लेखक की हत्या धार्मिक पाखंड की आदिम संस्कृति है जिसे पुनर्जिवित किया जा रहा है।
डॉ. अनिल पुष्कर
तमिल लेखक पेरेयूमल मुरुगन जनवरी, 2015 को जान से मार देने की धमकी दी गई। जिसके बाद मुरुगन ने कहा 'मैं एक लेखक के रूप में मैं मर चुका।' उन्होंने लिखना बंद कर दिया है।
मेरा लेखक गोविंद पानसरे की हत्या - फरवरी, 2015 में की गई। वे तमाम मज़दूर संगठनों से जुड़े थे।
अंतरराष्ट्रीय और अंतर्धार्मिक विवाह के लिए आंदोलन चला रहे थे।
समाज विज्ञान 'मैं हिंदू क्यों नहीं हूँ' के लेखक कांचा इलैया पर मैं, 2015 को मुकदमा दर्ज किया गया।
उन्हें उनके लेख 'क्या ईश्वर लोकतांत्रिक है' के लिए ब्राह्मणवाद के खिलाफ लिखने पर मुकदमा दायर किया गया।
उन्हें मूर्तिपूजा कर विरोध किया था।
मेरा लेखक भालचंद्र नेमाड़े को सिटांब, 2015 में हत्या की धमकी दी गई है।
नेमाड़े ब्राह्मणवाद के पाखंडों का विरोध लगातार कर रहे हैं।
अगर किसी लेखक ने 'धर्म' और 'ईश्वर' का अपमान किया है तो हत्या ये तथ्यों और प्रमाण लाएंगे, सूबूत देन की उन्हें ईश्वर ने या धर्म ने हत्या का अधिकार दिया है।
धर्म और ईश्वर को मानने वाले इस बात से कितनी सहमति नहीं हो सकते हैं।
मनुष्यता की रक्षा और मनुष्य को बचाने वाला 'धर्म' किसी निर्दोष की हत्या के लिए इजाजत नहीं देता।
आज हर आदमी इस बात को महसूस कर रहा है...