लोकतंत्र की चुनौंतियां- एक परिचर्चा
लोकतंत्र की चुनौंतियां- एक परिचर्चा
वाराणसी। काशी विद्यापीठ के गाँधी अध्ययन पीठ में लोक तंत्र की चुनौंतियां - एक परिचर्चा विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी सेन्टर फार हारमोनी एण्ड पीस तथा गांधी अध्ययन पीठ ( म0गा0का0 विद्यापीठ) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गयी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जवाहर लाल कौल ने की तथा मुख्य अतिथि प्रो0 सुरेन्द्र प्रताप सिंह एवं विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर आलम जी थे। इस कार्यक्रम में वाराणसी जिले के विभिन्न प्रगतिशील बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने विचार एवं सामूहिक विचार विमर्श के उपरान्त कहा कि ‘‘इस सभा के माध्यम से हम सभी सहमत हैं। कि लोकतंत्र (भारतीय लोकतंत्र) के समक्ष की चुनौतियों का प्रतिरोध करना और स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना हमारा लक्ष्य होगा। हमें आम सहमति से लोकतांत्रिक समाजवाद के लिए समाज वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार करना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों, आदर्शों के लिए हमें संगठित होकर लामबंद होना होगा। हमें छात्र नौजवानों, मजदूर, किसानों, अल्पसंख्यकों, निर्बल और स्त्री वर्ग को एकजुट कर लोकतांत्रिक मूल्यों परम्पराओं को बचाने और उसके स्वरूप को निखारने तथा मजबूत करने के लिए अभियान प्रारम्भ करना होगा। इसी प्रक्रिया के माध्यम से हम समाज परिवर्तन तथा नया समाज बना पायेंगे।
कार्यक्रम में प्रो0 मंजूला चतुर्वेदी, प्रो0 महेश विक्रम सिंह, मूलचन्द्र सोनकर, जागृति राही, बल्लभाचार्य पाण्डेय, डॉ0 लेनिन रघुवंशी, मेंहदी बक्श, डॉ0 आनन्द तिवारी, डॉ0 एम0पी0 सिंह, वरिष्ठ संपादक अतहर हुसैन, डॉ0 सुरेन्द्र राम, प्रो0 शाहिना रिजवी, डॉ0 राजीव सिंह, अनूप कुमार श्रीवास्तव, दिलशाद अहमद, सुधीर उपस्थित रहे।
इसी क्रम में वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्त्री तीस्ता सीतलवाड़ के ऊपर साजिशन कार्यवाही व फर्जी केस की भर्त्सना की गयी और सामूहिक प्रस्ताव पारित कर उनकी सुरक्षा की अपील की गयी। अन्त में प्रो0 तुलसीराम के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
यह भी तय किया गया कि जब तक स्वस्थ लोकतंत्र स्थापित नहीं होगा, इस प्रकार का प्रजातांत्रिक संवाद कार्यक्रम की बैठक जारी रहेगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 मोहम्मद आरिफ ने किया।


