लखनऊ एनकाउंटर में उलझीं एमपी और यूपी पुलिस
लखनऊ एनकाउंटर में उलझीं एमपी और यूपी पुलिस
भोपाल-उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट मामले में आईएसआईएस का हाथ होने को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस और मध्य प्रदेश सरकार के बयानों से नया विवाद पैदा हो गया है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा था कि आईएसआईएस ने ब्लास्ट को अंजाम दिया है। पकड़े गए आतंकियों ने बम के फोटो सीरिया भेजे थे। जबकि बुधवार को लखनऊ में कथित आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत चौधरी ने कहा कि आतंकियों के आईएसआईएस से सीधे जुड़े होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। सैफुल्लाह और उसके साथी आईएसआईएस के ऑनलाइन प्रोपेगेंडा से प्रभावित थे। इन्होंने खुद ही कानपुर और लखनऊ में स्वयंभू आईएसआईएस खुरासान सेल बना लिया था। बाहर से इनकी कोई फंडिंग नहीं थी। ये ठाकुरगंज स्थित मकान से प्लानिंग करते थे। इनकी कई जगह धमाके की प्लानिंग थी।
सीरिया फोटो भेजे जाने के सवाल पर दलजीत चौधरी ने कहा- हमें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने सैफुल्लाह के पास से आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री, साहित्य और झंडा बरामद होने की भी जानकारी दी।
वहीं एडीजी के बयान पर मप्र के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस को कुछ नहीं पता। उनके पास तो कोई इनपुट ही नहीं था। हमारी सूचना पर ही 6 लोगों को पकड़ा। सैफुल्लाह का एनकाउंटर किया।
उन्होंने बताया कि विस्फोट के बाद जो सबूत मिले हैं, उन पर अल्लाह और आईएसआईएस लिखा पाया गया।
वहीं एमपी और यूपी पुलिस की तरफ से रही बयानबाज़ी को लेकर गृहमंत्रालय ने नाराज़गी ज़ाहिर की है। मंत्रालय ने कहना है कि जबतक जांच पूरी नहीं हो जाती तबतक किसी भी संगठन का नाम नहीं लेना चाहिए। इससे जांच पर फर्क पड़ता है।
अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या सैफुल्लाह को आईएस का आतंकी बताने में पुलिस की तरफ से जल्दबाजी की गई की?
ज़ाहिर है कि ऐसे में विपक्ष तो सवाल पूछेगा ही....


