रोचक है सिक्किम में चुनावी समीकरण
रोचक है सिक्किम में चुनावी समीकरण
रीता तिवारी
गंगटोक। हिमालय की गोद में बसे खूबसूरत पर्वतीय राज्य सिक्किम में लोग लोकसभा चुनावों का जिक्र ही नहीं करते। यहां सबकी चर्चा के केंद्र में 32 सदस्यीय विधानसभा का चुनाव है। राज्य में लोकसभा की इकलौती सीट है। आधुनिक सिक्किम का पर्याय बन चुके मुख्यमंत्री पवन चामलिंग की अगुवाई वाली सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) सरकार वर्ष 1994 से ही राज्य की सत्ता पर काबिज है। सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहने का ज्योति बसु का रिकार्ड चामलिंग ही तोड़ सकते हैं। सिक्किम में लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी हो रहे हैं। यहां मतदान 12 अप्रैल को होगा।
एसडीएफ ने पिछले विधानसभा चुनावों में तो राज्य की सभी 32 सीटें जीत कर रिकार्ड ही बना दिया था। चामलिंग का दावा है कि वे वर्ष 2017 तक राज्य से गरीबी का सफाया कर देंगे। राज्य की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है।
चामलिंग सरकार में मंत्री रहे पी.ए.गोले भी इस बार सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) नामक नई पार्टी बना कर मैदान में हैं। लेकिन उसके पास अपनी कोई ठोस नीति नहीं है। स्थानीय पत्रकार पेमा वांग्चुक कहते हैं, ‘राज्य के विकास के लिए मोर्चा के पास कोई ठोस नीति नहीं है। वे महज प्रतिष्ठान-विरोधी वोटों की उम्मीद में मैदान में है।‘ लेकिन अब राज्य में चामलिंग के विरोधी भी कम नहीं है। सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक कर्माचारी टी. लामा कहते हैं, ‘चामलिंग भी अब नर बहादुर भंडारी की तरह तानाशाह हो गए हैं। उनसे अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं होती। अबकी अपनी यह आदत उनको महंगी पड़ सकती है।‘
राज्य में तिस्ता नदी पर बन रहे बांध अबकी चुनावी मुद्दा हैं। लेप्चा और कई दूसरी जनजातियां इन परियोजनाओं के किलाफ लंबे अरसे से आंदोलन कर रही हैं। राज्य में प्रचार इतना धीमा है कि बाहर से आने वाले सैलानियों को लगता ही नहीं राज्य में लोकसभा व विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। कोई भी पार्टी यहां बड़ी चुनावी रैलियां नहीं करतीं। आबादी का घनत्व कम होने की वजह से राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए गांव-गांव और घऱ-घर जाकर प्रचार करना ही सुविधाजनक है। राज्य में कुल वोटरों की तादाद महज 3.70 लाख है। एसडीएफ और एसकेएम और कांग्रेस ने सभी 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा यहां 13 सीटों पर लड़ रही है और तृणमूल कांग्रेस सात पर।
यहां लोकसभा की इकलौती सीट के लिए एसडीएफ के निवर्तमान सांसद प्रेम दास राई के अलावा एसकेएम, कांग्रेस, भाजपा, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क


