यूजीसी का नोटिफिकेशन 2016 : भारत को पुनः मध्य युग में ले जाने की साजिश
यूजीसी का नोटिफिकेशन 2016 : भारत को पुनः मध्य युग में ले जाने की साजिश
वर्धा, 08 अप्रैल। यूजीसी के नोटिफिकेशन2016 के खिलाफ आज दूसरे दिन भी महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विरोध जारी रहा, जिसमें पिछले दिनों के विरोध प्रदर्शनों की तुलना में ज्यादा विद्यार्थी शामिल हुए।
विरोध प्रदर्शन में सामान्य विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में भागीदारी यह संकेत करती है कि विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर सजग हैं। उन्हें यह पता है कि इस तरह के यूजीसी के एक तरफ़ा निर्णयों के कारण उनके शोध करने की संभावनाए लगभग समाप्त हो जायेंगी
आंदोलनकारी छात्रों की एक विज्ञप्ति के अनुसार विरोध प्रदर्शनों के क्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राए हिंदी विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्रित हुए और सरकार तथा यूजीसी के शिक्षा विरोधी रवैये को लेकर अपना आक्रोश प्रकट किया तथा विरोध स्वरुप यूजीसी का पुतला फूंका।
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने सरकार और यूजीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस निर्णय पर अपने विचार भी रखे।
छात्र नेता मेघा ने कहा कि यूजीसी के इस निर्णय के कारण शोध की संभावनाएं तो ख़त्म होंगी ही साथ ही साथ महिलाओं और वंचित तबके से आने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के रास्ते बंद हो जायेंगे।
इसी क्रम में गोविन्द ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इसके पीछे भारत को पुनः मध्य युग में ले जाने की साजिश रची जा रही है जिससे कि सोचने समझने वालो की संख्या कम हो और राजसत्ता से सवाल करने वाला कोई न हो।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अरविन्द यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यूजीसी को शिक्षा विरोधी यह निर्णय वापस लेना पड़ेगा तथा शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यूजीसी को चाहिए कि संविदा पर रखे गये शिक्षकों को स्थाई करे तथा शिक्षकों की नयी नियुक्ति करे।
आन्दोलन के प्रति विद्यार्थियों ने अपनी एकता को जाहिर करते हुए कहा कि जब 4 मई 2016 के नोटिफिकेशन को यूजीसी वापस ले सकती है जो कि शिक्षको के वर्कलोड के बारे में था, जिससे अकेले दिल्ली विश्विद्यालय में 4000(चार हजार) से ज्यादा संविदा शिक्षकों की नौकरी जाने वाली थी। यह निर्णय यूजीसी वापस ले सकती है तो फिर शोध की संभावनाओं को ख़त्म करने वाले निर्णय को क्यों नहीं वापस ले सकती। विद्यार्थियों में भारी आक्रोश है, वे इस बात को लेकर डटे हैं कि यूजीसी जब तक अपना यह निर्णय वापस नहीं नहीं लेती है तब तक इसी तरह से देश के सभी विश्वविद्यालयो में विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।


