राष्ट्रपाट बनाम राजपाट
राष्ट्रपाट बनाम राजपाट
देश की सबसे बड़ी पार्टी को किसी प्रकार के अधिवेशन की आवश्यकता नहीं है । लेकिन कांग्रेस पार्टी है कि मानती नहीं । रह रह कर इसे दिखाना होता है कि पार्टी में लोकतंत्र है । पार्टी के लोग जानते हैं कि पार्टी का राष्ट्र कहां होता है । जहां राष्ट्र होता है , वहीं राष्ट्रीय होता है । जैसे अगर आप दिल्ली में हों तो हमेशा राष्ट्रीय होंगे । यह अच्छा है कि कांग्रेस पार्टी का राष्ट्र दिल्ली में है । यह राष्ट्र ठेठ भारतीय है । पहले नहीं था । पर जब से दिल्ली की केंद्रीय सरकार मिली जुली पार्टियों की होने लगी है तब से यह भारत से इंडिया भी हो गया । एक दम अतुल्य भी हो गया है । विविधता में अनेकता भी है और अनेकता में एकता भी है कि हम एक साथ सत्यनिष्ठा और ईश्वर की शपथ के साथ संपूर्ण ईमानदारी से भ्रष्टाचार का निर्वहन करते हैं । और उसके उपचार का प्रयास भी करते हैं ।
प्रयास अत्यंत ही आध्यात्मिक और औपचारिक मनमर्जी है । हमारा प्रयास संयुक्त संसदीय समिति है । हमारा प्रयास लोकलेखा समिति है । हमारा प्रयास बाबा रामदेव का योग है । हमारा प्रयास ऋषि भ्रष्टानंद का योग है । यही कारण है कि कुछ लोग मानते हैं कि देश के हर मर्ज का इलाज अब संयुक्त संसदीय समिति है ।
यह और बात है कि देश में कोई रोग ही नहीं है । इतना रोग मुक्त तो देश कभी हुआ ही नहीं था । अचानक लोगों को लगने लगा कि इतना रोग मुक्त होना भी ठीक नहीं । लोग देश के बारे में कहने लगे कि आपकी सेहत बेहतर दिख रही है । प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का राष्ट्रपाट आया तो भी लोगों ने यही कहा कि देश की सेहत पहले से अच्छी हो गई है । यह भी एक ख्याल है जिसे रिमिक्स के जमाने में लोगों ने ठुमरी समझ लिया था । यह भी बहस या वही – वही शैली में शोध का विषय हो सकता है कि मनमोहन सिंह के पास राष्ट्रपाट है तो राजपाट किसके पास है । हम इंडियन शुचिता में बड़ा विश्वास रखते हैं । जान कर भी नहीं कहते कि राजपाट किसका है । बेचारे प्रधानमंत्री को सारा राष्ट्रपाट झेलना पड़ता है ।
राष्ट्रपाट से ही मिलता जुलता शब्द है राष्ट्रपाद । यह करीब करीब वैसा ही होता है जैसा भारतीय संविधान के वोट पुत्र संसद में होता है । वहां एक लोकलेखा समिति भी होती है । यह समिति उन आलोचकों की तरह होती है जो बिना पुस्तक पढ़े प्रस्तावना के आधार पर आलोचना लिख मारते हैं । और आप यह तो जानते ही हैं कि आलोचना कुछ नहीं कीचड़ में लोटना या लौटाना होता है । कीचड़ को महिमामंडित करना हो तो कह डालो कि कीचड़ में ही कमल खिलता है । इंडिया में जो सत्ता में होता है , वह गेंदा का फुल होता है , हर गले में लटका होता है । जो सत्ता में नहीं होता , वह अंग्रेजी का फूल होता है ।


