उत्कर्ष सिन्हा
(ब्रज क्षेत्र से लौट कर)
लखनऊ। मोदी लहर के तमाम दावे ब्रज की गाँव और गलियों में दम तोड़ते दिख रहे हैं। लाल पोलो टी शर्ट और लाल बेसबॉल कैप लगाये युवाओं की टोली यहाँ हर लहर के सामने समंदर सरीखी लगती है। कन्नौज में डिम्पल यादव नहीं बल्कि भाभी लड़ रही हैं तो मैनपुरी में नेताजी की इज्जत का सवाल है। फिरोजाबाद में अक्षय यादव मैदान में है। मुलायम के परिवार ने इस पट्टी के एक लम्बे हिस्से को लाल समंदर बना दिया है।
कन्नौज लोकसभा सीट 1996 से ही समाजवादी पार्टी के खाते में है। 1999 के आम चुनावों में मुलायम इस सीट से जीते थे। इसके बाद लगातार तीन चुनावों में उनके बेटे अखिलेश यादव इस सीट से सांसद चुने गए। 2012 में यूपी की सत्ता में एसपी की वापसी होने पर अखिलेश ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया। उप-चुनाव में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव यहां से निर्विरोध जीतीं। तब सवाल उठे थे कि सत्ता की हनक में अखिलेश ने यहाँ किसी प्रत्याशी को उतरने नहीं दिया। बसपा ने भी तब गिरे हुए मनोबल का परिचय दिया था। इस ने यहाँ सुब्रत पाठक पर दाँव लगाया है। डिम्पल यादव के प्रचार में जोर शोर से लगे युवा सॉफ्टवेर इंजिनियर योगेश यादव कहते हैं, यह समाजवाद की युवा पीढ़ी है जो पढ़ी लिखी और समझदार है उसे गुजरात का सच भी पता है और आरएसएस की विचारधारा भी। इन सबके साथ उसे लैपटॉप का महत्व भी पता है। ऐसे में डिम्पल जी के साथ वो खुद को आसानी से जोड़ सकता है।
असित यादव बड़े अंदाज से अपनी लाल टोपी हवा में लहराते हुए कहते हैं, डिम्पल यादव महज अखिलेश जी की पत्नी नहीं बल्कि एक बेहतर सांसद हैं। आप उनके रिकार्ड को देख लीजिये।
मैनपुरी समाजवादी पार्टी का मजबूत किला और मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट है। समाजवादी पार्टी 1996 से ही यहां लगातार जीत रही है। इस संसदीय सीट के अंदर 5 विधानसभा सीटें हैं। 2009 में इस सीट से जीतकर मुलायम सिंह यादव संसद पहुंचे थे। तीसरे मोर्चे की सरकार का दावा करते हुए मुलायम इस बार खुद को प्रधानमंत्री बनवाने की अपील कर रहे हैं। बदायूँ के चुनावो से निपट कर भतीजे धर्मेन्द्र यादव ने यहाँ की कमान सम्हाल ली है। बसपा के बड़े नेता स्वामी प्रसाद मौर्या की बेटी डॉ. संघमित्रा मौर्या यहाँ मुलायम को चुनौती दे रही हैं और स्वामी प्रसाद ने अपनी पूरी ताकत यहाँ लगा दी है। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बाबा हरदेव सिंह आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हैं।
फिरोजाबाद में रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव अपनी सियासी पारी शुरू कर रहे हैं। राम के नाम पर राजनीति शुरू करने वाली बीजेपी ने इस सीट पर 1991, 1996, 1998 तक लगातार तीन जीत हासिल की। मगर इसके बाद इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा बढ़ता गया। पार्टी लगातार तीन चुनाव जीती तो लेकिन 2009 में वह भी अपनी सीट नहीं बचा सकी। कांग्रेस के राज बब्बर ने यहाँ डिम्पल यादव को हराया था। इस बार परिसीमन के दबाव में राजबब्बर ने यह सीट छोड़ दी और गाज़ियाबाद चले गए। भाजपा ने इलाके के कद्दावर नेता एस पी सिंह बघेल को यहाँ उतारा है। भाजपा के उम्मीदवारों को यहाँ मोदी लहर का भरोसा है। मगर समाजवादी पार्टी के साथ न सिर्फ जातीय गणित है बल्कि इलाके के लोगों का भावनात्मक लगाओ भी उसे यहाँ बढ़त दिलाये हुए है।

जनादेश न्यूज़ नेटवर्क