राजनीतिक शालीनता अखिलेश का गुण और स्वभाव है और ताकत भी
राजनीतिक शालीनता अखिलेश का गुण और स्वभाव है और ताकत भी
अखिलेश यादव की बढ़ती राष्ट्रीय स्वीकार्यता और
लोकप्रियता से घबड़ा गये हैं राजनीतिक दल
डॉ इमरान इदरीस
जिस तरह से आज से डेढ़ साल पहले समाजवादी सरकार बहुमत में आयी उसमें सबने एक इतिहास देखा। एक ऐसा प्रदेश अध्यक्ष जिसने प्रदेश के जिले-जिले और गाँव-गाँव को देखा और समझा। गाँव का एक किसान, मजदूर और सबसे पिछड़ा व्यक्ति भी चमकती हुयी आँखों से अखिलेश यादव को देख रहा था। उनकी बातों में वो सत्यता है जिसको कोई नकार नहीं सकता। प्रदेश के युवा और किशोर के अखिलेश भैया आगे चले और सब उनके पीछे।
बहुमत आया और ये सौभाग्य था कि वो मुख्यमंत्री बने। प्रदेश के हालात को देखते हुये जो वादे अखिलेश जी ने किये उसको तुरन्त पूरा करने के अथक प्रयास उन्होंने किये। गाँव- गाँव के बच्चों के हाथ में शहर के बच्चो की तरह लैपटॉप दिया, बेरोजगारों को भत्ता दिया, मुफ्त पढ़ाई, मुफ्त दवाई, मुफ्त सिंचाई, स्वास्थ्य में उत्तर प्रदेश आगे गया, बेहतर सड़क, मेट्रो का प्लान, स्टेडियम, बड़े अस्पताल, बिजली के लिये नए सिरे से बेहतर उपकरण, आई टी नीति और पार्क। .. और लगातार प्रयास किये कि किसी तरह उत्तर प्रदेश में निवेश हो, जनता को रोज़गार मिले।
देश में ऐसा लगातार हो रहा है कि विकासोन्मुखी सरकारों को जनता बहुमत दे रही है। ऐसे में सबसे बड़े और राजनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश के युवा विकासोन्मुखी मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव कहीं उत्तर प्रदेश में जम न जायें और लम्बे समय तक उत्तर प्रदेश में खोयी हुयी जमीन, युवा मुख्यमंत्री के कारण और दूर न चली जाये, देश के प्रमुख राष्ट्रीय दल ये प्रमुख चिंता है।
प्रदेश की राजनीति में ऐसे पहल तो कभी न हुयी थी। जब विपक्षी दलों ने ये देखा कि उत्तर प्रदेश को विकास की धारा पर अखिलेश ले जा रहे हैं तो नफरत की सियासत करने वाली भाजपा, सिर्फ अपनी हेकड़ी और एक जाति विशेष की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल बसपा और लोक दल और घोटालेबाज दल ने समझ लिया कि उनका मकसद अब पूरा होने से रहा, अब अखिलेश यादव को घेरो।
ऐसे में एक ही रास्ता था कि कैसे प्रदेश के आम जन के बीच में सांप्रदायिक भावना भड़काई जाये और समाजवादी सरकार को इसका उत्तरदायी ठहराया जाये। इसी कारण प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा जाता रहा। इतनी नाजुक स्थिति के बावजूद रालोद, भाजपा, किसान यूनियन, बसपा और कांग्रेस के नेताओं द्वारा बुलाई खाप पंचायत होती है।
मुख्यमंत्री बधाई के पात्र हैं कि विपक्षियों का इतना सुनियोजित षड्यंत्र होने के बावजूद भी इस पर काबू किया वरना विपक्षी दल तो अपने राजनीतिक लाभ के लिये प्रदेश को किसी भी स्थिति में ले जा सकते हैं।
राजनीति में व्यक्तिगत विरोध नहीं बल्कि वैचारिक विरोध होते है। विपक्षी दलों को समझ लेना चाहिए कि अखिलेश समाजवादी पृष्ठभूमि से ओत-प्रोत प्रखर लोहियावादी नेता हैं। उठकर कैसे आगे बढ़ना है अखिलेश समझते हैं। 1996 से राजनीति में आये अखिलेश इस द्वंद्व और अप्रत्यक्ष राजनीति को अच्छी तरह से जानते हैं। राजनीतिक शालीनता अखिलेश का गुण और स्वभाव है,.पर विपक्षी दल याद रखें कि यही उनकी शक्ति भी है। बहुत जल्दी ये विपक्षी दल भी समझ जायेंगे


