सीजीनेट की सहायता से ग्रीनपीस ने शुरू किया
सामुदायिक मोबाईल रेडियो
विधानसभा चुनावों के दौरान लोगों को मिली आवाज
अविनाश कुमार चंचल
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के चुनावी मौसम में सभी राजनीतिक दलों के नेता अपनी घोषणाएँ और वादे मीडिया के सहारे लोगों तक पहुँचाने में लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के महान जंगल क्षेत्र (सिंगरौली) में लोग अपनी आवाज और सरोकार नेताओं और अफसरों तक पहुँचाने के लिये सामुदायिक रेडियो जैसे नये माध्यम का सहारा ले रहे हैं। महान जंगल क्षेत्र में सीजीनेट स्वर की सहायता से ग्रीनपीस ने “रेडियो संघर्ष” के नाम से एक नये सामुदायिक मोबाईल रेडियो की शुरुआत की है। सदियों से अपनी जुबान बन्द रखने वाले इस क्षेत्र के लोगों को रेडियो संघर्ष ने अपनी आवाज उठाने का माध्यम दे दिया है। चार महीने के सफल परिक्षण के बाद रेडियो संघर्ष को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है।

आम लोगों की आवाज

सिंगरौली जिले में बुधेर गाँव की रहने वाली अनिता कुशवाहा को अपने विभाजित जमीन की रसीद और कागजात नहीं मिले हैं। अनिता ने रेडियो संघर्ष में फोन करके शिकायत दर्ज कराया है। उसने अपने गाँव के पटवारी का नाम और मोबाईल नम्बर भी रिकॉर्ड कराया। साथ ही, रेडियो संघर्ष के लोगों से अपील किया है कि वे इस मामले में उसकी मदद करें।

अनिता एक उदाहरण भर है। भ्रष्टाचार, पानी, बिजली, बीपीएल में गड़बड़ी से लेकर जंगल पर अपने अधिकार तक गाँव के लोग अपनी हर समस्या को रेडियो संघर्ष के माध्यम से दर्ज करवा रहे हैं। रेडियो संघर्ष को महान जंगल क्षेत्र के गाँवों में आम आदमी की समस्याओं को उठाने वाले उपकरण के रूप में लोकप्रियता मिल रही है। इसका उद्देश्य स्थानिय प्रशासन, नीति-निर्धारक तथा गाँव वालों के बीच एक सेतु की तरह काम करना है।

ग्रीनपीस की अभियानकर्ता प्रिया पिल्लई कहती हैं, “देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले आदिवासियों और समाज के शोषित तबकों की आवाज कभी नीति-निर्धारकों के पास नहीं पहुँच पाती। रेडियो संघर्ष दोनों को एक संचार माध्यम मुहैया करा रहा है। रेडियो संघर्ष एक ओर जहाँ लोगों को जागरुक करने का काम कर रहा है वहीं दूसरी तरफ नीति-निर्धारकों को सीधे आम लोगों की आवाज में उनकी समस्याओं के बारे में जानने का मौका भी दे रहा है। महान में रेडियो संघर्ष के आरम्भ होने के बाद से लोग अपने अधिकार (वनाधिकार कानून, ग्रामसभा में अधिकार) को लेकर जागरुक हुये हैं। अब वे अपने क्षेत्र में निष्पक्ष और सही तरीके से कानूनों को लागू करवाने के लिये खड़े हो रहे हैं”।

मिस कॉल करें और आवाज रिकॉर्ड करायें, सुनें

रेडियो संघर्ष नागरिक पत्रकारिता को नये आयाम दे रहा है। इसके माध्यम से गाँव वाले अपनी समस्याओं को लोगों तक पहुँचा रहे हैं। गाँव वालों को एक नम्बर दिया गया है जिस पर उन्हें मिस कॉल देकर अपनी आवाज रिकॉर्ड करानी होती है। यह एक बहुत ही आसान उपकरण है। 09902915604 पर फोन कर मिस कॉल देना होता है। कुछ सेकेण्ड में उसी नम्बर से फोन करने वाले को फोन आता है। फोन उठाने पर दूसरी तरफ से आवाज सुनायी देती है- अपना संदेश रिकॉर्ड करने के लिये 1 दबायें, दूसरे का संदेश सुनने के लिये 2 दबायें। रिकॉर्ड किये गये संदेश को मॉडरेटर द्वारा चुना जाता है जिसे उसी नम्बर पर कॉल करके सुना जा सकता है। साथ ही, चुने हुये संदेशों को www.radiosangharsh.org पर भी अपलोड किया जाता है।

जलाई से अब तक रेडियो संघर्ष के पास रोजाना छह से सात कॉल एक दिन में आते हैं। अभी तक 572 कॉल्स आ चुके हैं जिनमें कुछ खाली मैसेज वाले भी शामिल हैं। इनमें 49.5% कॉल्स वनाधिकार कानून के उल्लंघन, 32.8% कॉल्स घूस माँगे जाने की शिकायत को लेकर है। 10.3% कॉल्स गाँव वालों की मूलभूत समस्याओं मसलन, सड़क, राशन कार्ड, बीपीएल कार्ड, अस्पताल, स्कूल, पानी, बिजली आदि की समस्याओं को लेकर है। 7.6% कॉल्स विस्थापन पर भी है। सबसे ज्यादा फोन कॉल्स मैसेज को सुनने के लिये आ रहे हैं। अभी तक 3545 लोगों ने संदेश सुनने के लिये कॉल किया है। रोजाना औसतन 34 कॉल्स मैसेज सुनने वालों के आते हैं। See table <1>

इसके लिये 25 लोगों को बतौर नागरिक पत्रकार प्रशिक्षण भी दिया गया है। ये नागरिक पत्रकार लोगों को कॉल करने तथा अपनी शिकायत दर्ज कराने में मदद करते हैं। अमिलिया गांव के विरेन्द्र सिंह भी उन 25 लोगों में से एक हैं। वे कहते हैं कि “मैं लोगों को अपनी बात रिकॉर्ड करने के साथ-साथ दूसरों की समस्याओं को सुनने में भी मदद करता हूँ। जंगल के महुआ पेड़ों की अवैध मार्किंग हो या फिर ग्राम सभा में पारित फर्जी प्रस्ताव हर मामले में विरेन्द्र गांव वालों को रेडियो संघर्ष में अपनी आवाज रिकॉर्ड कराने में मदद करते हैं”।

पृष्ठभूमि

विरेन्द्र महान संघर्ष समिति के भी सदस्य हैं। 11 गाँव के लोगों द्वारा बनी यह समिति महान जंगल पर अपने वनाधिकार लेने के लिये आन्दोलनरत हैँ। महान जंगल को महान कोल लिमिटेड (एस्सार व हिंडाल्को का सुंयक्त उपक्रम) को कोयला खदान के लिये आवंटित करना प्रस्तावित है। रेडियो संघर्ष की टीम महान संघर्ष समिति के साथ काम कर लोगों को वनाधिकार कानून के बारे में जागरूक कर रही है। रेडियो संघर्ष की टीम ने महान संघर्ष समिति के साथ मिलकर 11 गाँवों में यात्रा का आयोजन किया था। इस दौरान लोगों को सामुदायिक रेडियो के बारे में प्रशिक्षित भी किया गया।

महान जंगल

प्राचीन साल जंगल वाला महान के क्षेत्र को कोयला खदान के लिये देना प्रस्तावित है। इस कोयला खदान को पहले चरण का निकास मिल चुका है लेकिन दूसरे चरण के निकास के लिये पर्यावरण व वन मंत्रालय ने 36 शर्तों को भी जोड़ा है। इन शर्तों में वनाधिकार कानून 2006 को लागू करवाना भी है। महान जंगल पर 14 गाँव प्रत्यक्ष तथा करीब 62 गाँव अप्रत्यक्ष रूप से जीविका के लिये निर्भर हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार इन गाँवों में 14,190 लोग जिनमें 5,650 आदिवासी समुदाय के लोग हैं प्रभावित होंगे। महान में कोयला खदान के आवंटन का मतलब होगा इस क्षेत्र में प्रस्तावित छत्रसाल, अमिलिया नोर्थ आदि कोल ब्लॉक के लिये दरवाजा खोलना, जिससे क्षेत्र के लगभग सभी जंगल तहस-नहस हो जायेंगे।