चेतन भगत के बाजारू उपन्यास की बाजारू सफलता पर जो हिन्दी वाले अपनी हीन-ग्रंथि के चलते लहालोट हैं उन्हें यह जानना चाहिए कि इस 'लुग्दी लेखक' के बारे में स्वयं अंग्रेजी की मुख्यधारा के लेखक क्या कहते सोचते हैं।
'इंग्लिश अगस्त' उपन्यास के लेखक उपमन्यु चटर्जी,जिनका अभी अभी नया उपन्यास 'फेयरी टेल्स ऐट फिफ्टी' आया है, का कहना है कि 'मैं ऐसा लेखन नही करना चाहता जिसमें पाठक को अपने दिमाग का इस्तेमाल ही न करना पड़े।
उपमन्यु चटर्जी के ही शब्दों में -

"I tease the reader. I have maintained in all my books, that you have to make some demands of the reader. I just can't write a Chetan Bhagat book. I have put in a lot in my novel, it is only fair to ask the reader to also put in a lot."
सच है कि जो अंग्रेजी में 'पल्प' है उसे हिन्दी में लुग्दी ही कहा जाएगा भले ही इसके पीछे सोने की चमक हो ....
O- वीरेंद्र यादव
वीरेंद्र यादव, लेखक प्रख्यात आलोचक हैं।
वीरेंद्र यादव की फेसबुक वॉल से साभार