ये मेरा भ्रष्टपन , ये तेरा भ्रष्टपन
ये मेरा भ्रष्टपन , ये तेरा भ्रष्टपन
मन बड़ा खट्टा खट्टा दही हो गया है । यह भी कह सकते हैं कि ऐसा दूध हो गया है जिसमें नहीं मिला है पानी । जरूरत भी नहीं कि अब दूध में मिलाया जाए पानी । दही को मीठा करने के लिए मिलाया जाए गुड़ । सब गुड़ घोल मट्ठा है । सब कुछ मीठा है , इसलिए नहीं कुछ खट्टा है ।
अखबार पढ़ो तो सिर्फ खबर भ्रष्टा की है । आप पूछ सकते हैं कि यह भ्रष्टा क्या है । तो बता दें कि अमेरिकी शैली में जैसे प्रसिडेंट प्रेज हो कर रह जाता है , वैसे ही भ्रष्टाचार भ्रष्टा हो गया है । आचार तो इस भ्रष्टा की कार्यशैली है ।
यानी जब आपके आचार विचार में भ्रष्टाचार हो तो कहा जाएगा कि यह तो बड़ा भ्रष्टा भ्रष्टा है । इस भ्रष्टा – भ्रष्टा से बहुत दुखी हैं वे लोग जिन्हें अब तक तमगा नहीं मिला है । कुछ लोग तो मेरे पास आए कि चलिए जनता के दरबार में मंत्री लोग तो आने ही लगे हैं ।
अब मुख्य मंत्री निर्वहन कुमार भी जनता के दरबार में 20 दिसंबर को पधार रहे हैं । निर्वहन कुमार वादों को निभा रहे हैं । सिर्फ भ्रष्टा भ्रष्टा को ठेंगा दिखा रहे हैं । यह बात बहुत गलत है । हम ईमानदारों की सुनते नहीं । सिर्फ भ्रष्टा भ्रष्टा करते हैं ।
चल कर मुख्य मंत्री के सामने हम भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करें । उन्हें समझाएं , वो न समझेंगे तो हम गाएंगे गाना – भ्रष्टा ना माने रे , भ्रष्टा ना माने रे । यह भी गाया जा सकता है कि जब भ्रष्टाचार किया तो डरना क्या , भ्रष्टाचार किया है – कोई चोरी तो नहीं की …
अब यह निर्वहन कुमार हमको डरा रहे हैं भ्रष्टाचार से । देश तो डर नहीं रहा भ्रष्टाचार से । देश तो डरा है टेप से । भ्रष्टाचार मिटाने वाला डरा है टेप से । टेप के बाद और टेप के पहले जो सबको पता था ,अब उसका हिसाब किताब बता रहा है ।
हम तो बस गाए जा रहे हैं कि ये तेरा भ्रष्टपन , ये मेरा भ्रष्टपन – कहां ले जाएगा हमको हमारा भ्रष्टपन । सबको इस भ्रष्टपन से बचाना है । नया नियम बनाना है । इसमें भी सेवा कर लगाना है । टीडीएस भी कटेगा । कोई एक ही नहीं सब भ्रष्ट कहलाएंगे ।
भ्रष्टा का समाजवाद लाएंगे । पहले आओ , पहले पाओ – बड़ा पुराना तरीका है । देर से आओ , तुरत पाओ – यह नया तरीका होना चाहिए । आय से ज्याद संप्पति पर पुरस्कार मिलेगा । ईमानदार को तिरष्कार मिलेगा ।


