल है और नाना प्रकार के सांढ़ अपने पुंसत्व का झंडोत्तोलोन के लिए चौबीसों घंटे चाकचौबंद हैं।
जाहिर है कि इन्हीं निष्ठावान पैदल फौजियों ने यादवपुर कांड को अंजाम दिया तो कोलकाता पुलिस के डीसी बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके छात्रों को हिंसक, अराजक और हथियारबंद बागी कुछ भी साबित करने का योगाभ्यास कर रहे हैं जिनको झूठा साबित कर रहे हैं तमाम लाइव फुटेज।
आज पांचवे दिन भी यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर उत्ताल समुद्र है जो ज्वालामुखी लावा बनकर जुलूस शक्ल में कोलकाता के राजमार्गों पर बहने भी लगा है।
उपकुलपति ने आधी रात के बाद आंदोलनकारी छात्र छात्राओं के घेराव से मुक्त होने के लिए पुलिस की मदद मांगी और सत्ता पक्ष के लिए रक्षाकवच बस इतना है। बाकी विश्वविद्यालय प्रशासन और अध्यापक वर्ग ने उपकुलपति की इस दलील को खारिज करने ज्यादा वक्त नहीं लगाया है तो विश्वविद्यालय की गरिमा को बाट लगाते हुए उपकुलपति ने ऐसा भी कह दिया कि हथियारबंद छात्र उनकी हत्या कर देने को तत्पर थे।
अब भी छात्र आंदोलन की बागडोर अहिंसक छात्राओं के हाथ में है और मंगलवार की रात को भी इन्हीं छात्राओं को निशाना बनाया गया। छात्रों पर बेरहम लाठियां और छात्राओं का वस्त्रहरण। यह नये किस्म का सत्ता समीकरण है।
सत्तर के दशक के छात्र युवा आंदोलन के बारे में दीदी की कोई अच्छी राय नहीं है और कोलकाता में किस्सा मशहूर है कि कैसे उन्होंने जेपी की जीप के बोनट पर खड़ा होकर कांग्रेस की छात्र युवा नेत्री बाहैसियत सार्वजनिक तौर पर क्या करिश्मा कर दिखाया था।
दीदी के तार वाया शारदा जमायत और हिफाजत से जुड़े हैं तो उनके वोटबैंक के सिपराहसालार भी तमाम कट्टरपंथी तत्व हैं। दीदी को मालूम नहीं कि खबर है कि नहीं, जब यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर कांड से पूरे बंगाल और पूरे देश में छात्र ज्वालामुखी फूट निकलने को है तो ठीक उसी समय बांग्लादेश के प्रजन्म चत्वर शाहबाग में कट्टरपंथ, हिफाजत जमायत गठबंधन के खिलाफ फिर छात्रों और युवाओं का हुजूम उमड़ने लगा है और उन पर किसी भी तरह के बल प्रदर्शन का असर नहीं है।
मुक्त बाजारी सत्ता को न लोक की परवाह होती है, न संस्कृति की और न इतिहास की।
हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का दुस्साहस भी इसीलिए बार-बार हो रहा है और राजनीति चीरहरण संस्कृति में तब्दील है। लंकादहन या कुरुक्षेत्र से अब सत्ता को कोई डर जाहिर है है ही नहीं।
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