Forum for the Release of Innocent Muslims imprisoned in the name of Terrorism
प्रति, दिनाँक- 15 जून 2013
मुख्यमन्त्री,
उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ।
आपको ज्ञातव्य हो कि आपको दिनाँक 22 मई 2013 को ज्ञापन के माध्यम से एक माँग पत्र सौंपा गया था, लेकिन हमारी माँगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसलिये हम लोगों को अपनी माँग के समर्थन में आयोजित धरने को अनिश्चित कालीन धरने एवं क्रमिक उपवास में तब्दील करना पड़ा। आपके द्वारा नियुक्त जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की माँग पर हम पुनः अनिश्चित कालीन धरने के पच्चीसवें दिवस पर यह ज्ञापन प्रेषित करते हुये निम्नलिखित माँग करते हैं कि-
1- खालिद मुजाहिद के चचा जहीर आलम फलाही द्वारा दर्ज करायी गयी एफआईआर में नामजद विक्रम सिंह, बृजलाल, मनोज कुमार झा, चिरंजीवनाथ सिन्हा, एस आनंद एवं अन्य पुलिस अधिकारियों को जो 22 दिसम्बर 2007 को खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी की फर्जी गिरफ्तारी के साजिशकर्ता हैं और दिनाँक 19 मई 2013 को खालिद को ले जा रहे पुलिस स्कॉर्ट को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट किया जाय तथा आईबी समेत सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करके कानूनी कार्यवाई शुरू की जाय।
2- मौलाना खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी को निर्दोष साबित करने वाली आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को एक्शन टेकन रिपोर्ट के साथ तत्काल विधानसभा पटल पर रखते हुये राष्ट्र की सुरक्षा के मद्देनजर सुनिश्चित किया जाय कि दोषी पुलिस एवं आईबी अधिकारियों को तत्काल टर्मिनेट करते हुये गिरफ्तार किया जाय। इस पूरे प्रकरण की पुनर्विवेचना जाँच सुनिश्चित की जाय।
3- आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट के हवाले से यह साफ हो गया है कि मरहूम मौलाना खालिद मुजाहिद और लखनऊ जेल में बन्द हकीम तारिक कासमी की गिरफ्तारी संदिग्ध है तो उनकी गिरफ्तारी के समय विस्फोटक सामग्री की बरामदगी का दावा जो यूपी एसटीएफ द्वारा किया गया वह कहाँ से आया, इसके लिये जिम्मेदारों की दोष सिद्धि के लिये उच्च स्तरीय जाँच करायी जाय।
4- मौलाना खालिद मुजाहिद की हत्या इस बात की पुष्टि करती है कि सरकारी जाँच एजेन्सियों एसटीएफ-एटीएस और आतंकी संगठनों में गठजोड़ है जो खालिद मुजाहिद की रिहाई को लेकर भयभीत थे जिसके चलते मौलाना खालिद की हत्या कर दी गयी ऐसे में कचहरी धमाकों (वाराणसी, फैजाबाद, लखनऊ), गोरखपुर, रामपुर सीआरपीएफ कैम्प काण्ड, संकटमोचन-कैन्ट वाराणसी, दश्वाश्वमेध घाट, साबरमती और श्रमजीवी एक्सप्रेस, समेत यूपी में हुयी समस्त कथित आतंकी घटनाओं का पुनर्विवेचना करायी जाय। जिससे खुफिया एजेंसियों, एटीएस और आतंकी संगठनों का गठजोड़ सामने आ सके।
5- सन 2000 के बाद से घटित उन सभी कथित आतंकी घटनाओं और तथाकथित आंतकवादियों की विस्फोटक पदार्थों और असलहों सहित पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये मामलों की पुनर्विवेचना करायी जाय जिनमें पुलिस द्वारा बरामदगी की गवाही दी गयी है, और उनमें निष्पक्ष स्वतन्त्र गवाह नहीं है। क्योंकि निमेष कमीशन रिपोर्ट से साबित हो गया है कि पुलिस द्वारा फर्जी गिरफ्तारी और विस्फोटक पदार्थों की बरामदगी फर्जी बनायी जाती रही है।
6- सपा सरकार अपने चुनावी वादे के मुताबिक आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों से सम्बंधित मामलों की पुनर्विवेचना कराकर उन्हें तुरन्त रिहा करे।
7- कथित आतंकवाद के नाम पर जेलों में कैद अन्य मुस्लिम युवकों की सुरक्षा की गारन्टी देते हुये सुरक्षा सुनिश्चित की जाय।
8- मौलाना खालिद से सम्बंधित की फर्जी गिरफ्तारी मु0अ0 संख्या 1891/2007 कोतवाली बाराबंकी और हत्या से संबंधित मु0अ0संख्या 295/2013 कोतवाली बाराबंकी के संबन्ध में सीबीआई जाँच आज तक शुरु नहीं की गयी, जिसकी वजह से सबूतों के साथ छेड़-छाड़ शुरु हो गयी है। शासन एवम् प्रशासन के स्तर पर जनसंचार साधनों के माध्यम से मीडिया ट्रायल करके जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। न्यायहित में यह आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश सरकार सीबीआई को समस्त तथ्यों को प्रेषित करते हुये तत्काल सीबीआई जाँच कराने की जवाबदेही सुनिश्चित करे।
9- गृह सचिव, बाराबंकी जिलाधिकारी और सरकारी वकील द्वारा बाराबंकी न्यायालय में मौलाना खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी पर से मुकदमा वापसी की प्रक्रिया में जानबूझकर की गयी आपराधिक साजिश जिसकी वजह से रिहाई संभव नहीं हो पायी और मौलाना खालिद की बाराबंकी में हत्या भी हो गयी। ऐसे में इन सभी शासन व प्रशासन के अधिकारियों को जाँच के दायरे में लाया जाये और सरकार की तरफ से तत्काल कार्यवाई का किया जाना सुनिश्चित हो।
10- मौलाना खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी की 22 दिसंबर 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन से की गयी फर्जी गिरफ्तारी और 18 मई 2013 को मौलाना खालिद की बाराबंकी में की गयी हत्या से यह स्पष्ट होता है कि इस हत्या के तार बाराबंकी से गहरी तौर पर जुड़े हैं। ऐसे में दिसंबर 2007 और मई 2013 के दौरान बाराबंकी के पूरे प्रशासनिक अमले को जाँच के दायरे में लाया जाये।
11- 12 दिसंबर 2007 को आजमगढ़ से मौलाना तारिक कासमी और 16 दिसंबर 2007 को मौलाना खालिद मुजाहिद को मडि़याहूँ से अपहरण करने के बाद उच्च पुलिस अधिकारी अमिताभ यश, एसटीएफ के अधिकारियों समेत अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा जिस तरीके से अमानवीय बर्बर उत्पीड़न किया गया और जिसके बारे में मौलाना खालिद ने शिकायत भी की थी, जिस पर अब तक कोई कार्यवाई नहीं हुयी, ऐसे में इन दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाई की जाये।
12- मौलाना खालिद मुजाहिद को लगातार जेल और पेशी के दौरान जिस तरीके से एसटीएफ-एटीएस के इशारे पर स्कॉर्ट द्वारा उत्पीड़ित किया जाता था और हत्या करने की धमकी दी जाती थी, और जिसकी शिकायत भी उनके वकीलों द्वारा लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के न्यायाधीशों को शिकायती पत्रों द्वारा अवगत कराया जाता था, पर इसके बावजूद कोर्ट ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया और ना ही कोई कार्रवाई इन दोषी पुलिस वालों पर हुयी, ऐसे में इन दोषी पुलिस अधिकारियों समेत लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के जिन न्यायाधीशों ने दोषियों को बचाया उनको भी जाँच के दायरे में लाते हुये कार्यवाई की जाये।
13- खालिद की हत्या के बाद जिन पुलिस अधिकारियों ने तारिक कासमी से बाराबंकी कोतवाली में दबाव देकर झूठा बयान दिलवाया कि खालिद की तबीयत पहले से खराब थी (जिसको कि जेल प्रशासन और खालिद के वकील मो शुऐब ने इंकार किया है) उन सभी अधिकारियों को जांच के दायरे में लाते हुये कार्यवाई की जाये।
14- उत्तर प्रदेश के जितने युवक कथित आतंकवाद के नाम पर दूसरे राज्यों में बन्द हैं उनके सुरक्षा व रिहाई की गारंटी उत्तर प्रदेश सरकार सुनिश्चित कराए।
द्वारा जारी- मो0 शुएब, मो0 सुलेमान, संदीप पाण्डे, शाहनवाज आलम, राजीव यादव, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, तारिक शफीक, मसीहुदीन संजरी, लक्ष्मण प्रसाद, मो0 सलीम, ताहिरा हसन, अजय सिंह, योगेन्द्र यादव, आफताब अहमद खान, सैयद मोईद अहमद, मो0 आफाक, साकिब, प्रबुद्ध, हरे राम मिश्रा, सादिक, इशहाक, मो0 समी, अनिल आजमी, मो0 आरिफ।
सम्पर्क- 09415012666, 09415254919, 09452800752