डीएम ने दिया आश्वासन, फिर शुरू होगी प्रक्रिया
डीएम को सौंपा उच्च न्यायालय का आदेश
सोनभद्र, 27 अगस्त। वनाधिकार कानून के अनुपालन के सम्बंध में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के साथ आज आइपीएफ, अपना दल व सीपीआई के सर्वदलीय प्रतिनिधिमण्डल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की और उनसे इस निर्णय के आलोक में जनपद में खारिज किए 53 हजार से ज्यादा दावों पर पुनर्विचार करने और जिन गाँवों के लोगों के दावे अभी तक जमा नहीं हो सके हैं, वहाँ के लोगों को अवसर प्रदान करने का आग्रह किया। जिस पर जिलाधिकारी ने शीध्र ही जनपद में वनाधिकार कानून की प्रक्रिया पुनः शुरू करने और स्वयं की अध्यक्षता में इस सम्बंध में बैठक बुलाने का आश्वासन दिया।

जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को उनके संज्ञान में लाते हुये सभी दलों के नेताओं ने कहा कि इस इलाके में वनभूमि पर हुये विवादों के कारण ही सामाजिक तनाव पैदा हुआ था। सरकार को एक बार फिर मौका मिला था कि यहाँ आदिवासियों और वनाश्रित जातियों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना अधिकार दे देती और सामाजिक तनाव को खत्म करती। लेकिन यहां तो वन विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अमले ने वनाधिकार कानून के तहत दाखिल दावों के कागजों में हेरा फेरी कर दावों को ही खारिज कर दिया। अविधिक प्रक्रिया अपनाते हुये जनपद में दाखिल 65 हजार में से 53 हजार दावे खारिज कर दिये जिसके खिलाफ आइपीएफ ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिसमें निर्णय देते हुये माननीय मुख्य न्यायाधीश की खण्ड़पीठ ने इस अधिनियम के तहत खारिज किए गए दावों पर पुर्नविचार का आदेश दिया है। नेताओं ने जिलाधिकरी से मांग की है कि अब सरकार और प्रशासन को उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करना चाहिए और आदिवासियों व वनाश्रित जातियों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना अधिकार देना चाहिए।

प्रतिनिधिमण्डल में आइपीएफ प्रदेश संगठन प्रभारी दिनकर कपूर, अपना दल के जिलाध्यक्ष चौधरी यशवंत सिंह, सीपीआई जिला कमेटी के सदस्य फारूख अली व आइपीएफ शहर प्रभारी मो0 हनीफ शामिल थे।