सासन बिजली परियोजना से उ0प्र0 व अन्य राज्यों को पूरी बिजली दिलाने हेतु केन्द्र सरकार से कार्यवाही की अपील
लखनऊ। सम्पूर्ण उत्तरी भारत में चल रहे गम्भीर बिजली संकट के दौर में रिलायन्स की मध्य प्रदेश स्थित सासन बिजली परियोजना से उ प्र सहित सात राज्यों को पूरी बिजली न मिल पाने पर आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन ने केन्द्रीय विद्युत मंत्री पीयूष गोयल को पत्र भेजकर प्रभावी कार्यवाही करने की मांग की है जिससे प्रदेश को सस्ती व पूरी बिजली मिल सके। कम बिजली मिलने के कारण बाजार से मंहगी बिजली खरीदने के चलते उ प्र को अब तक 101 करोड़ रूपये से अधिक की क्षति हो चुकी है जिसकी भरपाई हेतु फेडरेशन ने रिलायन्स पर दण्ड लगाने की भी मांग की है।
ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, उ प्र रा वि प अभियन्ता संघ के अध्यक्ष आर के सिंह व महासचिव डी सी दीक्षित ने आज यहाँ बताया कि सासन अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट की 660-660 मेगावाट क्षमता की तीन इकाइयाँ संचालित हैं जिसमें उ प्र का 309 मेगावाट का हिस्सा है जब कि यहाँ से सामान्यतया 100 मेगावाट बिजली भी नहीं मिल रही है। अगस्त’ 2013 से सासन बिजली घर चलने के बाद उ प्र को अपने हिस्से से अब तक 204 मिलियन यूनिट कम बिजली मिली है। ध्यान रहे कि सासन से मिलने वाली बिजली का मूल्य रू 1.10 प्रति यूनिट है जब कि उ प्र को रिलायन्स के रोजा बिजली घर से रू 6.06 प्रति यूनिट पर खरीदनी पड़ती है। इस प्रकार 204 मि यू बिजली के लिए रू 4.96 प्रति यूनिट अधिक देने से उ प्र को 31 मई 2014 तक लगभग 101 करोड़ रूपये से अधिक की क्षति हो चुकी है। सासन से उत्पादित बिजली में उ प्र का 12.5 प्रतिशत का हिस्सा है जबकि म प्र का 37.5 प्रतिशत, पंजाब का 15 प्रतिशत, दिल्ली का 11.25 प्रतिशत राजस्थान का 10 प्रतिशत और उत्तराखण्ड का 17.2 प्रतिशत शेयर है।
केन्द्रीय विद्युत मंत्री को प्रेषित पत्र में आंकड़े देकर लिखा गया है कि वर्ष 2013-14 में सासन का प्लान्ट अवेलिबिलिटी फैक्टर 58.97 प्रतिशत रहा जबकि गुजरात में टाटा के मूंदड़ा अल्ट्रा मेगा पावर प्लान्ट का अवेलिबिलिटी फैक्टर 80.34 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार कोयला खदान के मुहाने पर स्थापित एन टी पी सी के बिजली घरों का वर्ष 2013-14 का पी एल एफ रिहन्द का 83.80 प्रतिशत, सिंगरौली का 91.65 प्रतिशत, कोरबा का 90.68 प्रतिशत, विन्ध्याचल का 86.93 प्रतिशत और रामगुन्डम का 86.70 प्रतिशत रहा। इससे स्पष्ट है कि रिलायन्स जानबूझकर सासन प्लान्ट को आधी क्षमता पर चला रहा है जिससे उ प्र सहित सात राज्यों को बिजली संकट के साथ आर्थिक क्षति भी हो रही है।
फेडरेशन का आरोप है कि चूँकि बिजली क्रय करार के अनुसार सासन से मिलने वाली बिजली का मूल्य मात्र रू0 1.10 प्रति यूनिट है अतः सस्ती बिजली देने से बचने के लिए कम्पनी सासन प्लान्ट को पूरी क्षमता पर नहीं चला रही है और विद्युत मंत्रालय में सांठ-गांठ कर बिडिंग टैरिफ में वृद्धि का इन्तजार कर रही है।
फेडरेशन ने केन्द्रीय विद्युत मंत्री से माँग की है कि वे केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण व अन्य सम्बन्धित अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही का निर्देश दे जिससे समस्या का समाधान हो सके। अभियन्ता पदाधिकारियों ने उ प्र के मुख्यमंत्री से भी अपील की है कि वे बिजली संकट के गम्भीर दौर में केन्द्र के साथ इस मामले को तत्काल से उठायें और कम बिजली मिलने पर रिलायन्स से क्षति की भरपाई हेतु कहा जाये।