श्रीराम तिवारी
पठानकोट आतंकी हमले की जांच के बहाने पाकिस्तान के बदमाश आईएसआई वाले भारत की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं और हमारे देशभक्त नेता उनकी आवभगत में खीसें निपोर रहे हैं, पाकिस्तानी जाँच दल जेआईटी के लिए लाल कालीन बिछा रहे हैं। जबकि अजहर मसूद से पूछताछ के विषय में पाकिस्तान ठेंगा दिखा रहा है।
केंद्र में यदि कोई और पार्टी का राज होता, मोदी सरकार की जगह कोई और सरकiर होती या कश्मीर में पीडीपी को किसी और दल ने समर्थन दिया होता तो 'संघ' वालों को - हिन्दुत्ववालों को और जेएनयू के छात्रों पर लात-घूसे चलाने वालों को, कश्मीर की यह राजनैतिक दुर्दशा पसंद आती ? क्या तब धारा 370 याद नहीं आती ? अब अपना ही बयांन 'पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर मारेंगे' याद नहीं रहा क्या ?

जिस तरह कोई नया-नया मुल्ला मस्जिद में शरू-शुरू में घनी-घनी और जोर-जोर से नमाज़ पढ़ता है, उसी तरह भारत के नए-नए सिखन्दडे शासकों ने भी 'राष्ट्रवाद' का हो हल्ला कुछ ज्यादा ही मचा रखा है। इन्हीं के इशारे पर जेएनयू में नए-नए संघ के अनुषंगी छात्र संगठन एबीवीपी ने जो कुछ भी किया वह देशभक्ति नहीं बल्कि जग हँसाई ही है। एबीवीपी के इन दक्षिणपंथी छात्रों को और स्मृति जैसे मंत्रियों को शायद मालूम नहीं था कि जेएनयू में कोई अराजकता का जमघट नहीं है, बल्कि जेएनयू तो विचारों का पनघट है। ABVP समेत देश भर के विश्व विद्यालयों में तथाकथित हिन्दुत्वववादी बहुत आक्रामक तरीके से राष्ट्रवाद की नेतागिरी कर रहे हैं।