मोहनलालगंज का चर्चित बलात्कार कांड
संजय शर्मा
लखनऊ। मोहनलालगंज हत्याकाण्ड के खुलासे को लेकर एक बार फिर लखनऊ पुलिस की किरकिरी हो रही है। पुलिस ने जिस तरह से इस चर्चित हत्याकाण्ड का आनन-फानन में खुलासा किया और अपनी कुछ दिनों की जांच पड़ताल में कई बार अपनी थ्यौरी बदली उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हत्याकाण्ड से उपजे कई सवालों के जवाब खुद पुलिस के बड़े अफसरों के पास नहीं हैं। यहां तक कि इस हत्याकाण्ड के खुलासे के लिए बुलाई गयी प्रेस कांफ्रेंस में भी पुलिस के अफसर मीडिया के गंभीर सवालों का जवाब देने से बचते रहे या फिर घुमाफिरा कर जवाब दिया। जिस घटना को पुलिस के शीर्ष अफसर शुरू से ही गैंगरेप की घटना मान रहे थे औैर इसमें कम से कम पांच से छह लोगों के शामिल होने का दावा कर रहे थे वही पुलिस अधिकारी अब गैंगरेप तो क्या इसे रेप भी नहीं मान रहे हैं और इस घटना के लिए एक मात्र गार्ड को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पुलिस का सारा जोर इसी बात पर रहा कि किसी भी तरह इस पूरे घटनाक्रम को पकड़े गए गार्ड राम सेवक तक सीमित कर दिया जाए।
लेकिन पुलिस की तकरीबन दो दिन चली विवेचना के बाद जिस तरह से इस हत्याकाण्ड का खुलासा किया गया वह किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। पुलिस अधिकारियों के मीडिया में पहले दिन से दिए जाने वाले बयान और खुलासे के दिन तक दिए जाने वाले बयानों की तुलना करें तो वो परस्पर विरोधाभासी साबित हो रहे हैं। इस केस की कई ऐसी अहम कड़ियां हैं जिनको या तो पुलिस अभी तक जोड़ नहीं पायी है या जानबूझकर वो जोड़ना नहीं चाहती है।
एक महिला जो अपने पति की मृत्यु के बाद अपने बच्चों के साथ अलग रहकर जीवनयापन कर रही हो और पुलिस के अनुसार अपनी सुरक्षा को लेकर इतनी सतर्क रहती हो कि रात में साढ़े नौ के बाद घर के बाहर न जाती हो रात साढ़े दस बजे उसके बाद एक फोन आता है और वह जाने के लिए तैयार हो जाती है। फिर वह एक अनजान शख्स के साथ बाइक पर बैठकर चली भी जाती है और घटना स्थल पर जाने पर उसे हेलमेट उतारने पर पहचानती है। उस पर भी तुर्रा यह है कि उस हत्यारे ने जिस निर्दयता से मृतका के साथ मारपीट की उसमें उसने किसी हथियार का प्रयोग नहीं किया बल्कि बाइक की चाभी का प्रयोग किया। मृतका का मोबाइल जो उसके घर से निकलने के कुछ देर बाद ही स्विच ऑफ हो गया था उसे भी पुलिस नहीं ढूंढ पायी है। वो राजीव नाम का शख्स कौन है जो मृतका के घर आता जाता था और उसके नाम से हत्या वाले दिन कथित तौर पर राम सेवक ने मृतका से बात की थी। आखिर वो राजीव कौन है और अब इस हत्याकाण्ड के बाद कहां गायब है, क्या बिना उसको सामने लाए पुलिस का यह खुलासा किसी के गले उतर सकता है। दूसरी बात अगर महिला राजीव को नहीं जानती या पहचाती थी तो वह किसी अनजान शख्स के साथ कैसे चली गयी। इस बात का जवाब भी पुलिस अधिकारी स्पष्ट तौर पर नहीं दे पा रहे हैं। फिलहाल पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के चक्कर में खुद ही उलझ गयी है। कई और सवाल खुलासे के बाद भी उसके सामने खड़े हो गए हैं। जिससे वह कतरा कर निकलना चाहती है।
फिलहाल मोहनलालगंज हत्याकाण्ड खुलासे के बाद पुलिस की कार्रवाई पर लोगों ने उंगलियां उठानी शुरू कर दी हैं। मृतका के परिजनों समेत सभी राजनीतिक दलों ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। वहीं विभिन्न राजनीति दलों और सामाजिक संगठनों ने सड़क पर आकर अपने स्वर मुखर करने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस, भाजपा, बसपा, आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों ने अपना विरोध दर्ज कराया है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिसिया खुलासे के खिलाफ सड़क पर उतरना भारी पड़ा। पुलिस ने आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया। आप के मीडिया प्रभारी का कहना है कि इस लाठीचार्ज में उनके दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं कांग्रेस की महिला इकाई ने जोरदार प्रदर्शन किया तो मोहनलालगंज में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अपना विरोध दर्ज कराया। बसपा ने पुलिस के साथ-साथ सरकार पर भी निशाना साधा है।
इस हत्याकाण्ड के बाद एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और उसकी निष्ठा संदेह के दायरे में आ गयी है। यूं भी कानून व्यवस्था के हालातों को देखते हुए पहले भी पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान लग चुके हैं। लेकिन मोहनलालगंज हत्याकाण्ड के खुलासे ने एक बार फिर प्रदेश की आवाम को झकझोर दिया है। पुलिस के खुलासे की थ्योरी आम आदमी के गले भी नहीं उतर रही है। फिलहाल इस हत्याकाण्ड को अब राजनीतिक रंग देने का प्रयास भी तेज हो गया है। जिसके परिणाम आने वाले दिनों में सामने आयेंगे।

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संजय शर्मा, वीक एंड टाइम्स के सम्पादक हैं