शशि थरूर चुप हैं इन दिनों। उनके ट्वीट भी नज़र न आये। ललित मोदी कांड के सामने आने के बाद का असर है यह !

दरअसल ललित मोदी हों, सहारा श्री हों, श्रद्धा चिटफ़ंड हों, तेलगी हों, रेड्डी ब्रदर्स हों या अडानी/अंबानी हों, जब भी किसी के अन्त: वस्त्र उघड़ेंगे तो पूरा राजनैतिक कैनवास उसमें लिथड़ा मिलेगा, मिलता है।

यही " काला धन " हैं और ये बीजेपी कांग्रेस सपा गपा टपा सबमें विराजित हैं।

ललित मोदी कांड से बौखलाए भाजपा/संघ परिवार अपने सारे हरबा हथियार लेकर मैदान में उतर पड़े हैं। दिल्ली को केजरीवाल के हाथ 67-3 से हारने के बाद का यह दूसरा सबसे बड़ा सदमा इस गिरोह को लगा है।

इसका काउंटर करने के लिये केजरीवाल के 21 विधायकों वाला प्रकरण दिल्ली पुलिस से लीक करवाया गया। बाघेला/भुजबल पर छापे डाले गये और राहुल गांधी को सोशल मीडिया पर दशकों पुराने एक कोलंबियन लड़की के साथ बैठे चित्र के साथ चटपटा तड़का देकर "बदनाम लहर" चलाने की नाकाम कोशिश की गई।

पर हालत वसई विरार (महाराष्ट्र ) के म्यूनिसिपल कारपोरेशन के नतीजों में दिखी जिसे मीडिया ने ब्लैक आउट कर दिया। यहाँ की क़रीब 115-116 सीटों में बीजेपी को कुल एक सीट मिली है, शिवसेना को पांच और एक क्षेत्रीय दल बहुजन विकास अघाडी को 106।

तो मोदी मैजिक दिल्ली की सड़कों पर कूड़े के साथ बजबजा रहा है। बिहार चुनाव सिर पर है और तीसरे मोदी (सुशील मोदी) की बीबी की जाली डिग्री की ख़बर अख़बारों और सोशल मीडिया में !

मोदी मोदी मोदी तो फिर होगा पर ये नरेन्द्र मोदी नहीं ललित मोदी होगा।

शीतल पी सिंह

शीतल पी. सिंह, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, उनकी फेसबुक टाइमलाइन से साभार