रूस सीरिया में लड़ाकू विमान एसयू-35एस को परख रहा
रूस सीरिया में लड़ाकू विमान एसयू-35एस को परख रहा
रूसी सैन्य मुख्यालय के संचालकों ने तय किया है कि नवीनतम लड़ाकू विमान एसयू-35एस को सीरिया में युद्ध की स्थितियों में परख कर देखा जाए। यह चार लड़ाकू विमान पिछले वर्ष ही अक्तूबर-नवम्बर में रूस के ’कम्सामोल्स्क ना अमूर’ विमान कारख़ाने से रूसी वायु व अन्तरिक्ष सेना को मिले हैं।
रूस-भारत संवाद की एक खबर के मुताबिक रूस के रक्षा मन्त्रालय के प्रवक्ता मेजर-जनरल ईगर कनाशिन्कफ़ ने बताया कि इन चारों एसयू-35एस लड़ाकू विमानों को पिछले हफ़्ते ही सीरिया स्थित वायुसैनिक अड्डे ह्मेयमिम पर तैनात कर दिया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि आजकल सभी रूसी विमान जब कार्रवाई करने के लिए उड़ान भरते हैं तो रूसी लड़ाकू विमान और एस-400 सहित आधुनिकतम रूसी वायु सुरक्षा प्रणालियाँ उनकी सुरक्षा करती हैं।
नवीनतम लड़ाकू विमानों एसयू-35एस को सीरिया भेजने का निर्णय रूस ने क्यों लिया?
रूस-भारत संवाद की खबर के मुताबिक वर्ष 2015 के अन्त में रूस और चीन के बीच एक अनुबन्ध हुआ है, जिसके अनुसार रूस चीन को 24 एसयू-35एस नवीनतम लड़ाकू विमानों का निर्यात करेगा। यह अनुबन्ध क़रीब 2 अरब डॉलर का है। अनुबन्ध के अनुसार एक विमान की क़ीमत 8 करोड़ 30 लाख डॉलर होगी।
रूस-भारत संवाद ने इस सिलसिले में रूस के रक्षा-उद्योग के एक सूत्र के हवाले से अपनी खबर में बताया है बताया कि एसयू-35 एस विमानों की चीन को सप्लाई करने से पहले रूस के रक्षा मन्त्रालय और रूसी हथियार निर्यात संगठन ’रोस-अबारोन-एक्सपोर्त’ के लिए यह जाँचना ज़रूरी है कि वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों में ये विमान किस तरह से काम करते हैं। किसी भी रक्षा-अनुबन्ध में यह बात ज़रूर शामिल होती है।
सूत्र ने रूस-भारत संवाद को बताया कि हाल ही में अमरीकी वायुसेना के लड़ाकू विमान एफ़-22 ’रेप्टर’ ने इटली स्थित वायुसैनिक अड्डे से इराक और सीरिया के लिए ऐसी ही उड़ानें भरी थीं ताकि ख़रीददार को यह दिखाया जा सके कि युद्ध की परिस्थितियों में विमान कैसे काम करता है और उसमें क्या-क्या खूबियाँ हैं।
सीरिया में रूसी वायुसैनिक दस्ते की कार्रवाइयों को देखकर रूसी लड़ाकू विमान ख़रीदने की इच्छा रखने वाले विदेशी ख़रीददारों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ गई है और वे एसयू-24, एसयू-25एम जैसे पुराने मॉडलों के साथ-साथ नवीनतम बमवर्षक विमान एसयू-34 में भी गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। रूस-भारत संवाद को सूत्र ने बताया कि आजकल अरबी मीडिया में इस बात पर चर्चा हो रही है कि अरब प्रायद्वीप का एक देश और उत्तरी अफ़्रीका का एक अन्य देश एसयू-34 विमान ख़रीदने पर विचार कर रहे हैं।
रूस-भारत संवाद ने सूत्र के हवाले से बतायाहै कि सीरिया में एसयू-35एस की सैन्य-कार्रवाइयाँ विश्व बाज़ार में इस विमान की बिक्री की सम्भावनाओं को बहुत बढ़ा देंगी।
नवम्बर-2015 में इण्डोनेशिया ने भी नवीनतम रूसी लड़ाकू विमान ख़रीदने का निर्णय ले लिया है। आजकल ’रोस-अबारोन-एक्सपोर्त’ और सँयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों के बीच भी एसयू-35एस विमान की ख़रीद के बारे में बातचीत चल रही है।
इन दिनों रूस और भारत मिलकर पाँचवी पीढ़ी के आधुनिकतन लड़ाकू विमान का डिजाइन तैयार कर रहे हैं। यह विमान एसयू-35 से भी कहीं अधिक अच्छा होगा।
तुर्की की तरफ़ से बढ़ गया है युद्ध का ख़तरा
खबरों के मुताबिक हाल ही में तुर्की की वायुसेना को पूरी तरह से सावधान और सतर्क कर दिया गया है और उसे युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है। इसका कारण यह बताया गया है कि रूसी वायुसेना के एसयू-34 विमान लगातार तुर्की की वायुसीमा का उल्लंघन कर रहे हैं। हालाँकि मास्को ने इन खबरों का खण्डन किया है कि रूसी विमान ने तुर्की की वायुसीमा का उल्लंघन किया है।
रूस-भारत संवाद ने सामरिक परिस्थिति केन्द्र के निदेशक इवान कनावालफ़ का बयान प्रकाशित किया है जिसमें कहा गया है - आज की राजनीतिक परिस्थितियों में इस इलाके में तैनात रूसी वायुसैनिक दस्ते को और मज़बूत बनाने के लिए भी एसयू-35 विमानों को यहाँ तैनात किया गया है। यह बहुकार्यात्मक लड़ाकू विमान है, जो दुश्मन के विमानों से आकाश में युद्ध करने के साथ-साथ ज़मीनी ठिकानों को भी नष्ट कर सकता है।
इवान कनावालफ़ ने ज़ोर दिया कि तुर्की के पायलटों के लिए ख़तरे का ’नारंगी’ स्तर इस बात का संकेत है कि वे किसी भी तरह के ख़तरे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ख़ुद कार्रवाई करने का निर्णय ले सकते हैं यानी अब तुर्की की वायुसेना का कोई भी पायलट अगर यह समझता है कि किसी रूसी विमान से तुर्की की सुरक्षा के लिए कोई ख़तरा है तो वह किसी भी रूसी विमान को मारकर गिरा सकता है।
क्या है एसयू-35एस लड़ाकू विमान
रूस-भारत संवाद की खबर के मुताबिक एसयू-35 फ़ोर प्लस प्लस पीढ़ी का बहुकार्यात्मक नवीनतम रूसी लड़ाकू विमान है, जो टी-10एस के आधार पर बनाया गया। टी-10एस के आधार पर ही एसयू-27 और एसयू-30 जैसे लड़ाकू विमान और उनके आधुनिकीकृत रूप भी तैयार किए गए हैं। यह एसयू-27 की वायुगतिकी और पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के रेडियो-इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से लैस एक ऐसा विमान है, जो नई अवधारणा पर आधारित है। रूस की वायु-अन्तरिक्ष सेना को नए हथियारों से लैस करने के राजकीय कार्यक्रम के अन्तर्गत सन् 2020 तक वायुसेना को 96 एसयू-35एस विमानों से लैस किया जाएगा।


